ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart अपनी पोर्टफोलियो कंपनी Shadowfax Technologies में हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेचने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Flipkart जुलाई के अंत में Shadowfax Technologies में करीब ₹700-750 करोड़ की ब्लॉक डील कर सकती है।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब Shadowfax के शेयरधारकों के लिए 6 महीने का लॉक-इन पीरियड खत्म होने वाला है। कंपनी जनवरी 2026 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी और IPO के बाद अब शुरुआती निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी कम करने का मौका मिल रहा है।
Flipkart बेच सकती है Shadowfax के 3.37 करोड़ शेयर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Flipkart के पास Shadowfax Technologies के करीब 4.26 करोड़ शेयर हैं। कंपनी इनमें से लगभग 3.37 करोड़ शेयर ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है।
अगर यह सौदा पूरा होता है तो Flipkart की Shadowfax में हिस्सेदारी घटकर करीब 2 प्रतिशत रह जाएगी। हालांकि कंपनी अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच पाएगी क्योंकि उसके कुछ शेयर मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन (MPC) के तहत लॉक रहेंगे।
Shadowfax के शेयर फिलहाल करीब ₹230 के आसपास कारोबार कर रहे हैं। इस हिसाब से अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रस्तावित ब्लॉक डील का आकार ₹700 करोड़ से ज्यादा हो सकता है।
Shadowfax IPO के बाद Flipkart ने घटाई थी हिस्सेदारी
Shadowfax Technologies ने जनवरी 2026 में ₹1,907.27 करोड़ का IPO लॉन्च किया था। इस IPO में Flipkart ने ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए कुछ शेयर बेचे थे और कंपनी में अपनी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत तक कम कर ली थी।
Flipkart ने साल 2019 में पहली बार Shadowfax Technologies में निवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने कई फंडिंग राउंड में भी इस लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप को सपोर्ट किया।
Shadowfax आज Flipkart के प्रमुख लास्ट-माइल डिलीवरी पार्टनर्स में शामिल है और देशभर में ई-कॉमर्स शिपमेंट, हाइपरलोकल डिलीवरी और अन्य लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध कराती है।
Flipkart के लिए क्यों अहम है Shadowfax?
भारत में ई-कॉमर्स कारोबार तेजी से बढ़ने के साथ आखिरी छोर तक डिलीवरी यानी लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। Shadowfax इसी क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है।
कंपनी खासतौर पर उन समयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जब त्योहारी सीजन या बड़ी सेल के दौरान डिलीवरी का दबाव बढ़ जाता है। Flipkart अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए Shadowfax जैसी थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों का इस्तेमाल करती रही है।
इसके अलावा Shadowfax कई अन्य ई-कॉमर्स और डिजिटल कारोबारों को भी डिलीवरी सेवाएं देती है, जो अपने खुद के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर निर्भर नहीं हैं।
क्या Flipkart पूरी हिस्सेदारी बेच देगी?
सूत्रों के मुताबिक, Flipkart Shadowfax में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की योजना नहीं बना रही है। कंपनी के पास मौजूद करीब 89 लाख शेयर मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन के तहत रखने जरूरी हो सकते हैं।
SEBI के नियमों के अनुसार, IPO के बाद प्रमोटर्स को एक न्यूनतम हिस्सेदारी तय अवधि तक बनाए रखनी होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी के शुरुआती निवेशकों और प्रमोटर्स का कारोबार में लंबे समय तक भरोसा बना रहे।
MPC के तहत रखे गए शेयरों पर लॉक-इन अवधि लागू होती है और इन्हें तुरंत बेचा नहीं जा सकता।
निवेशकों की नजर अब Shadowfax शेयर पर
ब्लॉक डील की खबर के बाद Shadowfax Technologies के शेयरों में निवेशकों की नजर बनी हुई है। बड़ी हिस्सेदारी बिक्री आमतौर पर बाजार में सप्लाई बढ़ने का संकेत देती है, जिससे शॉर्ट टर्म में शेयर कीमत पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, दूसरी ओर Flipkart जैसी बड़ी कंपनी का निवेश कम करना कंपनी के लिए रणनीतिक कदम भी माना जा सकता है। IPO के बाद शुरुआती निवेशक अक्सर अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर निवेश वापस निकालते हैं।
Shadowfax के भविष्य का प्रदर्शन कंपनी की ग्रोथ, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार, मुनाफे और भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर की रफ्तार पर निर्भर करेगा।
Shadowfax Technologies का आगे का रास्ता
भारत में ऑनलाइन शॉपिंग, क्विक कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। Shadowfax इस बढ़ते बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
Flipkart की संभावित ब्लॉक डील से कंपनी में शेयरों की लिक्विडिटी बढ़ सकती है और नए संस्थागत निवेशकों की एंट्री का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार परिस्थितियों का मूल्यांकन करना जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


