भारत के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। पहली बार जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिलों से प्रीमियम अरेको चेरी (Areko Cherry) और सेंट्रोज बेर (Scentrose Plum) की खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी गई है। इस निर्यात को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने सहयोग प्रदान किया। इस पहल से किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में कहीं बेहतर कीमत मिली है, जिससे उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है।
1 मीट्रिक टन फलों की पहली खेप UAE रवाना
जम्मू-कश्मीर के बागों से वैश्विक बाजारों तक नई उड़ान!
शोपियां और पुलवामा की प्रीमियम Areko Cherries और Scentrose Plums की पहली निर्यात खेप अबू धाबी और दुबई के लिए रवाना हुई। यह उपलब्धि भारतीय फलों की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने के साथ जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए नए… pic.twitter.com/kms0y6ARmM
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 4, 2026 वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, 1 मीट्रिक टन प्रीमियम फलों की पहली खेप अबू धाबी और दुबई के बाजारों के लिए भेजी गई। इस खेप में शामिल चेरी और सेंट्रोज बेर को जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिले के बागवानों से खरीदा गया था।
यह पहली बार है जब इन विशेष किस्मों के फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात किया गया है। इससे जम्मू-कश्मीर के बागवानी उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किसानों को मिला घरेलू बाजार से कहीं बेहतर दाम
इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिला है। जानकारी के अनुसार,
- अरेको चेरी पर किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में लगभग 60% अधिक कीमत मिली।
- सेंट्रोज बेर पर करीब 120% अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।
बेहतर कीमत मिलने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भविष्य में अधिक किसान निर्यात-योग्य गुणवत्ता वाले फलों की खेती के लिए प्रेरित होंगे।
APEDA ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस निर्यात अभियान को सफल बनाने में APEDA की अहम भूमिका रही। संस्था ने किसानों, निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच समन्वय स्थापित किया तथा गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।
APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस उपलब्धि पर किसानों और निर्यातकों को बधाई देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर उत्कृष्ट बागवानी उत्पादों का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने, गुणवत्ता सुधारने और नए खरीदारों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के फलों की बढ़ेगी वैश्विक पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफल निर्यात केवल एक खेप तक सीमित नहीं रहेगा। यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ती है तो जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स के लिए नए अवसर खुलेंगे। इससे स्थानीय बागवानों को स्थायी रूप से बेहतर आय मिलने की संभावना है।
उच्च गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन के कारण भारतीय फलों की मांग लगातार बढ़ रही है। UAE जैसे बाजारों में सफल प्रवेश भविष्य में अन्य देशों के लिए भी रास्ता खोल सकता है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दी बधाई
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि शोपियां और पुलवामा की प्रीमियम Areko Cherries और Scentrose Plums की पहली निर्यात खेप अबू धाबी और दुबई के लिए रवाना हो चुकी है। उन्होंने इसे भारतीय फलों की वैश्विक पहचान मजबूत करने और जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए नए अवसरों का संकेत बताया।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत में लंबे समय से कई किसान केवल घरेलू मंडियों पर निर्भर रहते हैं, जहां कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में निर्यात के नए अवसर मिलने से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ मिल सकता है।
इस पहल के प्रमुख फायदे हैं:
- किसानों को बेहतर और स्थिर कीमत मिलने की संभावना।
- जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फलों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग।
- निर्यात बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती।
- बागवानी क्षेत्र में निवेश और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा।
- अन्य राज्यों के फल उत्पादकों के लिए भी नए निर्यात अवसर।
आगे क्या?
यदि आने वाले वर्षों में इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो भारत के प्रीमियम फल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। APEDA की मदद से अधिक किसान वैश्विक बाजारों तक पहुंच बना सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और भारत विश्व फल निर्यात बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।


