RERA Guidelines: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने फ्लैट खरीदारों के हित में बड़ा फैसला लिया है। अब बिल्डर्स मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) के नाम पर जमा किए गए पैसे का मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। नए नियमों के तहत अलग बैंक खाता खोलना, राशि को एफडी में रखना, ब्याज सहित RWA/AOA को हस्तांतरित करना और पूरे फंड का ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। इससे लाखों फ्लैट खरीदारों को पारदर्शिता और वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
Highlights
- UP RERA ने मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) के लिए नए नियम लागू किए।
- बिल्डर्स को IFMS राशि के लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा।
- जमा राशि को अधिक ब्याज देने वाले बैंक में FD कराना अनिवार्य।
- RWA/AOA को ब्याज सहित पूरी राशि सौंपनी होगी।
- फ्लैट और दुकानों के लिए प्रति वर्ग फुट IFMS शुल्क तय।
- हर साल CA से ऑडिट कराना होगा।
घर खरीदारों को मिली बड़ी राहत
अगर आप उत्तर प्रदेश में फ्लैट, अपार्टमेंट या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब तक कई बिल्डर्स फ्लैट खरीदारों से Interest Free Maintenance Security (IFMS) के नाम पर लाखों रुपये जमा करवाते थे, लेकिन बाद में इस रकम का सही हिसाब नहीं देते थे।
UP RERA ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य खरीदारों की जमा राशि को सुरक्षित रखना और उसके उपयोग पर स्पष्ट निगरानी सुनिश्चित करना है।
अब अलग खाते में रखा जाएगा IFMS का पैसा
नए नियमों के अनुसार बिल्डर अब मेंटेनेंस सिक्योरिटी की राशि अपने सामान्य या व्यक्तिगत बैंक खाते में नहीं रख सकेंगे।
इसके लिए उन्हें:
- IFMS के नाम से अलग बैंक खाता खोलना होगा।
- पूरी राशि को अधिक ब्याज देने वाले बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में जमा करना होगा।
- इस राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकेगा।
इससे फ्लैट खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहेगा और उस पर ब्याज भी मिलता रहेगा।
फ्लैट और दुकानों के लिए तय किए गए नए IFMS चार्ज
UP RERA ने अलग-अलग प्रकार की प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम IFMS शुल्क भी निर्धारित कर दिया है।
| प्रॉपर्टी का प्रकार | IFMS शुल्क (प्रति वर्ग फुट) |
|---|---|
| मल्टीस्टोरी फ्लैट (ग्रुप हाउसिंग) | ₹20 से ₹100 |
| कमर्शियल दुकान (बिना एसी) | ₹40 |
| कमर्शियल दुकान (सेंट्रल एसी) | ₹50 |
अब बिल्डर इन निर्धारित सीमाओं के अनुसार ही मेंटेनेंस सिक्योरिटी चार्ज वसूल सकेंगे।
RWA को ब्याज सहित सौंपनी होगी पूरी राशि
जब किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट का कॉमन एरिया, जैसे—
- लिफ्ट
- पार्क
- क्लब हाउस
- जेनरेटर
- अन्य साझा सुविधाएं
निवासियों की संस्था (RWA या AOA) को हस्तांतरित की जाएंगी, तब बिल्डर को IFMS की पूरी राशि ब्याज सहित संबंधित संस्था के खाते में ट्रांसफर करनी होगी।
साथ ही लिखित रिकॉर्ड भी देना होगा कि:
- किस फ्लैट मालिक से कितनी राशि ली गई।
- कितना खर्च किया गया।
- खाते में कितनी राशि शेष है।
मेंटेनेंस फंड का इस्तेमाल कहां होगा?
UP RERA ने स्पष्ट किया है कि IFMS राशि का उपयोग केवल बड़े रिप्लेसमेंट और मरम्मत कार्यों के लिए किया जाएगा।
जैसे—
- लिफ्ट बदलने या मरम्मत
- जेनरेटर की रिप्लेसमेंट
- पार्क एवं कॉमन एरिया की प्रमुख मरम्मत
- अन्य बड़े साझा उपकरणों का रखरखाव
इस राशि का उपयोग रोजमर्रा के सामान्य मेंटेनेंस खर्चों के लिए नहीं किया जा सकेगा।
हर साल होगा ऑडिट
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए RWA या AOA को हर वित्तीय वर्ष में:
- चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से IFMS फंड का ऑडिट कराना होगा।
- ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के तीन महीने के भीतर वार्षिक आम सभा (AGM) में सभी सदस्यों के सामने प्रस्तुत करनी होगी।
इससे सोसायटी के प्रत्येक सदस्य को फंड के उपयोग की जानकारी मिल सकेगी।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में लागू हुए नियम
ये नए दिशा-निर्देश फिलहाल उत्तर प्रदेश में लागू किए गए हैं। इससे राज्य में नए फ्लैट खरीदने वाले लोगों को अधिक सुरक्षा और पारदर्शिता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य राज्यों की रेरा अथॉरिटी भी इसी तरह के नियम लागू कर सकती हैं।
क्या होगा घर खरीदारों को फायदा?
इन नए नियमों से:
- बिल्डर्स द्वारा IFMS राशि के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
- खरीदारों की जमा पूंजी सुरक्षित रहेगी।
- ब्याज का लाभ भी फ्लैट मालिकों को मिलेगा।
- RWA को पूरा वित्तीय नियंत्रण मिलेगा।
- सोसायटी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- मेंटेनेंस फंड के उपयोग पर नियमित निगरानी रहेगी।
निष्कर्ष
UP RERA के नए IFMS नियम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। अब बिल्डर्स मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर जमा की गई राशि का मनमाने ढंग से उपयोग नहीं कर सकेंगे। अलग बैंक खाता, एफडी, वार्षिक ऑडिट और RWA को ब्याज सहित राशि हस्तांतरित करने जैसी व्यवस्थाएं फ्लैट खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।


