E20 Petrol News: देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच IIT कानपुर की नई रिसर्च ने बड़ा दावा किया है। अध्ययन के मुताबिक, E20 पेट्रोल से न तो गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचने के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं और न ही फ्यूल एफिशिएंसी में कोई बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि E20 पेट्रोल इंजन खराब नहीं करता।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों मचा है विवाद?
बीते कुछ महीनों से सोशल मीडिया और कई प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया जा रहा था कि 20% इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे माइलेज में भारी गिरावट आती है।
इसी विवाद के बीच IIT कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की इंजन रिसर्च लैबोरेटरी ने अपनी रिसर्च के निष्कर्ष साझा किए हैं। रिसर्चर्स का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे वैज्ञानिक परीक्षणों में सही साबित नहीं हुए।
नितिन गडकरी ने क्या कहा था?
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन मालिक को E20 के कारण वास्तविक तकनीकी समस्या महसूस होती है तो वह अपनी गाड़ी को अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच के लिए ले जाए। उन्होंने आलोचकों से भी कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत है तो उसे सामने लाया जाए।
माइलेज पर पड़ सकता है थोड़ा असर
गडकरी ने यह भी स्वीकार किया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ मामलों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।
उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि:
- इथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा क्षमता) पेट्रोल से कम होती है।
- हाईवे पर लंबी दूरी तय करने के दौरान माइलेज में मामूली अंतर दिखाई दे सकता है।
- शहर के ट्रैफिक और कम स्पीड वाली ड्राइविंग में यह अंतर बेहद कम रहता है।
IIT कानपुर की स्टडी में क्या सामने आया?
IIT कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की इंजन रिसर्च लैबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज करणा के अनुसार:
- E20 पेट्रोल से फ्यूल एफिशिएंसी में 5% से कम का अंतर देखा गया।
- यह अंतर केवल ईंधन की वजह से नहीं बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और वाहन की मेंटेनेंस जैसे अन्य कारणों से भी हो सकता है।
- लगातार परीक्षणों में यह साबित नहीं हुआ कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता है।
इंजन को नुकसान पहुंचने का नहीं मिला कोई सबूत
रिसर्च टीम का कहना है कि बड़े स्तर पर किए गए परीक्षणों में:
- इंजन में अतिरिक्त घिसाव नहीं मिला।
- जंग (Corrosion) जैसी समस्या नहीं देखी गई।
- फ्यूल सिस्टम पर कोई गंभीर तकनीकी प्रभाव नहीं पाया गया।
- पुरानी और मौजूदा दोनों तरह की कई गाड़ियों पर परीक्षण किए गए।
रिसर्चर्स ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन दावों को भी वैज्ञानिक आधार पर गलत बताया जिनमें E20 से इंजन खराब होने की बात कही जाती है।
वाहन मालिकों को क्या सलाह दी गई?
IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें।
उन्होंने सलाह दी कि वाहन के संबंध में:
- कंपनी के यूजर मैनुअल को देखें।
- वाहन निर्माता की सलाह का पालन करें।
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की आधिकारिक गाइडलाइन पर भरोसा करें।
E85 फ्यूल पर भी चल रहा है रिसर्च
IIT कानपुर की इंजन रिसर्च लैबोरेटरी केवल E20 ही नहीं बल्कि E85 फ्यूल पर भी अध्ययन कर रही है।
E85 में लगभग 85% इथेनॉल होता है। हालांकि इस ईंधन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजन और फ्यूल सिस्टम की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दिशा में भी सफल परीक्षण किए जा चुके हैं।
सरकार क्यों बढ़ा रही है E20 का इस्तेमाल?
सरकार का उद्देश्य केवल पेट्रोल की बचत करना नहीं है, बल्कि कई बड़े लक्ष्य भी इससे जुड़े हैं।
E20 के संभावित फायदे
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- किसानों से खरीदे जाने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ेगी।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
- स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?
हाल ही में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जारी अपने विस्तृत FAQ दस्तावेज में कहा कि E20 ईंधन को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण, ऑटोमोबाइल कंपनियों के सहयोग और विभिन्न अनुसंधानों के बाद लागू किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार E20:
- पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है।
- कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है।
- निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित ईंधन है।
क्या आपकी गाड़ी में E20 पेट्रोल डलवाना चाहिए?
यदि आपकी कार या बाइक के निर्माता ने E20 कम्पैटिबिलिटी की अनुमति दी है, तो विशेषज्ञों के अनुसार E20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित माना जाता है। वहीं पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी गाड़ी के मैनुअल या अधिकृत डीलर से यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका वाहन E20 ईंधन के लिए उपयुक्त है या नहीं।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच IIT कानपुर की स्टडी ने सरकार के उस दावे को मजबूत किया है कि E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान पहुंचने के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि माइलेज में मामूली बदलाव संभव है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल ईंधन नहीं बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और वाहन की देखभाल जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करता है। ऐसे में वाहन मालिकों को अफवाहों के बजाय आधिकारिक गाइडलाइन और वाहन निर्माता की सलाह के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।


