Onion Procurement: केंद्र सरकार ने पिछले दो महीनों में प्याज की सरकारी खरीद कीमत में पांच बार बढ़ोतरी की है, लेकिन इसके बावजूद खरीद की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। किसानों को मंडियों में सरकारी दर से अधिक कीमत मिलने के कारण वे सरकार को प्याज बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे सरकार का बफर स्टॉक लक्ष्य प्रभावित हो रहा है और उपभोक्ता मंत्रालय की चिंता बढ़ गई है।
सरकार की कोशिशों के बावजूद नहीं बढ़ रही प्याज खरीद
देश में प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित रखने और भविष्य में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार सरकारी खरीद (Procurement) पर जोर दे रही है। किसानों को बेहतर मूल्य देने के उद्देश्य से बीते दो महीनों में सरकार ने पांच बार खरीद कीमत में वृद्धि की है। इसके बावजूद सरकारी एजेंसियों द्वारा प्याज की खरीद उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही है।
सरकार ने इस सीजन में 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक इस लक्ष्य का केवल करीब 5 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इतनी धीमी खरीद ने उपभोक्ता मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ी उपभोक्ता मंत्रालय की चिंता?
सरकार हर साल बफर स्टॉक तैयार करती है ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन इस बार खरीद धीमी रहने से पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि आने वाले खरीफ सीजन में मौसम की वजह से फसल प्रभावित होती है और उत्पादन घटता है, तो बाजार में प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में यदि सरकारी भंडार कम रहा तो जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं को महंगे प्याज खरीदने पड़ सकते हैं।
सरकार ने बढ़ाई खरीद कीमत और समय सीमा
किसानों को सरकारी खरीद के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकार ने हाल ही में प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर ₹21.25 प्रति किलोग्राम कर दी है। इसके अलावा पहले खरीद की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान सरकारी खरीद योजना का लाभ उठा सकें।
हालांकि इन फैसलों का भी अभी तक अपेक्षित असर देखने को नहीं मिला है।
किसान सरकार को प्याज बेचने में क्यों नहीं दिखा रहे रुचि?
महाराष्ट्र सहित कई प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में इस समय किसानों को स्थानीय मंडियों में सरकारी खरीद मूल्य से बेहतर दाम मिल रहे हैं। ऐसे में किसान अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने के बजाय खुले बाजार में बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ रहे हैं।
महाराष्ट्र प्याज किसान संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले के अनुसार, जब छोटे किसानों के पास प्याज को सुरक्षित रखने की सुविधा नहीं थी और वे कम कीमत पर बेचने को मजबूर थे, तब सरकार ने समय पर खरीद शुरू नहीं की। अब जब बाजार में कीमतें सुधर चुकी हैं, तो किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर जाने के बजाय मंडियों में अधिक कीमत प्राप्त कर रहे हैं।
पहले कम दाम से परेशान थे किसान
कुछ महीने पहले प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई थी, जिससे किसानों को उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा था। उस समय किसान लंबे समय से सरकारी हस्तक्षेप और खरीद शुरू करने की मांग कर रहे थे। अब बाजार में कीमतें सुधरने के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं और किसान सरकारी खरीद से दूरी बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि उपज की सरकारी खरीद समय पर शुरू होना बेहद जरूरी है। यदि खरीद प्रक्रिया में देरी होती है तो सरकार और किसानों, दोनों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
सूत्रों के अनुसार उपभोक्ता मंत्रालय और संबंधित विभाग जल्द ही प्याज खरीद में तेजी लाने के लिए नई रणनीति पर विचार कर सकते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो खरीद मूल्य में और संशोधन, खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने या किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार करना है ताकि भविष्य में प्याज की कीमतों में अचानक आने वाली तेजी को नियंत्रित किया जा सके और उपभोक्ताओं को राहत मिलती रहे।
निष्कर्ष
सरकार ने किसानों को आकर्षित करने के लिए प्याज की खरीद कीमत में पांच बार बढ़ोतरी की और खरीद की समय सीमा भी बढ़ा दी, लेकिन मंडियों में बेहतर भाव मिलने के कारण किसान सरकारी खरीद में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका सीधा असर सरकार के बफर स्टॉक लक्ष्य पर पड़ रहा है। यदि आने वाले महीनों में मौसम या उत्पादन से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो कम सरकारी भंडार के कारण बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ने और जमाखोरी जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए खरीद प्रक्रिया को तेज करना बड़ी प्राथमिकता बन गई है।


