नई दिल्ली: सहारा समूह से जुड़े लंबे समय से चल रहे Sahara-SEBI विवाद में 13 जुलाई को एक अहम सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) द्वारा सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) के कुछ प्रबंधकों और कंपनी सचिव को दी गई राहत को चुनौती दी गई है। इस सुनवाई पर लाखों निवेशकों और बाजार की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे जुड़े मामलों में निवेशकों के ₹14,106 करोड़ की वापसी का मुद्दा भी शामिल है।
Highlights
- 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में Sahara-SEBI मामले की सुनवाई
- सेबी ने SAT द्वारा प्रबंधकों को दी गई राहत को चुनौती दी
- मामला 1998-2008 के बीच OFCD के कथित अवैध निर्गम से जुड़ा
- करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से ₹14,106 करोड़ जुटाने का आरोप
- निवेशकों के रिफंड से जुड़े लंबित मामलों पर भी होगी सुनवाई
क्या है 13 जुलाई की सुनवाई का महत्व?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई करेगी।
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि SAT द्वारा कंपनी के चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव को दी गई राहत को रद्द किया जाए। इसके साथ ही अदालत सहारा समूह से जुड़े अन्य लंबित मामलों, विशेषकर निवेशकों के धन की वापसी से जुड़े मामलों पर भी विचार करेगी।
यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे भविष्य में कंपनी के अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए सहारा समूह के चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को 13 जुलाई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
अब इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।
क्या है पूरा Sahara-SEBI मामला?
यह विवाद 1998 से 2008 के बीच सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी किए गए Optionally Fully Convertible Debentures (OFCDs) से जुड़ा है।
सेबी का आरोप है कि कंपनी ने इन डिबेंचरों के जरिए करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से लगभग ₹14,106 करोड़ जुटाए। नियामक का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाना निजी प्लेसमेंट नहीं बल्कि सार्वजनिक निर्गम (Public Issue) की श्रेणी में आता है, इसलिए यह सेबी के नियमों के अधीन था।
SAT ने अपने फैसले में क्या कहा?
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने मार्च में अपने फैसले में सेबी की नियामकीय कार्रवाई को सही ठहराया और कंपनी तथा उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी।
हालांकि, न्यायाधिकरण ने कंपनी के चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत देते हुए कहा कि वे केवल कर्मचारी थे और कंपनी के निर्णयों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते।
SAT ने यह भी माना कि कंपनी सचिव ने निदेशकों द्वारा दिए गए Power of Attorney के आधार पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, इसलिए अंतिम जिम्मेदारी निदेशकों की बनती है।
सेबी ने किस बात को चुनौती दी है?
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में केवल SAT के उसी हिस्से को चुनौती दी है, जिसमें प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत दी गई थी।
नियामक का तर्क है कि यदि इन अधिकारियों की भूमिका धन जुटाने और दस्तावेजी प्रक्रिया में रही है, तो उनकी जिम्मेदारी की भी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा।
2018 के सेबी आदेश से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद सेबी के अक्टूबर 2018 के आदेश से जुड़ा है। उस आदेश में नियामक ने SICCL को निर्देश दिया था कि:
- OFCD के जरिए जुटाई गई राशि निवेशकों को लौटाई जाए।
- कंपनी अपनी परिसंपत्तियों का पूरा विवरण उपलब्ध कराए।
- संबंधित अधिकारियों पर प्रतिभूति बाजार में प्रतिबंध लगाया जाए।
इसी आदेश को लेकर आगे SAT और अब सुप्रीम कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
निवेशकों के रिफंड पर क्या है अपडेट?
13 जुलाई की सुनवाई में निवेशकों के धन की वापसी से जुड़े लंबित मामलों को भी सूचीबद्ध किया गया है। हालांकि, इस सुनवाई में सीधे तौर पर रिफंड वितरण पर अंतिम फैसला होने की संभावना नहीं है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से सेबी की उस चुनौती पर विचार करेगा, जिसमें SAT द्वारा अधिकारियों को दी गई राहत पर सवाल उठाया गया है। यदि अदालत इस मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्देश देती है, तो उसका असर निवेशकों के रिफंड से जुड़े मामलों की आगे की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि:
- क्या SAT द्वारा अधिकारियों को दी गई राहत बरकरार रहेगी।
- क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए मामला आगे बढ़ेगा।
- निवेशकों के धन वापसी से जुड़े मामलों में अदालत कोई नई दिशा-निर्देश जारी करती है या नहीं।
लाखों निवेशकों के लिए 13 जुलाई की यह सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे सहारा-सेबी विवाद के अगले कानूनी चरण की दिशा तय हो सकती है।


