Highlights
- पिछले 6 महीनों में करीब 10% फिसला कोचिन शिपयार्ड का शेयर
- OFS के बाद शेयर में आई गिरावट से वैल्यूएशन हुआ आकर्षक
- कंपनी के पास करीब ₹26,000 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक
- शिप रिपेयरिंग बिजनेस में 45% मार्केट शेयर के साथ अग्रणी कंपनी
- अगले तीन वर्षों में ₹2,500 करोड़ कैपेक्स और 15% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य
Cochin Shipyard Share Price: सरकारी कंपनियों के शेयरों में अक्सर ऑफर फॉर सेल (OFS) के ऐलान के बाद दबाव देखने को मिलता है। निवेशकों को आशंका रहती है कि सरकार डिस्काउंट पर हिस्सेदारी बेचेगी, जिससे शेयर की कीमतें नीचे आ सकती हैं। ऐसा ही कुछ कोचिन शिपयार्ड के साथ भी हुआ। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर बन सकती है।
OFS के बाद शेयरों में आई गिरावट
सरकार ने हाल ही में कोचिन शिपयार्ड में अपनी 5.04% हिस्सेदारी OFS के जरिए बेची। इसके लिए ₹1,400 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया था। OFS की घोषणा के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा और मई 2026 के मध्य में लगभग ₹1,800 के स्तर से करीब 7% तक गिरावट दर्ज की गई।
अगर पिछले छह महीनों का प्रदर्शन देखें तो शेयर करीब 10% कमजोर हुआ है। हालांकि, इस गिरावट के बाद कंपनी की वैल्यूएशन पहले की तुलना में काफी आकर्षक नजर आने लगी है।
₹26,000 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक
कोचिन शिपयार्ड की सबसे बड़ी ताकत इसकी मजबूत ऑर्डर बुक है। कंपनी के पास फिलहाल करीब ₹26,000 करोड़ के ऑर्डर हैं, जो FY26 के अनुमानित रेवेन्यू का लगभग छह गुना है।
इसके अलावा कंपनी डिफेंस, कमर्शियल शिपबिल्डिंग और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े करीब ₹10,000 करोड़ के संभावित प्रोजेक्ट्स के लिए भी बोली लगाने की तैयारी कर रही है।
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि मध्यम अवधि में ऑर्डर बुक में 12-15% की वार्षिक वृद्धि देखने को मिलेगी।
शिप रिपेयरिंग बिजनेस में 45% मार्केट शेयर
भारत के शिप रिपेयरिंग सेक्टर में कोचिन शिपयार्ड की मजबूत पकड़ है। कंपनी का इस क्षेत्र में लगभग 45% मार्केट शेयर है। खास बात यह है कि यह देश की एकमात्र शिपयार्ड कंपनी है जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर की मरम्मत करने की क्षमता मौजूद है।
हालांकि, पिछले कुछ तिमाहियों में इस सेगमेंट का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा, लेकिन मैनेजमेंट को आने वाले समय में इसमें तेजी की उम्मीद है।
कंपनी ने अगले तीन वर्षों में शिप रिपेयरिंग बिजनेस से ₹2,500 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। वहीं, वाडिनार शिप रिपेयर फैसिलिटी शुरू होने के बाद इसकी रिपेयरिंग क्षमता में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
15% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य
मैनेजमेंट ने चालू वित्त वर्ष के लिए लगभग 15% रेवेन्यू ग्रोथ का गाइडेंस दिया है। कंपनी के अनुसार FY27 की पहली तिमाही से प्रोजेक्ट एग्जिक्यूशन में सुधार दिखाई देने लगा है।
विकास योजनाओं को गति देने के लिए कंपनी अगले तीन वर्षों में ₹2,500 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करेगी। यह उसके ₹6,500 करोड़ के कुल निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। साथ ही कंपनी डिफेंस कारोबार के अलावा नॉन-डिफेंस सेगमेंट में भी नए अवसर तलाश रही है।
वैल्यूएशन अब पहले से ज्यादा आकर्षक
शेयर फिलहाल FY28 की अनुमानित कमाई के लगभग 32 गुना फॉरवर्ड P/E पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका एक वर्ष का औसत फॉरवर्ड P/E करीब 65 गुना रहा है।
यानी वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आई है, जबकि कंपनी के कारोबार और भविष्य की संभावनाएं पहले से मजबूत हुई हैं। मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता शिप रिपेयरिंग कारोबार और बेहतर आय की उम्मीद को देखते हुए कई विश्लेषक इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर मान रहे हैं।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का मूल्यांकन करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।


