भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और अब इसकी सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी बनती जा रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले ग्राहकों में 30 साल या उससे कम उम्र के युवाओं यानी Gen Z की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक हो गई है। खास बात यह है कि अब क्रेडिट कार्ड का विस्तार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
Highlights
- पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में 50% से ज्यादा Gen Z (30 वर्ष या कम उम्र) के युवा
- छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले नए कार्डधारकों की हिस्सेदारी 46% पहुंची
- 10 वर्षों में क्रेडिट कार्डधारकों की संख्या बढ़कर 5.2 करोड़ से अधिक हुई
- कुल क्रेडिट कार्ड बकाया राशि 8.3 गुना बढ़कर ₹3.1 लाख करोड़ पहुंची
- तीन या उससे अधिक क्रेडिट कार्ड रखने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है क्रेडिट कार्ड का चलन
नई दिल्ली: भारत में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले ग्राहकों की प्रोफाइल तेजी से बदल रही है। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट ‘Beyond the Swipe 2026’ के अनुसार मार्च 2026 तक पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में 30 साल या उससे कम उम्र के युवाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 50% हो गई, जबकि मार्च 2022 में यह आंकड़ा 43% था।
रिपोर्ट बताती है कि युवा अब केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत करने और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भी क्रेडिट कार्ड अपना रहे हैं।
छोटे शहरों और गांवों से बढ़ रही मांग
क्रेडिट कार्ड का विस्तार अब मेट्रो शहरों से निकलकर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। मार्च 2022 में जहां छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से आने वाले नए कार्डधारकों की हिस्सेदारी 42% थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 46% हो गई।
यह बदलाव डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और वित्तीय सेवाओं की बेहतर पहुंच का संकेत माना जा रहा है।
पहले से लोन लेने वाले भी बना रहे हैं नया कार्ड
रिपोर्ट के अनुसार पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले कई ग्राहक पहले से ही बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा हैं। करीब 25% नए कार्डधारकों के पास पहले से तीन या उससे अधिक सक्रिय लोन हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि अब क्रेडिट कार्ड लोगों के लिए बैंकिंग की पहली सीढ़ी नहीं, बल्कि उनके मौजूदा वित्तीय पोर्टफोलियो का हिस्सा बनता जा रहा है।
भारत में अभी भी काफी संभावनाएं
दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में अभी भी क्रेडिट कार्ड की पहुंच काफी कम है।
- ब्रिटेन में लगभग 70% लोगों के पास क्रेडिट कार्ड है।
- कोलंबिया में यह आंकड़ा 62% है।
- हांगकांग में लगभग 98% लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं।
इसके मुकाबले मार्च 2026 तक भारत में सक्रिय क्रेडिट ग्राहकों में केवल 25% लोगों के पास ही क्रेडिट कार्ड है। इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में इस बाजार में बड़ी वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
10 वर्षों में कई गुना बढ़ा बाजार
मार्च 2016 से मार्च 2026 के बीच भारत का क्रेडिट कार्ड बाजार तेजी से विस्तारित हुआ है।
- क्रेडिट कार्डधारकों की संख्या 1.4 करोड़ से बढ़कर 5.2 करोड़ से अधिक हो गई।
- कुल बकाया राशि ₹0.4 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.1 लाख करोड़ पहुंच गई।
- सक्रिय क्रेडिट कार्डों की संख्या 2.1 करोड़ से बढ़कर 10.7 करोड़ हो गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में डिजिटल क्रेडिट की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
प्रति ग्राहक बढ़ा कार्ड बैलेंस
क्रेडिट कार्ड का उपयोग बढ़ने के साथ ग्राहकों का औसत बकाया भी बढ़ा है। पिछले 10 वर्षों में प्रति ग्राहक औसत कार्ड बैलेंस 31,000 रुपये से बढ़कर लगभग 65,000 रुपये हो गया है।
हालांकि, कुल लोन पोर्टफोलियो में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम हुई है, क्योंकि अब ग्राहकों के पास पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन और अन्य क्रेडिट विकल्प भी उपलब्ध हैं।
अब लोग रख रहे हैं एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ग्राहक अब एक से अधिक क्रेडिट कार्ड रखना पसंद कर रहे हैं।
- केवल एक क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 50% से घटकर 33% रह गई।
- क्रेडिट कार्ड के साथ अन्य लोन लेने वालों की हिस्सेदारी 16% से बढ़कर 32% हो गई।
- तीन या उससे अधिक क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहकों का प्रतिशत 12% से बढ़कर 22% पहुंच गया।
यह संकेत देता है कि ग्राहक अलग-अलग जरूरतों और ऑफर्स का फायदा उठाने के लिए मल्टी-कार्ड रणनीति अपना रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत में क्रेडिट कार्ड बाजार तेजी से परिपक्व हो रहा है। Gen Z की बढ़ती भागीदारी, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से बढ़ती मांग तथा डिजिटल बैंकिंग के विस्तार ने इस क्षेत्र को नई रफ्तार दी है। हालांकि विकसित देशों की तुलना में भारत में अभी भी क्रेडिट कार्ड की पहुंच सीमित है, लेकिन यही स्थिति आने वाले वर्षों में इस उद्योग के लिए बड़े विकास के अवसर भी पैदा करती है।


