Gold Loan: देश में सोने की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों का असर अब सीधे गोल्ड लोन बाजार पर दिखाई दे रहा है। पहले जो सोना केवल निवेश या पारिवारिक संपत्ति माना जाता था, वही अब जरूरत के समय सबसे भरोसेमंद वित्तीय सहारा बन गया है। पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन के आकार में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है और बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) द्वारा दिए जाने वाले गोल्ड लोन में करीब 200% तक की वृद्धि देखने को मिली है। बढ़ती कीमतों की वजह से अब लोग उसी सोने पर पहले से कहीं अधिक रकम का कर्ज प्राप्त कर पा रहे हैं।
Highlights
- सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी से गोल्ड लोन में करीब 200% तक उछाल।
- प्रति व्यक्ति औसत गोल्ड लोन बढ़कर 1.96 लाख रुपये पहुंचा।
- देश का गोल्ड लोन बाजार 19.4 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर।
- गोल्ड लोन की हिस्सेदारी कुल रिटेल लोन बाजार में 41% तक पहुंची।
- डिफॉल्ट दर घटकर केवल 0.2% रह गई।
महंगे सोने ने बढ़ाई गोल्ड लोन की ताकत
देशभर में सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिला है जिनके पास वर्षों से रखा हुआ सोना है। अब वही आभूषण या गोल्ड ज्वेलरी जरूरत पड़ने पर आसानी से बड़ी रकम जुटाने का माध्यम बन रहे हैं।
बैंक और एनबीएफसी सोने की मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर लोन देते हैं। जब सोने का मूल्य बढ़ता है तो उसी वजन के सोने पर मिलने वाली लोन राशि भी स्वतः बढ़ जाती है। यही वजह है कि हाल के वर्षों में गोल्ड लोन की मांग में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
दो साल में 144% बढ़ी सोने की कीमत
एक्सपेरियन इंडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों में लगभग 144% की वृद्धि दर्ज की गई। इस तेजी का सीधा लाभ ग्राहकों को मिला क्योंकि अब वे पहले की तुलना में कहीं अधिक राशि का गोल्ड लोन प्राप्त कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2022-23 में जहां प्रति व्यक्ति औसत गोल्ड लोन करीब 98,000 रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 1.96 लाख रुपये पहुंच गया। यानी औसत लोन राशि में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
19.4 लाख करोड़ रुपये पहुंचा गोल्ड लोन बाजार
भारत का गोल्ड लोन बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। मार्च 2023 में इसका आकार करीब 6.3 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 19.4 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यानी केवल तीन वर्षों में यह बाजार लगभग तीन गुना हो गया।
इतना ही नहीं, कुल रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है। जहां पहले यह लगभग 20% थी, वहीं अब बढ़कर 41% तक पहुंच चुकी है। इससे साफ है कि लोग व्यक्तिगत ऋण, अनसिक्योर्ड लोन या अन्य विकल्पों की बजाय गोल्ड लोन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं।
कर्ज चुकाने में भी आगे हैं भारतीय
गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के बीच राहत की बात यह है कि ग्राहक समय पर लोन चुकाने में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में करीब 75% ग्राहक ऐसे रहे जिन्होंने अपना पुराना गोल्ड लोन चुकाने के बाद दोबारा नया लोन लिया। वहीं 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट वाले मामलों की संख्या मार्च 2023 के 0.4% से घटकर मार्च 2026 में केवल 0.2% रह गई।
इससे संकेत मिलता है कि गोल्ड लोन अपेक्षाकृत सुरक्षित लोन श्रेणी बनी हुई है, जहां बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जोखिम भी कम रहता है।
क्यों बढ़ रही है गोल्ड लोन की लोकप्रियता?
गोल्ड लोन की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कई अहम कारण हैं—
- कम दस्तावेजों के साथ जल्दी लोन मिलना।
- पर्सनल लोन की तुलना में अपेक्षाकृत कम ब्याज दर।
- क्रेडिट स्कोर का सीमित प्रभाव।
- छोटे और मध्यम अवधि की वित्तीय जरूरतों के लिए आसान विकल्प।
- व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा और आपातकालीन खर्चों में तत्काल नकदी की सुविधा।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है क्योंकि वहां सोना पारंपरिक बचत का प्रमुख माध्यम माना जाता है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में भी गोल्ड लोन बाजार में मजबूत वृद्धि जारी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों और ग्राहकों को लोन लेते समय ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात और समय पर भुगतान जैसी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
निष्कर्ष
सोने की रिकॉर्ड कीमतों ने भारतीय परिवारों की पारंपरिक संपत्ति को एक मजबूत वित्तीय साधन में बदल दिया है। बढ़ती कीमतों के कारण अब लोग अपने घरों में रखे सोने पर पहले से कहीं अधिक राशि का लोन प्राप्त कर रहे हैं। तेजी से बढ़ता गोल्ड लोन बाजार और बेहद कम डिफॉल्ट दर यह दर्शाती है कि गोल्ड लोन आज भारत में सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित ऋण विकल्पों में से एक बन चुका है।


