नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) अब ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी मध्य प्रदेश के पूर्वी सोहागपुर (East Sohagpur) स्थित अपने कोल बेड मीथेन (CBM) ब्लॉक में प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए शुरुआती चरण में ₹300-400 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यदि परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में इस प्रोजेक्ट पर बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिल सकता है।
रिलायंस का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।
Highlights
- रिलायंस इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश के पूर्वी सोहागपुर ब्लॉक में CBM एक्सप्लोरेशन शुरू करेगी।
- शुरुआती टेस्ट फेज में ₹300-400 करोड़ निवेश की तैयारी।
- करीब 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है पूरा प्रोजेक्ट।
- पश्चिमी ब्लॉक में पहले से 320 से अधिक कुओं से गैस उत्पादन जारी।
- सफल परीक्षण के बाद बड़े स्तर पर फील्ड डेवलपमेंट प्लान लागू किया जा सकता है।
क्या होती है कोल बेड मीथेन (CBM)?
कोल बेड मीथेन (Coal Bed Methane) वह प्राकृतिक गैस होती है जो कोयले की परतों के भीतर लाखों वर्षों से फंसी रहती है। विशेष तकनीक से कुएं खोदकर इस गैस को निकाला जाता है।
इस गैस का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे—
- CNG उत्पादन
- घरेलू गैस आपूर्ति
- बिजली उत्पादन
- औद्योगिक ईंधन
- उर्वरक एवं केमिकल उद्योग
विशेषज्ञों के अनुसार CBM, पारंपरिक प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है।
1000 वर्ग किलोमीटर में फैला है सोहागपुर ब्लॉक
रिलायंस के पास मध्य प्रदेश के सोहागपुर क्षेत्र में लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर का CBM क्षेत्र है, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया है—
- सोहागपुर वेस्ट ब्लॉक (करीब 500 वर्ग किमी)
- सोहागपुर ईस्ट ब्लॉक (करीब 500 वर्ग किमी)
अब तक कंपनी का मुख्य फोकस पश्चिमी ब्लॉक पर रहा है क्योंकि वहां का भूगर्भीय ढांचा गैस उत्पादन के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है।
पश्चिमी ब्लॉक में पहले से जारी है गैस उत्पादन
रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के SP (West) ब्लॉक में फिलहाल 320 से अधिक कुओं से गैस उत्पादन हो रहा है।
मुख्य आंकड़े:
- औसत उत्पादन: 0.88 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD)
- पिछले वर्ष की तुलना में 9.8% की वृद्धि
- उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत में पहली बार मल्टीलेटरल हॉरिजॉन्टल वेल (MLW) तकनीक का सफल उपयोग
कंपनी का कहना है कि इस तकनीक से उत्पादन में आई गिरावट को रोकने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है।
अब पूर्वी ब्लॉक की ओर क्यों बढ़ रही है रिलायंस?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिमी ब्लॉक के कुछ हिस्से वन क्षेत्र से जुड़े नियमों और पर्यावरणीय प्रतिबंधों के कारण पूरी तरह विकसित नहीं किए जा सकते।
इसी वजह से कंपनी अब पूर्वी सोहागपुर ब्लॉक में संभावनाएं तलाशने की तैयारी कर रही है।
फिलहाल—
- प्रारंभिक सर्वे और योजना तैयार की जा रही है।
- जमीन पर बड़े स्तर का विकास कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।
- पहले परीक्षण के जरिए गैस भंडार और उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा।
₹300-400 करोड़ का होगा शुरुआती निवेश
रिलायंस इस परियोजना के पहले चरण में लगभग ₹300-400 करोड़ निवेश करेगी।
इस टेस्ट फेज का उद्देश्य होगा—
- गैस भंडार का आकलन करना।
- उत्पादन क्षमता की पुष्टि करना।
- बड़े निवेश से पहले परियोजना की व्यवहार्यता (Proof of Concept) साबित करना।
यदि शुरुआती परिणाम सकारात्मक रहते हैं तो कंपनी इसके बाद बड़े स्तर पर फील्ड डेवलपमेंट प्लान लागू कर सकती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर CBM उत्पादन बढ़ने से कई फायदे हो सकते हैं—
- गैस आयात पर निर्भरता कम होगी।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- CNG और औद्योगिक गैस की उपलब्धता बढ़ सकती है।
- स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
रिलायंस की आगे की रणनीति
कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकताएं होंगी—
- मौजूदा CBM उत्पादन को बनाए रखना।
- उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि करना।
- नए गैस संसाधनों की खोज।
- चरणबद्ध तरीके से पूर्वी सोहागपुर क्षेत्र का विकास करना।
- आधुनिक ड्रिलिंग तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन दक्षता बढ़ाना।
यदि पूर्वी ब्लॉक में परीक्षण सफल रहता है तो यह रिलायंस के प्राकृतिक गैस कारोबार के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।


