भारत की काजू राजधानी क्यों कहलाता है कोल्लम?
जब भी भारत के काजू उद्योग की बात होती है तो सबसे पहले केरल के खूबसूरत तटीय शहर कोल्लम (Kollam) का नाम सामने आता है। प्राकृतिक सौंदर्य, बैकवॉटर और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध यह शहर देश की “काजू राजधानी” (Cashew Capital of India) के रूप में भी जाना जाता है। पिछले लगभग 100 वर्षों से कोल्लम काजू प्रसंस्करण (Cashew Processing), व्यापार और निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
हालांकि आज महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक और गोवा जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर काजू की खेती होती है, लेकिन कच्चे काजू को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले उत्पाद में बदलने की विशेषज्ञता और विशाल प्रोसेसिंग नेटवर्क ने कोल्लम को अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि भारत के काजू उद्योग में यह शहर आज भी सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है।
Highlights
- केरल का कोल्लम भारत की “काजू राजधानी” के नाम से प्रसिद्ध है।
- शहर में रोजाना करीब 40,000 किलोग्राम काजू की प्रोसेसिंग की जाती है।
- काजू उद्योग से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
- यहां तैयार काजू अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, जर्मनी और नीदरलैंड सहित कई देशों में निर्यात किए जाते हैं।
- आधुनिक तकनीक और अनुभवी श्रमिकों की वजह से कोल्लम वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बनाए हुए है।
एक सदी पुराना है कोल्लम का काजू उद्योग
कोल्लम में काजू उद्योग की शुरुआत लगभग एक सदी पहले हुई थी। समय के साथ यहां काजू प्रोसेसिंग का ऐसा मजबूत नेटवर्क विकसित हुआ कि यह पूरे देश का सबसे बड़ा काजू व्यापारिक केंद्र बन गया।
आज भी यहां 500 से 700 के बीच छोटी और बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट्स अलग-अलग समय पर संचालित होती हैं। इनकी संख्या बाजार की मांग, कच्चे माल की उपलब्धता और निर्यात की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है।
इस उद्योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल भारत में उगाए गए काजू ही नहीं, बल्कि अफ्रीका के कई देशों से आयात किए गए कच्चे काजू की भी प्रोसेसिंग की जाती है। इससे पूरे वर्ष उत्पादन जारी रहता है और निर्यात पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
लाखों लोगों को मिलता है रोजगार
कोल्लम का काजू उद्योग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि यह लाखों परिवारों की आजीविका का आधार भी है।
इस उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। काजू छीलने, ग्रेडिंग, पैकिंग और गुणवत्ता जांच जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य आज भी कुशल श्रमिकों द्वारा किए जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह उद्योग लंबे समय से आय का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
कैसे तैयार होता है काजू?
