India Policy Change: भारत सरकार ने अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy-FTP) 2023 में बड़ा बदलाव किया है। अब जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने या तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान जोड़ दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका भारत समेत कई देशों की व्यापार नीतियों की जांच कर रहा है और अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर भी विचार कर रहा है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव भारत के व्यापारिक नियमों को अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप बनाएगा और वैश्विक स्तर पर भारतीय व्यापार की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।
DGFT ने जारी किया नया नोटिफिकेशन
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी कर FTP 2023 में नया पैराग्राफ 2.20B जोड़ा है। इस नए प्रावधान के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा सके जो पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी के जरिए तैयार किए गए हों।
सरकार किसी जांच रिपोर्ट या अन्य विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ऐसे उत्पादों की पहचान कर सकेगी और उनके आयात पर रोक लगाने का निर्णय ले सकेगी। यह नया नियम राजपत्र (Official Gazette) में प्रकाशित होने के 30 दिन बाद लागू होगा।
अमेरिकी जांच के बीच आया बड़ा फैसला
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका अपने कई व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका यह जांच कर रहा है कि क्या उसके साझेदार देशों के पास जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका भारत पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल अमेरिका को भेजे जाने वाले अधिकांश भारतीय उत्पादों पर 10% आयात शुल्क लागू है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों के सामने अपनी व्यापार नीति को अधिक पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साबित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
DGFT करेगा जांच
नए नियम के तहत यदि किसी आयातित उत्पाद के बारे में संदेह होता है कि वह जबरन मजदूरी से तैयार किया गया है, तो DGFT इसकी जांच करेगा।
यदि जांच में पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो DGFT केंद्र सरकार को उस उत्पाद के आयात पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करेगा। जांच की पूरी प्रक्रिया ‘हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स (HBP) 2023’ के अनुसार पूरी की जाएगी।
जबरन मजदूरी की नई परिभाषा भी जोड़ी गई
सरकार ने FTP के चैप्टर-11 में “जबरन मजदूरी” की नई परिभाषा भी शामिल की है। यह परिभाषा इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) के Forced Labour Convention, 1930 (Convention No. 29) के अनुरूप रखी गई है।
नई परिभाषा के अनुसार,
“ऐसा कोई भी कार्य या सेवा जो किसी व्यक्ति से किसी दंड या सजा के भय से जबरन कराई जाए और जिसके लिए उस व्यक्ति ने स्वेच्छा से अपनी सहमति न दी हो, उसे जबरन मजदूरी माना जाएगा।”
भारत के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में श्रम मानकों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस फैसले से कई फायदे हो सकते हैं—
- भारत की व्यापार नीति अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी।
- वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यातकों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
- भविष्य में व्यापार विवादों और टैरिफ संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत की छवि मजबूत हो सकती है।
सरकार ने क्या कहा?
DGFT के अनुसार, यह संशोधन भारत के व्यापारिक ढांचे को और मजबूत करेगा। इससे सरकार को ऐसे उत्पादों की पहचान कर उनके आयात पर रोक लगाने की कानूनी शक्ति मिलेगी जो जबरन मजदूरी से तैयार किए गए हों।
यह अधिसूचना विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की मंजूरी से जारी की गई है।
आगे क्या होगा?
नया नियम लागू होने के बाद सरकार विभिन्न उत्पादों और सप्लाई चेन की निगरानी कर सकेगी। यदि किसी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे भारत की व्यापार नीति वैश्विक श्रम मानकों के अधिक करीब पहुंचेगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों के साथ विश्वास भी मजबूत होगा।


