Byju Raveendran Singapore Court Case: कभी भारत के सबसे सफल स्टार्टअप संस्थापकों में गिने जाने वाले बायजू (BYJU’S) के फाउंडर बायजू रवींद्रन की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सिंगापुर के हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना (Contempt of Court) मामले में सुनाई गई 6 महीने की जेल की सजा पर रोक लगाने और उसे पलटने की अर्जी खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद रवींद्रन के लिए सिंगापुर लौटना फिलहाल आसान नहीं होगा।
सिंगापुर हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर हाई कोर्ट ने 9 जुलाई को बायजू रवींद्रन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अदालत की अवमानना के मामले में मिली छह महीने की जेल की सजा को रोकने की मांग की थी।
रवींद्रन की ओर से पैरवी कर रही अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्म Lazareff Le Bars ने मंगलवार को इस फैसले की पुष्टि की। फर्म के वकील जे. माइकल मैकनट ने कहा कि रवींद्रन का मानना है कि उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में अदालत के किसी आदेश का उल्लंघन नहीं किया है और वे उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
क्या बायजू रवींद्रन को तुरंत जेल जाना होगा?
फिलहाल ऐसा नहीं है।
दरअसल, रवींद्रन इस समय सिंगापुर में मौजूद नहीं हैं। उनके वकील के अनुसार, इस फैसले का तत्काल प्रभाव तभी पड़ेगा जब वह भविष्य में सिंगापुर लौटने का फैसला करेंगे।
इसका मतलब है कि यदि रवींद्रन सिंगापुर प्रवेश करते हैं, तो उन्हें अदालत के आदेश के अनुसार जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है या फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत नई अपील करनी होगी। इसलिए अभी उन्हें तत्काल जेल नहीं भेजा जाएगा, लेकिन सिंगापुर वापसी उनके लिए कानूनी चुनौती बनी रहेगी।
किस मामले में मिली थी छह महीने की सजा?
बायजू रवींद्रन को अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के मामले में मई 2026 में छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए सजा पर रोक लगाने की अपील की थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
रवींद्रन का दावा है कि उन्होंने किसी भी कोर्ट आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया।
कभी भारत का सबसे बड़ा स्टार्टअप था BYJU’S
एक समय ऐसा था जब BYJU’S भारत का सबसे मूल्यवान (Most Valuable) स्टार्टअप माना जाता था। बायजू रवींद्रन ने Think & Learn Pvt. Ltd. की स्थापना की थी, जिसने ऑनलाइन एजुकेशन सेक्टर में क्रांति ला दी थी।
कोविड-19 महामारी के दौरान कंपनी ने तेज़ी से विस्तार किया और उसकी वैल्यूएशन अरबों डॉलर तक पहुंच गई। लेकिन इसके बाद कंपनी कई चुनौतियों में फंस गई, जिनमें शामिल हैं:
- तेजी से किया गया विस्तार
- बढ़ता कर्ज
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े विवाद
- निवेशकों के साथ कानूनी विवाद
- वित्तीय संकट और दिवालियापन संबंधी मामले
इन समस्याओं के चलते BYJU’S का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ और कंपनी की वैल्यूएशन में भारी गिरावट आई।
अमेरिका और सिंगापुर में भी कानूनी लड़ाई
बायजू रवींद्रन केवल सिंगापुर ही नहीं, बल्कि कई देशों में कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं।
- अमेरिका में निवेशक लगभग 1.2 अरब डॉलर के टर्म लोन से जुड़े नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं।
- सिंगापुर में कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) की एक सहायक कंपनी भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है।
- कंपनी के वित्तीय लेनदेन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर कई जांच और मुकदमे चल रहे हैं।
आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगापुर हाई कोर्ट का यह फैसला रवींद्रन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि उनके पास आगे भी कानूनी अपील के विकल्प मौजूद हैं।
उनके वकील का कहना है कि यदि भविष्य में रवींद्रन सिंगापुर जाते हैं, तो वे उस समय अदालत में नई अपील दाखिल कर सकते हैं और अदालत उस पर विचार करेगी।
फिलहाल इतना तय है कि सिंगापुर लौटने की स्थिति में उन्हें अदालत के आदेश का सामना करना पड़ेगा, इसलिए उनकी कानूनी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।


