भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने एक बेहद सकारात्मक अनुमान पेश किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि अगर देश की आर्थिक वृद्धि उम्मीद के मुताबिक तेज होती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो जून 2027 तक BSE Sensex 1,00,000 अंक के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है। हालांकि, इस बुलिश परिदृश्य (Bull Case) की संभावना फिलहाल 25% बताई गई है।
ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले दो वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट आय और निवेश माहौल में सुधार देखने को मिल सकता है। खास बात यह है कि Morgan Stanley ने आईटी सर्विसेज सेक्टर को भविष्य का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज बताया है।
जून 2027 तक Sensex के लिए क्या है Morgan Stanley का अनुमान?
Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में तीन संभावित परिदृश्य पेश किए हैं। इनमें सबसे आशावादी स्थिति में Sensex 1 लाख अंक तक पहुंच सकता है।
इसके लिए कुछ अहम शर्तें पूरी होना जरूरी होंगी—
- कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहे।
- सरकार की ग्रोथ बढ़ाने वाली नीतियों का असर दिखे।
- वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनियों की आय (Earnings) में औसतन 19% सालाना वृद्धि हो।
- घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहे।
ब्रोकरेज का मानना है कि फिलहाल भारतीय बाजार की वैल्यूएशन में जो कमजोरी दिख रही है, वह स्थायी नहीं बल्कि एक चक्रीय (Cyclical) गिरावट है। जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, बाजार की वैल्यूएशन भी बेहतर हो सकती है।
89,000 अंक को माना गया बेस केस
Morgan Stanley ने सबसे अधिक संभावना 50% की 89,000 अंक वाले लक्ष्य को दी है। इसे उसने अपना Base Case बताया है।
ब्रोकरेज के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिद्धम देसाई और नयंत पारेख के मुताबिक, पिछले कुछ समय में भारतीय बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी भी घटी है। यदि आर्थिक हालात सुधरते हैं और विदेशी निवेश दोबारा बढ़ता है, तो बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है।
बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर क्या होगा?
Morgan Stanley का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ अब निचले स्तर से उबरती हुई दिखाई दे रही है। आने वाले समय में यही सुधार शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट बन सकता है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश हो रहा है। यदि दुनिया में AI निवेश को लेकर उत्साह कुछ कम होता है और दूसरी ओर भारत की आर्थिक वृद्धि तेज होती है, तो निवेशकों का फोकस भारतीय बाजार की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
यही बदलाव भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा सकारात्मक ट्रिगर साबित हो सकता है।
जून तिमाही के नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
Morgan Stanley को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जून तिमाही) के कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत आर्थिक संकेतकों के कारण कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रह सकते हैं। इसके अलावा निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति पर भी रहेगी, हालांकि Morgan Stanley को मानसून से जुड़े बड़े जोखिम की आशंका फिलहाल नहीं दिख रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में चल रहे कई आर्थिक और नियामकीय सुधार विदेशी निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं। वहीं IPO बाजार की सक्रियता भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है। हालांकि जरूरत से ज्यादा IPO आने की स्थिति में बाजार पर दबाव भी बन सकता है।
किन सेक्टरों पर Morgan Stanley सबसे ज्यादा बुलिश?
ब्रोकरेज ने घरेलू मांग (Domestic Consumption) से जुड़े सेक्टरों को सबसे मजबूत बताया है।
Overweight रेटिंग वाले सेक्टर
- फाइनेंशियल
- कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी
- इंडस्ट्रियल
इन सेक्टरों में आने वाले वर्षों में बेहतर ग्रोथ और मजबूत आय की संभावना जताई गई है।
वहीं कुछ सेक्टरों को लेकर Morgan Stanley अपेक्षाकृत सतर्क है।
Underweight रेटिंग वाले सेक्टर
- एनर्जी
- मटेरियल्स
- यूटिलिटीज
- हेल्थकेयर
IT सेक्टर बन सकता है सबसे बड़ा सरप्राइज
Morgan Stanley के अनुसार आने वाले वर्षों में भारतीय IT सर्विसेज कंपनियां निवेशकों को सबसे बड़ा सकारात्मक सरप्राइज दे सकती हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि दुनियाभर की कंपनियां AI आधारित एप्लिकेशन, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स के लिए भारतीय आईटी कंपनियों की सेवाओं का पहले से अधिक उपयोग कर सकती हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की आय और मुनाफे में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
यदि AI आधारित प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ती है तो आईटी सेक्टर भारतीय शेयर बाजार की अगली बड़ी रैली का नेतृत्व कर सकता है।
कौन-कौन से जोखिम बने हुए हैं?
हालांकि Morgan Stanley ने बाजार को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है, लेकिन उसने कुछ प्रमुख जोखिमों की भी पहचान की है।
इनमें शामिल हैं—
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
- विश्व अर्थव्यवस्था में संभावित मंदी
- कृषि उत्पादन में कमजोरी
- न्यायिक प्रणाली की क्षमता संबंधी चुनौतियां
- AI के कारण रोजगार बाजार पर पड़ने वाला असर
यदि इनमें से कोई जोखिम गंभीर रूप लेता है तो बाजार की तेजी प्रभावित हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
Morgan Stanley की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। यदि कॉरपोरेट आय, आर्थिक सुधार और विदेशी निवेश उम्मीद के अनुरूप बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। हालांकि निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव और वैश्विक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए ही निवेश संबंधी फैसले लेने चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दिए गए विचार और अनुमान संबंधित ब्रोकरेज फर्म के हैं। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


