Success Story: महाराष्ट्र की वंदिता पुरोहित ने बनाया अनोखा टाइम कैफे बिजनेस, जहां ग्राहक खाने के नहीं बल्कि बिताए गए समय के पैसे देते हैं
आज के दौर में जहां ज्यादातर कैफे अपना बिजनेस खाने-पीने की चीजों की बिक्री से चलाते हैं, वहीं महाराष्ट्र की रहने वाली वंदिता पुरोहित ने एक बिल्कुल अलग कॉन्सेप्ट के साथ अपना स्टार्टअप खड़ा कर दिया। उनका आइडिया इतना अनोखा था कि देखते ही देखते यह एक सफल बिजनेस मॉडल बन गया।
वंदिता पुरोहित ने साल 2020 में ‘मौजी’ (Mauji) नाम से एक ऐसा कैफे शुरू किया, जहां ग्राहक चाय-कॉफी या स्नैक्स के लिए नहीं बल्कि कैफे में बिताए गए समय के हिसाब से भुगतान करते हैं। आज यह टाइम कैफे पुणे और नागपुर में अपनी पहचान बना चुका है और सालाना करीब 2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट कर रहा है।
इंजीनियरिंग के बाद शुरू किया उद्यमिता का सफर

वंदिता पुरोहित ने नागपुर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह शुरुआत से ही नौकरी करने के बजाय नए आइडिया पर काम करने में विश्वास रखती थीं।
वह एक सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं। उन्होंने इससे पहले भी कई बिजनेस वेंचर शुरू किए। साल 2009 में उन्होंने आईटी कंसल्टिंग फर्म मिंट ट्री की शुरुआत की। इसके बाद साल 2015 में पुणे में ‘द दफ्तर’ नाम से को-वर्किंग स्पेस शुरू किया।
इसके अलावा उन्होंने ट्रैवल स्टार्टअप ट्रॉवर्क और टिकाऊ फर्नीचर डिजाइन स्टूडियो कलापेंट्री जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया।
हालांकि उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। बिजनेस में कई बार असफलता, आर्थिक नुकसान और पार्टनरशिप से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन इन्हीं अनुभवों ने उन्हें एक बेहतर उद्यमी बनने में मदद की।
कैफे में काम करने वालों की परेशानी से मिला बिजनेस आइडिया
वंदिता पुरोहित ने को-वर्किंग सेक्टर में काम करते हुए महसूस किया कि बहुत से लोग कैफे में सिर्फ बैठकर काम करने, पढ़ाई करने या मीटिंग करने आते हैं।
लेकिन सामान्य कैफे में उन्हें लंबे समय तक बैठने के लिए बार-बार कुछ न कुछ ऑर्डर करना पड़ता है। कई बार ग्राहक सिर्फ शांत माहौल, इंटरनेट और आरामदायक जगह चाहते हैं।
यही समस्या वंदिता के लिए एक नए बिजनेस आइडिया की वजह बनी।
उन्होंने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए साल 2020 में ‘मौजी टाइम कैफे’ की शुरुआत की। इसका मॉडल था Pay By The Hour यानी जितना समय बिताएं, उतना भुगतान करें।
210 रुपये प्रति घंटे से शुरू हुआ ‘मौजी’ का मॉडल

मौजी कैफे में ग्राहक करीब 210 रुपये प्रति घंटे की शुरुआती कीमत पर कई सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यहां ग्राहकों को मिलती हैं:
- हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा
- अनलिमिटेड कॉम्प्लीमेंट्री ड्रिंक्स
- DIY स्नैक बार
- आरामदायक वर्किंग स्पेस
- BYOF (Bring Your Own Food) की सुविधा
BYOF का मतलब है कि ग्राहक बाहर से अपना खाना भी मंगाकर खा सकते हैं। इस तरह कैफे का फोकस सिर्फ खाने की बिक्री नहीं बल्कि एक बेहतर अनुभव देने पर है।
कोरोना महामारी के बीच शुरू हुआ था संघर्ष

वंदिता के लिए मौजी की शुरुआत आसान नहीं थी। उन्होंने 14 मार्च 2020 को पुणे में करीब 6,000 वर्ग फीट के बंगले का पजेशन लिया था।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद देश में कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लागू हो गया। निर्माण कार्य पूरी तरह रुक गया और पूरा प्रोजेक्ट संकट में आ गया।
इस मुश्किल समय में निवेशकों और मकान मालिक के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे काम जारी रखा। उन्होंने खुद कैफे के इंटीरियर डिजाइन पर काम किया।
आखिरकार सितंबर 2020 में कैफे तैयार हुआ और दिसंबर 2020 में इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया।
शुरुआती दिनों में मौजी को सोशल मीडिया और लोगों की चर्चा यानी माउथ पब्लिसिटी से पहचान मिली।
असफलताओं से मिली सफलता की सीख
वंदिता पुरोहित का मानना है कि बिजनेस में असफलताएं भी सीखने का मौका देती हैं।
अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें बड़े नुकसान झेलने पड़े। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपना पुणे ऑफिस खाली करना पड़ा और कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ी।
लेकिन उन्होंने इन मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने हर असफलता से सीख ली और उसी अनुभव को मौजी को सफल बनाने में इस्तेमाल किया।
तीन सेंटर, 32 लोगों की टीम और करोड़ों का कारोबार

आज मौजी के पुणे और नागपुर में कुल तीन सेंटर हैं। यह सिर्फ कैफे नहीं बल्कि एक कम्युनिटी हब बन चुका है।
यहां फ्रीलांसर, स्टार्टअप फाउंडर, क्रिएटर और प्रोफेशनल्स काम करने आते हैं।
मौजी में अब कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं:
- को-वर्किंग स्पेस
- पॉडकास्ट स्टूडियो
- फोटोग्राफी स्टूडियो
- इवेंट स्पेस
- लाइब्रेरी
- मेकर स्पेस
- आर्ट स्टोर
आज यह स्टार्टअप करीब 32 लोगों की टीम के साथ काम कर रहा है और हर साल लगभग 400 से 500 इवेंट्स आयोजित करता है।
1000 करोड़ रुपये का बिजनेस बनाने का लक्ष्य
वंदिता पुरोहित अब मौजी को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि इस टाइम कैफे मॉडल को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में विस्तार दिया जाए।
वह इसे ‘थर्ड स्पेस हॉस्पिटैलिटी’ के रूप में विकसित करना चाहती हैं और भविष्य में इसे करीब 1000 करोड़ रुपये का वेंचर बनाने का सपना देख रही हैं।
वंदिता पुरोहित की कहानी से क्या सीख मिलती है?
वंदिता पुरोहित की सफलता यह साबित करती है कि बड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए हमेशा बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी आम समस्या को पहचानकर उसका बेहतर समाधान देना ही सबसे बड़ा अवसर बन जाता है।
210 रुपये प्रति घंटे के छोटे से आइडिया ने आज एक ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार कर दिया है, जो आने वाले समय में भारत के कैफे और को-वर्किंग कल्चर को नई दिशा दे सकता है।
सीख यही है कि सही सोच, लगातार मेहनत और असफलताओं से सीख लेने की क्षमता किसी भी छोटे आइडिया को बड़े कारोबार में बदल सकती है।


