MTNL Debt Crisis: सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) भारी कर्ज के बोझ तले दब गई है। कंपनी पर कुल ₹37,223 करोड़ का वित्तीय कर्ज है, जबकि इसकी मौजूदा मार्केट वैल्यू करीब ₹1,838 करोड़ रह गई है। कंपनी ने कई बैंकों के कर्ज और ब्याज भुगतान में डिफॉल्ट की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी है।
Highlights
- MTNL ने ₹9,495 करोड़ के बैंक कर्ज और ब्याज भुगतान में चूक की
- सात प्रमुख सरकारी बैंकों का पैसा फंसा हुआ है
- कंपनी पर कुल वित्तीय कर्ज ₹37,223 करोड़ पहुंच गया है
- कभी दिल्ली और मुंबई टेलीकॉम बाजार में MTNL का दबदबा था
MTNL पर ₹9,495 करोड़ का बैंक कर्ज बकाया
सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) की आर्थिक हालत लगातार खराब होती जा रही है। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया है कि वह कई बैंकों के कर्ज और ब्याज भुगतान में डिफॉल्ट कर चुकी है।
30 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, MTNL पर बैंकों का कुल बकाया ₹9,495.33 करोड़ से अधिक हो गया है। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार:
- ओवरड्यू मूलधन: ₹2,195.72 करोड़
- ओवरड्यू ब्याज: ₹1,700.99 करोड़
वित्तीय दबाव के चलते कंपनी समय पर अपने कर्ज भुगतान की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रही है।
इन 7 सरकारी बैंकों का पैसा फंसा
MTNL ने जिन बैंकों के भुगतान में चूक की है, उनमें देश के कई बड़े सरकारी बैंक शामिल हैं। इनमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित अन्य बैंक शामिल हैं।
MTNL के बैंक डिफॉल्ट की स्थिति
| बैंक | NPA की तारीख | कुल बकाया |
|---|---|---|
| यूनियन बैंक ऑफ इंडिया | 12 अगस्त 2024 | ₹4,144.46 करोड़ |
| बैंक ऑफ इंडिया | 4 सितंबर 2024 | ₹1,249.46 करोड़ |
| पंजाब नेशनल बैंक | 9 सितंबर 2024 | ₹520.18 करोड़ |
| भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | 28 सितंबर 2024 | ₹388.37 करोड़ |
| यूको बैंक | 28 सितंबर 2024 | ₹298.13 करोड़ |
| पंजाब एंड सिंध बैंक | 8 अक्टूबर 2024 | ₹204.11 करोड़ |
| इंडियन ओवरसीज बैंक | 3 फरवरी 2025 | ₹2,690.62 करोड़ |
कुल मिलाकर इन बैंकों का MTNL पर ₹9,495.33 करोड़ का बकाया है।
कुल कर्ज ₹37,223 करोड़ के पार
MTNL की समस्या केवल बैंक कर्ज तक सीमित नहीं है। कंपनी पर कुल वित्तीय देनदारी करीब ₹37,223 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
कंपनी के कुल कर्ज में शामिल हैं:
- बैंक ऋण: ₹9,495 करोड़
- सॉवरेन गारंटी बॉन्ड (SG Bonds): ₹24,071 करोड़
- दूरसंचार विभाग (DoT) से ऋण: ₹3,657 करोड़
यानी कंपनी की कुल देनदारी उसकी मौजूदा बाजार कीमत से कई गुना ज्यादा है।
लगातार बढ़ रही है भुगतान में चूक
MTNL की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी जुलाई 2024 से ही लगातार किस्तों और ब्याज भुगतान में परेशानी का सामना कर रही है।
कंपनी समय-समय पर स्टॉक एक्सचेंज को अपने डिफॉल्ट की जानकारी देती रही है, लेकिन अभी तक उसकी वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है।
कंपनी के सचिव रतन मणि सुमित द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट में बैंक कर्ज और ब्याज भुगतान से जुड़ी जानकारी दी गई है।
कभी दिल्ली और मुंबई में था MTNL का दबदबा
आज भले ही MTNL आर्थिक संकट से जूझ रही है, लेकिन एक समय ऐसा था जब यह कंपनी देश की सबसे मजबूत टेलीकॉम कंपनियों में शामिल थी।
महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) की स्थापना 1986 में हुई थी। कंपनी को खास तौर पर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में टेलीकॉम सेवाएं देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
1990 के दशक की शुरुआत तक MTNL का इन दोनों शहरों में लगभग एकाधिकार था। उस समय लैंडलाइन फोन कनेक्शन के लिए लोगों को MTNL पर निर्भर रहना पड़ता था।
लेकिन बाद में टेलीकॉम सेक्टर में निजी कंपनियों के प्रवेश के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी कंपनियों के आने के बाद MTNL धीरे-धीरे बाजार हिस्सेदारी खोती चली गई।
MTNL की मार्केट वैल्यू कर्ज के मुकाबले बेहद कम
शेयर बाजार में MTNL की स्थिति भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
कंपनी का मौजूदा बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) करीब ₹1,832-1,838 करोड़ के आसपास है, जबकि उस पर कुल कर्ज ₹37,223 करोड़ है।
इस तुलना से साफ है कि कंपनी का कर्ज उसकी बाजार वैल्यू से करीब 20 गुना ज्यादा है।
सरकार ने पहले भी दी है मदद
MTNL और उसकी पैरेंट कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) को सरकार पहले भी कई राहत पैकेज दे चुकी है।
सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर को मजबूत करने और दोनों सरकारी कंपनियों को पुनर्जीवित करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है। इसमें कर्ज पुनर्गठन, संपत्ति बिक्री और नेटवर्क विस्तार जैसे कदम शामिल रहे हैं।
हालांकि, MTNL के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ता कर्ज और निजी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा है।
क्या MTNL फिर से खड़ी हो पाएगी?
MTNL की मौजूदा स्थिति कंपनी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करती है। भारी कर्ज, घटती बाजार हिस्सेदारी और लगातार डिफॉल्ट के बावजूद कंपनी के पास सरकारी समर्थन एक बड़ी ताकत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को लंबी अवधि में टिकाऊ बनाने के लिए खर्चों में कटौती, नेटवर्क आधुनिकीकरण और नई सेवाओं पर ध्यान देना होगा।
कभी देश के दो सबसे बड़े शहरों की टेलीकॉम लाइफलाइन रही MTNL अब अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है।


