नई दिल्ली: भारत को दुनिया में चाय प्रेमियों का देश माना जाता है। असम और दार्जिलिंग की चाय की खुशबू दुनियाभर में पहचान बना चुकी है। ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को भारतीय प्रीमियम कॉफी बॉक्स उपहार में दिया, तो यह सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक गिफ्ट नहीं था। इसके पीछे भारत की कॉफी इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने और निर्यात बढ़ाने की बड़ी रणनीति छिपी हुई है।
भारत अब केवल चाय निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि तेजी से बढ़ते वैश्विक कॉफी बाजार में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम को क्या गिफ्ट किया गया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को भारतीय प्रीमियम कॉफी का विशेष बॉक्स भेंट किया। इस बॉक्स में भारत के अलग-अलग कॉफी उत्पादक क्षेत्रों से चुनी गई उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी शामिल थी।
इस गिफ्ट बॉक्स में तीन प्रमुख प्रोसेसिंग तकनीकों से तैयार कॉफी रखी गई थी—
- वॉश्ड कॉफी
- नैचुरल प्रोसेस कॉफी
- हनी प्रोसेस कॉफी
इनके जरिए भारत ने दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की कि भारतीय कॉफी अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता और विविधता के मामले में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही है।
चाय के साथ-साथ कॉफी में भी बढ़ रहा भारत
भारत लंबे समय से दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल रहा है। वर्ष 2024 में भारत ने 250 मिलियन किलोग्राम से अधिक चाय का निर्यात किया।
अब कॉफी क्षेत्र में भी भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
कॉफी उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। यहां मुख्य रूप से दो प्रकार की कॉफी उगाई जाती है—
- अरेबिका (Arabica): बेहतर खुशबू और हल्के स्वाद के लिए प्रसिद्ध।
- रोबस्टा (Robusta): अधिक कैफीन और गाढ़े स्वाद वाली कॉफी।
देश में हर साल लगभग 3.6 लाख टन कॉफी का उत्पादन होता है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 3.6 प्रतिशत है।
किन राज्यों में होती है सबसे ज्यादा कॉफी?
भारत की लगभग 95 प्रतिशत कॉफी केवल तीन राज्यों से आती है।
- कर्नाटक
- केरल
- तमिलनाडु
इन राज्यों की जलवायु और पहाड़ी क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी उत्पादन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
128 देशों में पहुंच रही भारतीय कॉफी
भारत अपने कुल कॉफी उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा विदेशों में निर्यात करता है।
भारतीय कॉफी आज 128 देशों तक पहुंच चुकी है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
कॉफी निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति
भारत केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि कॉफी निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्य आंकड़े:
- दुनिया का 5वां सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक देश
- वित्त वर्ष 2024-25 में कॉफी निर्यात लगभग 1.8 अरब डॉलर
- पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1.29 अरब डॉलर था
- एक साल में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि
यह वृद्धि बताती है कि भारतीय कॉफी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।
सरकार का 2047 तक बड़ा लक्ष्य
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया ने वर्ष 2047 तक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुख्य लक्ष्य:
- कॉफी उत्पादन को 9 लाख टन तक पहुंचाना।
- भारत को दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक देशों में शामिल करना।
- वैश्विक बाजार में भारतीय कॉफी की ब्रांड वैल्यू बढ़ाना।
- किसानों की आय और निर्यात दोनों में वृद्धि करना।
इसके अलावा अनुमान है कि वर्ष 2028 तक भारत का कॉफी उद्योग लगभग 8.9 प्रतिशत CAGR से बढ़ेगा।
ऑस्ट्रेलिया पर भारत की खास नजर क्यों?
Gift given by PM Narendra Modi to Australian PM Anthony Albanese: Indian Premium Coffee Box
The Indian Premium Coffee Box showcases the rich diversity and quality of coffee cultivated across India's major coffee-growing regions. Featuring carefully selected varieties with… pic.twitter.com/w5nkc6A7TE
— ANI (@ANI) July 12, 2026 ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कॉफी संस्कृति बेहद मजबूत है। वहां अधिकांश लोग नियमित रूप से कॉफी पीते हैं और कैफे संस्कृति काफी विकसित है।
हालांकि ऑस्ट्रेलिया में स्थानीय कॉफी उत्पादन बहुत सीमित है।
- कुल मांग का 1 प्रतिशत से भी कम उत्पादन देश में होता है।
- अधिकांश कॉफी ब्राजील और वियतनाम से आयात की जाती है।
- स्थानीय उत्पादन मुख्य रूप से न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड तक सीमित है।
- अधिक श्रम लागत के कारण वहां उत्पादित कॉफी काफी महंगी पड़ती है।
ऐसे में भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया एक बड़ा संभावित बाजार बनकर उभर रहा है।
कॉफी बॉक्स गिफ्ट करने के पीछे क्या थी रणनीति?
विशेषज्ञों के अनुसार यह गिफ्ट केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं बल्कि आर्थिक और व्यापारिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
भारत के प्रमुख उद्देश्य:
- भारतीय प्रीमियम कॉफी का वैश्विक प्रचार।
- ऑस्ट्रेलियाई आयातकों का ध्यान आकर्षित करना।
- भारतीय कॉफी ब्रांड की पहचान मजबूत करना।
- ऑस्ट्रेलिया में बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना।
- कॉफी सेक्टर में निवेश और व्यापार सहयोग को बढ़ावा देना।
भारत में क्यों बढ़ रही है कॉफी की लोकप्रियता?
भारत पारंपरिक रूप से चाय प्रधान देश रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कॉफी की मांग तेजी से बढ़ी है।
इसके पीछे कई कारण हैं—
- शहरी कैफे संस्कृति का विस्तार।
- युवाओं में प्रीमियम कॉफी का बढ़ता चलन।
- कोल्ड कॉफी और स्पेशलिटी ड्रिंक्स की लोकप्रियता।
- पश्चिमी लाइफस्टाइल का प्रभाव।
- कॉर्पोरेट और स्टार्टअप संस्कृति में कैफे मीटिंग्स का बढ़ना।
आज कॉफी केवल पेय पदार्थ नहीं बल्कि युवाओं की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है।
2025 में चाय और कॉफी दोनों ने बनाया रिकॉर्ड
साल 2025 भारत के पेय निर्यात क्षेत्र के लिए बेहद शानदार रहा।
चाय निर्यात
- लगभग 2.80 लाख टन निर्यात
- 1.04 अरब डॉलर की कमाई
कॉफी निर्यात
- 3.48 लाख टन कॉफी का निर्यात
- 2.05 अरब डॉलर की आय
- पहली बार कॉफी निर्यात से कमाई 2 अरब डॉलर के पार पहुंची
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय कॉफी अब वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रही है।
निष्कर्ष
भारत लंबे समय तक चाय की पहचान के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब कॉफी भी देश की नई वैश्विक ताकत बनकर उभर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को भारतीय प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय कॉफी की गुणवत्ता, विविधता और वैश्विक क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। यदि सरकार का 2047 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व कॉफी बाजार में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।


