Share Market Recovery: शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे निचले स्तर से करीब 900 अंक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 50 दोबारा 24,250 के पार पहुंच गया। आईटी सेक्टर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और अहम सपोर्ट लेवल पर खरीदारी से बाजार को सहारा मिला।
Share Market Today: शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में जबरदस्त रिकवरी
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी दबाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इसके चलते बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया।
हालांकि, गिरावट ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। निचले स्तरों पर निवेशकों ने खरीदारी शुरू कर दी, जिससे बाजार ने तेज रिकवरी दिखाई। सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से करीब 900 अंक ऊपर आ गया, वहीं निफ्टी 50 ने भी 24,250 के स्तर को फिर हासिल कर लिया।
दोपहर करीब 12:55 बजे सेंसेक्स 141.17 अंक यानी 0.18 फीसदी की बढ़त के साथ 77,710.56 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 23.80 अंक यानी 0.10 फीसदी की तेजी के साथ 24,230.70 पर था।
इंट्रा-डे में सेंसेक्स 711.96 अंक गिरकर 76,857.43 तक पहुंच गया था, लेकिन वहां से 931.86 अंकों की रिकवरी करते हुए 77,789.29 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 206.70 अंक टूटकर 24,000.20 तक आया था, जिसके बाद इसमें करीब 260 अंकों की तेजी आई।
बाजार में रिकवरी की 4 बड़ी वजहें
1. निचले स्तरों पर हुई वैल्यू बाइंग
बाजार में गिरावट को निवेशकों ने खरीदारी के मौके के रूप में इस्तेमाल किया। जैसे ही प्रमुख इंडेक्स अपने अहम सपोर्ट जोन के करीब पहुंचे, घरेलू निवेशकों ने मजबूत कंपनियों के शेयरों में खरीदारी शुरू कर दी।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब बाजार के लिए नया सामान्य बन चुका है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में मार्च जैसी स्थिति नहीं है।
उनका कहना है कि जब तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहती हैं, तब तक भारतीय बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है।
2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला सपोर्ट
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की वापसी भी तेजी की एक बड़ी वजह रही। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 2,603.72 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
जुलाई महीने में 10 जुलाई तक विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट में करीब 5,155 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। इसके अलावा प्राइमरी मार्केट और अन्य निवेश को मिलाकर जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों का कुल निवेश करीब 15,156 करोड़ रुपये रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, भारत की बेहतर होती आर्थिक स्थिति, रुपये में स्थिरता और अन्य एशियाई बाजारों में कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर बेहतर हुआ है।
3. IT सेक्टर ने संभाला बाजार का मोर्चा
जब ज्यादातर सेक्टर शुरुआती गिरावट से जूझ रहे थे, उस समय आईटी शेयरों में मजबूती देखने को मिली। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) के बेहतर कारोबारी प्रदर्शन ने पूरे आईटी सेक्टर में सकारात्मक माहौल बनाया।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में आधे फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। आईटी इंडेक्स के 10 में से 8 शेयरों में बढ़त रही।
TCS के शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार की धारणा मजबूत हुई। निवेशकों को उम्मीद है कि आईटी कंपनियों के बेहतर नतीजे आने वाले समय में सेक्टर को सहारा दे सकते हैं।
4. 24,000 के स्तर पर मजबूत टेक्निकल सपोर्ट
निफ्टी 50 के लिए 24,000 का स्तर एक अहम टेक्निकल सपोर्ट जोन माना जा रहा है। शुरुआती गिरावट में जब इंडेक्स इस स्तर के करीब पहुंचा तो खरीदारी बढ़ गई और बाजार ने तुरंत वापसी कर ली।
Rajesh Palviya के मुताबिक, निफ्टी के लिए फिलहाल 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 23,800 तक फिसल सकता है।
वहीं ऊपर की तरफ 24,300-24,500 का जोन बाजार के लिए अगला अहम रेजिस्टेंस क्षेत्र हो सकता है।
ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी रिकवरी
शुरुआती दबाव के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सुधार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स आधे फीसदी से ज्यादा की गिरावट से उबरकर लगभग सपाट स्तर पर आ गए।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने केवल बड़े शेयरों में ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार में भी निचले स्तरों पर खरीदारी की।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की नजर कुछ प्रमुख संकेतों पर रहेगी:
- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- विदेशी निवेशकों का रुख
- कंपनियों के तिमाही नतीजे
- रुपये की चाल
अगर वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में और रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों ही सामान्य प्रक्रिया हैं। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और जोखिम को समझना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता है।


