देश की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति बहाल होने के बाद प्राकृतिक गैस पर लगाए गए अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंध वापस ले लिए हैं। इससे गैस आधारित बिजलीघर, पेट्रोकेमिकल उद्योग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में संशोधन किया। इसके तहत मार्च में लागू किए गए उन विशेष प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया है, जिनके माध्यम से सरकार घरेलू और आयातित गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित कर रही थी।
क्यों लगाए गए थे आपातकालीन प्रतिबंध?
सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आपातकालीन व्यवस्था लागू की थी। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों तथा उसके जवाब में ईरानी कार्रवाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी और कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित होने लगी थी।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि कई अंतरराष्ट्रीय गैस आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया था। इससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी। ऐसे हालात में सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए गैस वितरण पर नियंत्रण स्थापित किया था।
अब क्यों हटाए गए प्रतिबंध?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू हो चुका है, कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य हो गया है। एलएनजी जहाजों की आवाजाही फिर से सुचारु होने के बाद गैस आपूर्ति पर लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंधों की आवश्यकता समाप्त हो गई है।
सरकार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार आधारित गैस आपूर्ति व्यवस्था को फिर से सामान्य रूप से संचालित किया जा सकता है।
संकट के दौरान सरकार ने उठाए थे तीन बड़े कदम
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने मार्च में तीन अहम फैसले लिए थे—
- प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और आवंटन को सरकारी नियंत्रण में लिया गया।
- रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की जगह एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
- बड़े थोक उपभोक्ताओं को डीजल बिक्री पर सीमाएं लगाई गईं।
एलपीजी उत्पादन और डीजल बिक्री से जुड़े प्रतिबंध पहले ही समाप्त किए जा चुके थे। अब गैस आपूर्ति से जुड़े प्रावधान भी हटा दिए गए हैं।
बिजलीघरों और उद्योगों पर पड़ा था असर
आपातकालीन व्यवस्था लागू होने के दौरान सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी थी।
घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), परिवहन क्षेत्र के लिए CNG, एलपीजी उत्पादन तथा गैस पाइपलाइन संचालन के लिए लगभग पूरी जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध कराई गई।
इसके विपरीत उर्वरक संयंत्रों को उनकी औसत जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत और औद्योगिक उपभोक्ताओं को करीब 80 प्रतिशत गैस ही उपलब्ध कराई गई। प्राथमिकता वाली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गैस आधारित बिजलीघरों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों की गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी थी।
तेल रिफाइनरियों को भी अपनी सामान्य गैस खपत को लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित रखने के निर्देश दिए गए थे।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत जरूरत विदेशों से पूरी होती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत और कच्चे तेल के आयात का 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। यही कारण है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन कीमतों और औद्योगिक उत्पादन पर सीधा असर डाल सकता है।
GAIL को दी गई थी विशेष जिम्मेदारी
संकट के दौरान सरकारी कंपनी GAIL को पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के साथ मिलकर गैस की पूलिंग, पुनर्वितरण और नई कीमत तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे उपलब्ध गैस का बेहतर प्रबंधन किया गया और आवश्यक क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की गई।
अब आपातकालीन आदेश हटने के बाद गैस वितरण व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य व्यावसायिक ढांचे में लौटेगी।
आम लोगों और उद्योगों पर क्या होगा असर?
गैस आपूर्ति सामान्य होने से गैस आधारित बिजली उत्पादन में सुधार आने की संभावना है। औद्योगिक इकाइयों को भी पर्याप्त गैस मिलने लगेगी, जिससे उत्पादन लागत और संचालन में राहत मिल सकती है। इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बढ़ने से देश की औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार अब भी वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में सरकार भविष्य में किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस पर लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंध हटाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे बिजलीघरों, उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र को राहत मिलेगी, जबकि एलएनजी की निर्बाध आपूर्ति देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।


