E20 Petrol Controversy: पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर देशभर में बहस जारी है। कई वाहन मालिक माइलेज कम होने और इंजन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। हाल ही में बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप ने E20 पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए थे। अब चेन्नई के कारोबारी सचिन जॉर्ज ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए दावा किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी बाइक कई बार बीच रास्ते में बंद हो गई।
हालांकि, केंद्र सरकार लगातार कहती रही है कि E20 पेट्रोल वाहनों के लिए सुरक्षित है और इससे पर्यावरण को फायदा होगा। सरकार के मुताबिक, माइलेज में मामूली गिरावट संभव है, लेकिन इंजन को नुकसान पहुंचने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों बढ़ रहा विवाद?
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और प्रदूषण घटाना है। इसी योजना के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे बढ़ाया गया है।
E20 पेट्रोल में 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल होता है। सरकार का लक्ष्य देशभर में E20 ईंधन को बढ़ावा देना है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि पुराने वाहनों में इसके इस्तेमाल से माइलेज कम हो रहा है और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं।
चेन्नई कारोबारी सचिन जॉर्ज ने साझा किया अनुभव
चेन्नई के कारोबारी सचिन जॉर्ज पिछले कुछ महीनों से वाहन मालिकों और मैकेनिकों से संपर्क कर E20 पेट्रोल को लेकर शिकायतें जुटा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है।
साउथ फर्स्ट को दिए इंटरव्यू में सचिन जॉर्ज ने बताया कि उनके पास दो एक्टिवा स्कूटर, दो मोटरसाइकिल और एक मारुति सियाज कार है। ये सभी वाहन उन्होंने साल 2023 से पहले खरीदे थे।
उनका दावा है कि E20 पेट्रोल के अनिवार्य होने के बाद उनकी गाड़ियों के प्रदर्शन में बदलाव आया है।
माइलेज में भारी गिरावट का दावा
सचिन जॉर्ज के अनुसार, पहले उनकी एक्टिवा स्कूटर करीब 35 से 40 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 28 से 30 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है।
उन्होंने बताया कि मोटरसाइकिलों का माइलेज भी पहले करीब 35 किलोमीटर प्रति लीटर था, जो अब घटकर 20 से 23 किलोमीटर प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
सचिन का कहना है कि कुछ मौकों पर उनकी बाइक चलते-चलते बंद हो गई और उन्हें बीच रास्ते में परेशानी का सामना करना पड़ा।
कार्बोरेटर और फ्यूल सिस्टम खराब होने की शिकायतें
कुछ मैकेनिकों का कहना है कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल में नमी सोखने की क्षमता ज्यादा होती है। इसके कारण पुराने वाहनों के फ्यूल सिस्टम में जंग या गंदगी जमा होने की समस्या आ सकती है।
तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ मैकेनिकों के अनुसार, पुराने वाहनों में कार्बोरेटर, फ्यूल इंजेक्टर और फ्यूल पंप से जुड़ी शिकायतें देखने को मिल रही हैं।
कुछ वाहन मालिकों का दावा है कि खराबी आने पर मरम्मत का खर्च 8,000 से 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि E20 के लिए डिजाइन किए गए नए वाहन इस ईंधन के अनुकूल बनाए जा रहे हैं। पुराने वाहनों में समस्या की संभावना वाहन की तकनीक, रखरखाव और इस्तेमाल पर निर्भर कर सकती है।
सरकार की E20 नीति पर उठाए सवाल
सचिन जॉर्ज ने कहा कि वह इथेनॉल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे लागू करने के तरीके को लेकर सवाल हैं।
उन्होंने कहा कि अगर ग्राहकों को E0, E5 या E10 जैसे विकल्प मिलते तो वाहन मालिक अपनी जरूरत के हिसाब से ईंधन चुन सकते थे।
उनका तर्क है कि जब भारत कुछ देशों को बिना इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल निर्यात करता है, तो घरेलू ग्राहकों के लिए भी विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार, इससे पेट्रोलियम आयात बिल कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी कई बार कह चुके हैं कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान नहीं पहुंच रहा है। सरकार का कहना है कि आधुनिक वाहन E20 ईंधन के हिसाब से तैयार किए जा रहे हैं।
पुराने वाहनों के मालिकों के लिए क्या सावधानी जरूरी?
ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने वाहन मालिकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- वाहन की सर्विस समय पर कराएं।
- फ्यूल सिस्टम की जांच कराते रहें।
- खराब क्वालिटी वाले ईंधन से बचें।
- वाहन निर्माता की गाइडलाइन जरूर देखें।
- लंबे समय तक वाहन खड़ा रहने पर टैंक और फ्यूल सिस्टम का ध्यान रखें।
E20 पेट्रोल पर आगे क्या?
E20 पेट्रोल को लेकर अभी भी वाहन मालिकों, विशेषज्ञों और सरकार के बीच बहस जारी है। जहां सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं कुछ उपभोक्ता पुराने वाहनों में आने वाली समस्याओं को लेकर चिंता जता रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार वाहन मालिकों की शिकायतों को देखते हुए अतिरिक्त विकल्प या दिशा-निर्देश जारी करती है या नहीं।
डिस्क्लेमर: E20 पेट्रोल से वाहन खराब होने के दावे कुछ उपभोक्ताओं और मैकेनिकों के अनुभवों पर आधारित हैं। सरकार और ऑटो कंपनियां E20 को निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित बताती हैं। वाहन की समस्या कई अन्य कारणों से भी हो सकती है।


