Train Saloon Car Rudrabhishek: भारतीय रेलवे के सैलून कोच में रुद्राभिषेक कराए जाने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। रेलवे ने साफ किया है कि यह कोई सरकारी वीआईपी सैलून नहीं था, बल्कि निजी संस्था द्वारा नियमों के तहत बुक किया गया सैलून कार कोच था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चलती ट्रेन में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या निजी कार्यक्रम किए जा सकते हैं? आइए जानते हैं रेलवे के नियम।
चलती ट्रेन में सैलून कोच में रुद्राभिषेक से विवाद
चलती ट्रेन में सैलून कोच के अंदर रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर ट्रेन के सामान्य कोच में धार्मिक गतिविधियों को लेकर नियम लागू होते हैं तो फिर सैलून कोच में इस तरह के आयोजन की अनुमति कैसे दी गई।
मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब इससे पहले एक ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे में शादी के बाद की सजावट को लेकर विवाद हुआ था। अब सैलून कोच में पूजा कराने को लेकर रेलवे को सफाई देनी पड़ी है।
रेलवे ने रुद्राभिषेक मामले पर क्या कहा?
ट्रेन में नमाज़ पढ़ने पर भावनाएं आहत हो जाती हैं…
ट्रेन के केबिन में हनीमून का सरप्राइज देने पर संस्कृति खतरे में आ जाती है और TTE सस्पेंड हो जाता है…
लेकिन जब भारतीय रेलवे के एक वीआईपी सैलून कोच (Saloon Coach) के अंदर बकायदा पंडितों को बुलाकर, चलती ट्रेन में पूरा तामझाम… pic.twitter.com/7use0bmfde
— Sudhanshu Yadav (@SocialistSpirit) July 12, 2026 पश्चिम रेलवे ने सोशल मीडिया पर जारी जानकारी में बताया कि संबंधित सैलून कार को IRCTC के माध्यम से कमर्शियल बुकिंग के तहत लिया गया था।
रेलवे के अनुसार:
- 8 जुलाई 2026 को IRCTC ने सैलून कार की बुकिंग की थी।
- इसके लिए पार्टी ने ₹3,08,580 रुपये का एडवांस भुगतान किया था।
- सैलून कार को 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली से मुंबई जाने वाली ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस में जोड़ा गया था।
- यह एक तरफ की यात्रा के लिए बुकिंग थी।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी सरकारी विभाग, मंत्रालय या सरकारी अधिकारी को आवंटित वीआईपी सैलून नहीं था।
रेलवे ने कहा कि सोशल मीडिया पर इसे सरकारी सैलून बताने वाले दावे सही नहीं हैं। यह एक निजी संस्था द्वारा कराई गई कमर्शियल बुकिंग थी।
क्या सैलून कोच में पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति है?
👉🏻 The Saloon Car was booked by IRCTC on 08.07.26.The party made an advance payment of Rs 3,08,580
as commercial booking. The Saloon Car was to be attached in Train No. 12926 Paschim Express on one way journey from New Delhi (NDLS) to Mumbai (BDTS) on 10.07.2026.
👉🏻NR issued…
— Western Railway (@WesternRly) July 12, 2026 रेलवे नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति या संस्था सैलून कार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बुक करती है तो उसे निजी यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में निजी धार्मिक अनुष्ठान करना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन कुछ शर्तों का पालन जरूरी होता है।
रेलवे की प्राथमिक शर्तें इस प्रकार हैं:
- यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन होना चाहिए।
- किसी अन्य यात्री को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
- ट्रेन संचालन में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।
- आग, धुआं या ज्वलनशील सामग्री से जुड़े जोखिम नहीं होने चाहिए।
- रेलवे स्टाफ के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
यानी सैलून कोच निजी स्थान की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था सर्वोपरि रहती है।
क्या है सैलून कोच? जानिए इसकी खास सुविधाएं
सैलून कार भारतीय रेलवे का एक खास तरह का कोच होता है, जिसे पहले मुख्य रूप से रेलवे अधिकारियों और विशेष यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब रेलवे और IRCTC के माध्यम से इसे निजी बुकिंग के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है।
सैलून कोच में आम कोचों से काफी ज्यादा सुविधाएं होती हैं।
इसमें आमतौर पर:
- दो बेडरूम की सुविधा
- निजी बैठक कक्ष
- 4 से 6 अतिरिक्त बर्थ
- अटेंडेंट की सुविधा
- एसी सुविधा
- रसोईघर
- रेफ्रिजरेटर
- आरओ पानी की सुविधा
- भोजन तैयार करने की व्यवस्था
जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
यात्रियों की जरूरत के अनुसार IRCTC अतिरिक्त शुल्क पर खाना बनाने वाले कर्मचारी और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध करा सकता है।
सैलून कार में मिलती है प्राइवेसी
रेलवे सैलून कार को खासतौर पर उन यात्रियों के लिए उपलब्ध कराता है जो परिवार या निजी समूह के साथ आरामदायक और गोपनीय यात्रा करना चाहते हैं।
इसमें सामान्य एसी कोच की तुलना में ज्यादा निजी स्थान मिलता है। यही कारण है कि कई लोग इसे विशेष अवसरों, पारिवारिक यात्राओं या लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा के लिए पसंद करते हैं।
सैलून में:
- बड़ा लिविंग-कम-डाइनिंग एरिया
- आरामदायक सोफे
- टीवी सुविधा
- निजी बेडरूम
- बाथरूम
जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
फर्स्ट एसी कूपे में सुहागरात सजावट पर भी हुआ था विवाद
इससे पहले नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कूपे में एक नवविवाहित जोड़े के लिए सजावट किए जाने का मामला सामने आया था।
रेलवे ने बताया था कि यात्री ने निजी तौर पर डेकोरेटर को बुलाया था, लेकिन कोच में डेकोरेटर का प्रवेश अधिकृत नहीं था। रेलवे ने इसे सुरक्षा नियमों की गंभीर चूक माना था।
इस मामले में संबंधित टिकट चेकर पर कार्रवाई की गई थी।
FTR बुकिंग के तहत मिलती है सुविधा
रेलवे में निजी कोच या सैलून बुकिंग के लिए FTR यानी Full Tariff Rate सेवा का इस्तेमाल किया जाता है।
इस सेवा के तहत यात्री पूरी ट्रेन, कोच या सैलून कार को विशेष यात्रा के लिए बुक कर सकते हैं।
बुकिंग के दौरान:
- निर्धारित किराया देना होता है।
- सुरक्षा राशि जमा करनी पड़ सकती है।
- रेलवे की सभी शर्तों का पालन करना जरूरी होता है।
निष्कर्ष: निजी आयोजन संभव, लेकिन सुरक्षा नियम जरूरी
सैलून कोच में रुद्राभिषेक का मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि यह सामान्य ट्रेन यात्रा से अलग था। हालांकि रेलवे के अनुसार यह निजी कमर्शियल बुकिंग थी और नियमों के तहत की गई थी।
रेलवे में निजी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन किसी भी धार्मिक, सामाजिक या निजी आयोजन के दौरान सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा और ट्रेन संचालन के नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता।


