Highlights
- 1940 में हुई थी हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड की स्थापना
- सेठ वालचंद हीराचंद, महाराजा जयाचामाराजेंद्र वाडियार और दीवान मिर्जा इस्माइल की रही अहम भूमिका
- आज हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत की सबसे बड़ी रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनियों में शामिल
- लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर से लेकर ISRO के स्पेस मिशनों तक में निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका
नई दिल्ली: आज भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा उत्पादन देशों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। देश में 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (DPSUs), सैकड़ों निजी कंपनियां, हजारों MSME और स्टार्टअप सेना के लिए अत्याधुनिक उपकरण तैयार कर रहे हैं। लेकिन इस मजबूत रक्षा उद्योग की शुरुआत जिस कंपनी से हुई, वह है हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)। करीब 85 साल पुराने इतिहास वाली यह कंपनी आज लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, इंजन, ड्रोन और अंतरिक्ष कार्यक्रमों तक में अहम भूमिका निभा रही है।
भारत की पहली रक्षा कंपनी कैसे बनी HAL?
HAL की शुरुआत 23 दिसंबर 1940 को ‘हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड’ के रूप में हुई थी। इसकी नींव एक संयोग से हुई मुलाकात के बाद पड़ी। मशहूर उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद की विमान यात्रा के दौरान हार्लो एयरक्राफ्ट कंपनी के निदेशक विलियम डगलस पॉली से मुलाकात हुई। इसी चर्चा ने भारत में विमान निर्माण कंपनी स्थापित करने का विचार जन्म दिया।
उस दौर में जब भारत अभी स्वतंत्र भी नहीं हुआ था, तब देश में विमान निर्माण उद्योग शुरू करना बेहद साहसिक कदम माना जाता था।
महाराजा ने दान में दी 700 एकड़ जमीन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आकार देने में मैसूर के महाराजा जयाचामाराजेंद्र वाडियार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने न केवल कंपनी की स्थापना के लिए 700 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई, बल्कि उस समय 25 लाख रुपये का निवेश भी किया। जबकि कई अन्य रियासतों ने इस योजना में रुचि नहीं दिखाई, मैसूर राजघराने ने इसे भारत के भविष्य के लिए जरूरी माना।
दीवान मिर्जा इस्माइल ने भी निभाई बड़ी भूमिका
मैसूर रियासत के तत्कालीन दीवान सर मिर्जा इस्माइल ने भी इस परियोजना को पूरा समर्थन दिया। प्रशासनिक स्तर पर उनकी मदद से कंपनी की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी। इस तरह एक उद्योगपति, एक महाराजा और एक दूरदर्शी प्रशासक की साझी सोच ने भारत की पहली रक्षा कंपनी को जन्म दिया।
शुरुआती दिनों में कौन-से विमान बनाए गए?
मार्च 1941 में भारत सरकार इस कंपनी की हिस्सेदार बनी और 1942 में इसका प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। शुरुआती वर्षों में अमेरिकी कंपनी Intercontinental Aircraft Company के सहयोग से HAL ने Harlow Trainer, Curtiss Hawk Fighter और Vultee Bomber जैसे विमानों का निर्माण शुरू किया।
बाद में जनवरी 1951 में कंपनी को औपचारिक रूप से रक्षा मंत्रालय के अधीन लाया गया।
आज जमीन से अंतरिक्ष तक है HAL का योगदान
आज HAL भारत की सबसे महत्वपूर्ण एयरोस्पेस एवं रक्षा कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, जेट इंजन, एवियोनिक्स सिस्टम, UAV (ड्रोन), नागरिक उड्डयन से जुड़े उत्पाद और रक्षा उपकरण तैयार करती है।
HAL भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के कई बड़े मिशनों की भी अहम साझेदार है। कंपनी लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट के लिए आवश्यक संरचनाएं तैयार करती है तथा स्पेस लॉन्च सिस्टम के विभिन्न हिस्सों के निर्माण में योगदान देती है। इसके लिए 1988 में एक समर्पित एयरोस्पेस डिवीजन भी स्थापित किया गया था।
आज कितनी बड़ी कंपनी बन चुकी है HAL?
बेंगलुरु मुख्यालय वाली HAL आज भारत सरकार के स्वामित्व वाली महारत्न सार्वजनिक उपक्रम है। कंपनी की बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) करीब 3.01 लाख करोड़ रुपये है। इसके शेयर मार्च 2018 से बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हैं।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ HAL आज भारतीय वायुसेना, नौसेना, थलसेना और ISRO जैसी संस्थाओं की प्रमुख तकनीकी साझेदार बन चुकी है। जिस कंपनी की शुरुआत तीन दूरदर्शी लोगों की पहल से हुई थी, वह आज भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और एयरोस्पेस क्षमता का मजबूत प्रतीक बन चुकी है।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)