कच्चे काजू को खाने योग्य बनाने के लिए कई चरणों वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।
1. भाप से गर्म करना
सबसे पहले कच्चे काजू को नियंत्रित तापमान पर भाप या हीट ट्रीटमेंट दिया जाता है, जिससे उसका कठोर बाहरी छिलका नरम हो जाता है।
2. छिलका हटाना
इसके बाद विशेष मशीनों या प्रशिक्षित श्रमिकों की सहायता से बाहरी खोल को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है ताकि अंदर मौजूद दाना सुरक्षित रहे।
3. पतली परत निकालना
काजू के दाने पर मौजूद हल्की भूरी त्वचा (टेस्टा) को हटाया जाता है। यही प्रक्रिया काजू को आकर्षक सफेद रंग प्रदान करती है।
4. ग्रेडिंग
इसके बाद आकार, गुणवत्ता और टूट-फूट के आधार पर काजू को अलग-अलग ग्रेड में बांटा जाता है।
- Whole Cashew
- Large Whole
- Broken Cashew
- Splits
- Pieces
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन सभी ग्रेड की अलग-अलग कीमत होती है।
5. पैकेजिंग
अंत में नियंत्रित नमी वाले वातावरण में पैकिंग की जाती है ताकि काजू लंबे समय तक ताजा, कुरकुरा और स्वादिष्ट बना रहे।
रोजाना 40,000 किलो तक होती है प्रोसेसिंग
कोल्लम की सबसे बड़ी ताकत इसकी विशाल प्रोसेसिंग क्षमता है। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के अनुसार यहां रोजाना लगभग 40,000 किलोग्राम तक काजू की प्रोसेसिंग की जाती है।
यही कारण है कि भारत के काजू उद्योग में कोल्लम की भूमिका केवल उत्पादन तक सीमित नहीं बल्कि वैल्यू एडिशन (Value Addition) के सबसे बड़े केंद्र के रूप में देखी जाती है।
उत्पादन नहीं, प्रोसेसिंग से मिली पहचान
आज भारत में सबसे अधिक काजू उत्पादन कई अन्य राज्यों में भी होता है, लेकिन कोल्लम की पहचान खेती से ज्यादा प्रोसेसिंग हब के रूप में है।
यहां तैयार होने वाले काजू उच्च गुणवत्ता, बेहतर ग्रेडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली पैकेजिंग के कारण विदेशी बाजारों में विशेष मांग रखते हैं।
भारतीय काजू उद्योग का सालाना कारोबार हजारों करोड़ रुपये का है और कोल्लम इस पूरी व्यापारिक श्रृंखला की रीढ़ माना जाता है।
किन देशों में निर्यात होता है कोल्लम का काजू?
कोल्लम में तैयार काजू दुनिया के कई बड़े बाजारों तक पहुंचते हैं। प्रमुख आयातक देशों में शामिल हैं—
- अमेरिका
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- सऊदी अरब
- कनाडा
- ऑस्ट्रेलिया
- जर्मनी
- नीदरलैंड
- ब्रिटेन
- जापान
- दक्षिण कोरिया
इन देशों में भारतीय काजू अपने बेहतरीन स्वाद, उच्च गुणवत्ता और बेहतर ग्रेडिंग के कारण काफी लोकप्रिय हैं।
उद्योग के सामने क्या हैं चुनौतियां?
हाल के वर्षों में कोल्लम के काजू उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- वियतनाम से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- अफ्रीकी देशों में स्थानीय प्रोसेसिंग बढ़ना
- कच्चे काजू की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- मजदूरी और उत्पादन लागत में वृद्धि
- वैश्विक मांग में बदलाव
इन चुनौतियों के बावजूद उद्योग लगातार आधुनिक मशीनों, ऑटोमेशन, बेहतर पैकेजिंग और वैल्यू-एडेड उत्पादों के जरिए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ है।
भविष्य में भी रहेगा कोल्लम का दबदबा
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद कोल्लम की दशकों पुरानी विशेषज्ञता, प्रशिक्षित श्रमिक, मजबूत निर्यात नेटवर्क और आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं इसे आने वाले वर्षों में भी भारत के काजू उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनाए रखेंगी।
यदि तकनीकी उन्नयन, ब्रांडिंग और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर फोकस जारी रहा तो भारतीय काजू उद्योग की वैश्विक हिस्सेदारी और मजबूत हो सकती है।
निष्कर्ष
कोल्लम केवल केरल का एक खूबसूरत शहर नहीं, बल्कि भारत की काजू अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है। लगभग 100 वर्षों से यह शहर काजू प्रसंस्करण, व्यापार और निर्यात का नेतृत्व कर रहा है। रोजाना करीब 40,000 किलो काजू की प्रोसेसिंग, लाखों लोगों को रोजगार और दुनिया के प्रमुख देशों तक निर्यात की बदौलत कोल्लम ने “भारत की काजू राजधानी” का सम्मान हासिल किया है। बदलते वैश्विक बाजार और प्रतिस्पर्धा के बावजूद यह शहर आज भी भारतीय काजू उद्योग की पहचान और प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।


