**** पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चीन समर्थित सैंदक (Saindak) तांबा और सोना खदान परियोजना गंभीर संकट का सामना कर रही है। बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बलूच विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच परियोजना संचालित करने वाली कंपनी ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो अगले एक महीने के भीतर उत्पादन रोकना पड़ सकता है। यह घटनाक्रम चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और पाकिस्तान में चीन के अरबों डॉलर के निवेश के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बलूचिस्तान में चीन की सबसे अहम खदान पर संकट
पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में स्थित सैंदक कॉपर एंड गोल्ड प्रोजेक्ट लंबे समय से चीन और पाकिस्तान की संयुक्त परियोजना के रूप में संचालित हो रहा है। लेकिन अब क्षेत्र में लगातार बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था ने इस परियोजना के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परियोजना से जुड़ी सैंदक मेटल्स लिमिटेड (SML) के प्रबंध निदेशक ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को पत्र लिखकर बताया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसके चलते खदान तक जरूरी मशीनरी, ईंधन, स्पेयर पार्ट्स और अन्य कच्चा माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जल्द सामान्य नहीं हुई तो अगले एक महीने के भीतर उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है।
बलूच विद्रोहियों के निशाने पर चीनी परियोजनाएं
बलूचिस्तान कई दशकों से अलगाववादी आंदोलन का केंद्र रहा है। यहां सक्रिय संगठनों, विशेषकर बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), ने हाल के वर्षों में चीन समर्थित परियोजनाओं को लगातार निशाना बनाया है।
हालिया महीनों में—
- रेलवे ट्रैक पर हमले
- राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान
- पुलिस और सुरक्षा चौकियों पर हमले
- CPEC परियोजनाओं पर हमले
- चीनी नागरिकों और इंजीनियरों को निशाना बनाने की घटनाएं
जैसी कई घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
इन हमलों के कारण खदान तक जरूरी सामान पहुंचाना मुश्किल हो गया है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने लगा है।
2001 से चल रही है चीन-पाकिस्तान की साझेदारी
सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट वर्ष 2001 से चीन की सरकारी कंपनी Metallurgical Corporation of China (MCC) और पाकिस्तान की सरकारी कंपनी Saindak Metals Limited (SML) के संयुक्त संचालन में चल रहा है।
यह पाकिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण तांबा और सोना खनन परियोजनाओं में गिनी जाती है।
इस परियोजना से निकाला गया अधिकांश तांबा और सोना चीन को निर्यात किया जाता है। पाकिस्तान के तांबा निर्यात में इस परियोजना की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मानी जाती है।
चीन के अरबों डॉलर के निवेश पर बढ़ सकता है असर
चीन ने पिछले दो दशकों में पाकिस्तान में लगभग 68 अरब डॉलर का निवेश किया है। इनमें सबसे बड़ी परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) है।
इस निवेश के तहत कई बड़े प्रोजेक्ट विकसित किए गए हैं, जिनमें—
- बिजली परियोजनाएं
- एक्सप्रेसवे और हाईवे
- रेलवे नेटवर्क
- बंदरगाह विकास
- औद्योगिक पार्क
- खनन परियोजनाएं
शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात और खराब होते हैं तो चीन भविष्य की परियोजनाओं में निवेश को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना सकता है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रहा है। चीन उसका सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक (FDI) होने के साथ-साथ सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता भी है।
आर्थिक संकट के दौरान पाकिस्तान कई बार चीन से लोन रोलओवर और वित्तीय सहायता लेकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संभालता रहा है।
ऐसे में यदि चीनी परियोजनाएं प्रभावित होती हैं तो पाकिस्तान के लिए निवेश, निर्यात और रोजगार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
यदि पाकिस्तान सरकार जल्द सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं कर पाती है, तो सैंदक खदान में उत्पादन रुकने की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर केवल इस परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक सहयोग, खनन उद्योग और भविष्य के निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है। आने वाले सप्ताह इस परियोजना और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


