India UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (India-UK Free Trade Agreement – FTA) 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते का असर पहले ही दिन दिखाई देने लगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, समझौते के लागू होने के पहले दिन ही करीब 14 करोड़ डॉलर के निर्यात की सूचना मिली है। वहीं, निर्यातकों का दावा है कि वास्तविक निर्यात इससे कहीं अधिक, 40 से 50 करोड़ डॉलर तक हो सकता है क्योंकि जीरो ड्यूटी का लाभ लेने के लिए पहले से ही बड़े पैमाने पर ऑर्डर बुक किए जा चुके थे।
पहले दिन 14 करोड़ डॉलर का निर्यात, उद्योग जगत में उत्साह
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत-ब्रिटेन FTA लागू होने के साथ ही पहले दिन लगभग 14 करोड़ डॉलर के निर्यात का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
हालांकि, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक एवं सीईओ अजय सहाय का कहना है कि वास्तविक निर्यात का आंकड़ा 40-50 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि कई निर्यातकों ने पहले ही शून्य आयात शुल्क का लाभ लेने के लिए अपने शिपमेंट तैयार कर दिए थे।
जीरो टैरिफ का मिलेगा सीधा फायदा
इस व्यापार समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत के कई प्रमुख निर्यात उत्पाद अब ब्रिटेन में जीरो कस्टम ड्यूटी के साथ पहुंचेंगे। इससे भारतीय उत्पाद पहले की तुलना में सस्ते होंगे और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
इन प्रमुख सेक्टरों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है:
- टेक्सटाइल और गारमेंट
- लेदर एवं फुटवियर
- जेम्स एवं ज्वैलरी
- इंजीनियरिंग गुड्स
- प्रोसेस्ड फूड
- कृषि उत्पाद
जेम्स और ज्वैलरी एक्सपोर्ट में तीन गुना उछाल की उम्मीद
जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) का अनुमान है कि इस समझौते के बाद ब्रिटेन को होने वाला भारतीय जेम्स एवं ज्वैलरी निर्यात तीन गुना तक बढ़ सकता है।
ब्रिटेन पहले से ही भारतीय आभूषणों का एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है। अब आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की मांग और तेज होने की संभावना है।
अपैरल सेक्टर को भी मिलेगा बड़ा फायदा
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल के अनुसार, FTA लागू होने के बाद ब्रिटेन को होने वाले भारतीय परिधान निर्यात में हर महीने कम से कम 20% की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
भारत का रेडीमेड गारमेंट उद्योग इस समझौते से सबसे अधिक रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
इंजीनियरिंग और फुटवियर उद्योग भी होंगे मजबूत
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने भी उम्मीद जताई है कि ब्रिटेन में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
इसी तरह लेदर और फुटवियर उद्योग को भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी क्योंकि भारतीय उत्पाद अब बिना अतिरिक्त आयात शुल्क के ब्रिटिश बाजार में उपलब्ध होंगे।
पहले से मिले बंपर ऑर्डर
निर्यातकों के अनुसार, FTA लागू होने की तारीख पहले से तय होने के कारण ब्रिटेन के खरीदारों ने पहले ही बड़ी मात्रा में ऑर्डर जारी कर दिए थे।
इसका कारण साफ है—
- जीरो ड्यूटी से उत्पाद सस्ते होंगे।
- खरीदारों की लागत घटेगी।
- भारतीय कंपनियों को अधिक ऑर्डर मिलेंगे।
- पुराने ग्राहकों से कारोबार और बढ़ेगा।
चूंकि गारमेंट, जेम्स-ज्वैलरी, इंजीनियरिंग और फुटवियर जैसे उत्पाद पहले से ब्रिटेन में लोकप्रिय हैं, इसलिए भारतीय कंपनियों को नए बाजार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
800 तकनीकी बैठकों के बाद हुआ समझौता
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच करीब 800 तकनीकी बैठकें (Technical Sessions) आयोजित की गईं।
दोनों देशों ने पिछले वर्ष इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 15 जुलाई 2026 से इसे लागू कर दिया गया।
किसानों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भी होगा लाभ
भारत-यूके FTA का फायदा केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा।
ब्रिटेन हर वर्ष लगभग 950 अरब डॉलर का आयात करता है। वहां की प्रति व्यक्ति आय 40,000 डॉलर से अधिक होने के कारण उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता भी काफी मजबूत है।
ऐसे में भारतीय:
- प्रोसेस्ड फूड
- कृषि उत्पाद
- मसाले
- ऑर्गेनिक फूड
- तैयार खाद्य उत्पाद
की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे किसानों और कृषि-आधारित उद्योगों को भी नए निर्यात अवसर मिल सकते हैं।
भारत के निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार
भारत वर्तमान में ब्रिटेन को हर वर्ष लगभग 13 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि FTA लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
जीरो टैरिफ, आसान बाजार पहुंच और बढ़ती मांग के कारण भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों में उत्पादन, निवेश और रोजगार तीनों में तेजी आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
भारत-यूके FTA का लागू होना भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पहले ही दिन करोड़ों डॉलर के निर्यात और निर्यातकों को मिले भारी ऑर्डर इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वैलरी, इंजीनियरिंग, फुटवियर और कृषि उत्पादों के निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे न केवल विदेशी व्यापार मजबूत होगा बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।


