नई दिल्ली: भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए सेमीकंडक्टर (चिप) बनाने वाला प्रमुख देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि वर्ष 2026 के अंत तक देश में पांच सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह चालू हो जाएंगे। इसके बाद भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक मजबूत और भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, लाखों नए रोजगार पैदा होंगे और देश से निर्मित ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स की मांग जापान, अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में भी बढ़ेगी।
2026 तक पांच प्लांट होंगे पूरी तरह चालू
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, केंद्र सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। इनमें से तीन परियोजनाओं ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि दो अन्य प्लांट अगले कुछ महीनों में उद्घाटन के लिए तैयार हैं। यदि सभी परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो 2026 के अंत तक भारत के पास पांच सक्रिय सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां होंगी।
यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आ रही है जब दुनिया चीन पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भारत के लिए यह बड़ा अवसर माना जा रहा है।
साणंद का सीजी सेमी प्लांट बना नई शुरुआत का प्रतीक
गुजरात के साणंद में स्थित सीजी सेमी (OSAT) प्लांट ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। यह प्लांट केवल 27 महीनों में भूमिपूजन से लेकर उत्पादन तक पहुंच गया, जिसे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
करीब 7,600 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट का भूमिपूजन 13 मार्च 2024 को हुआ था। इस परियोजना को जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। इस सहयोग के माध्यम से भारत को अत्याधुनिक चिप निर्माण तकनीक, आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाओं और वैश्विक गुणवत्ता मानकों तक पहुंच मिली है।
पीएम मोदी ने किया था पहले दो प्लांट का उद्घाटन
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 और 31 मार्च 2026 को देश के पहले और दूसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन किया था। अब तीसरे प्लांट के उत्पादन शुरू होने के साथ भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तैयार हो रहा यह सेमीकंडक्टर मिशन आने वाले वर्षों में भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऑटोमोबाइल से लेकर इंडस्ट्री तक होगा इस्तेमाल
साणंद प्लांट में तैयार होने वाले सेमीकंडक्टर का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- ऑटोमोबाइल उद्योग
- इलेक्ट्रिक स्कूटर और टू-व्हीलर
- औद्योगिक मशीनें
- स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
- ऑटोमेशन सिस्टम
इन चिप्स का निर्यात जापान, अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में किया जाएगा। इससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनेगा और विदेशी मुद्रा आय में भी वृद्धि होगी।
महिलाओं को मिल रहा नया अवसर
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह परियोजना केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी उदाहरण है। प्लांट में झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल और गुजरात सहित कई राज्यों की युवा महिलाएं ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं।
इन कर्मचारियों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजा गया था। सरकार का लक्ष्य भविष्य में इसी स्तर का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण भारत में ही उपलब्ध कराना है, ताकि देश में ही उच्च कौशल वाले तकनीकी विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने बनाई नई पहचान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग उद्योग अब लगभग 13 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है। इस क्षेत्र में 25 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिस्प्ले, बैटरी और अब सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से हो रहा निवेश भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ने से भारत को कई बड़े लाभ मिलेंगे।
- आयात पर निर्भरता कम होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो उद्योग को घरेलू स्तर पर चिप्स उपलब्ध होंगे।
- विदेशी निवेश में तेजी आएगी।
- लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
- भारत वैश्विक सप्लाई चेन में रणनीतिक भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब योजनाओं से आगे बढ़कर जमीन पर दिखाई देने लगा है। साणंद में सीजी सेमी प्लांट के उत्पादन शुरू होने और 2026 तक पांच प्लांट चालू होने की उम्मीद से यह साफ है कि देश हाई-टेक विनिर्माण के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। यदि परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स केवल घरेलू उद्योगों की जरूरतें पूरी नहीं करेंगे, बल्कि जापान, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचकर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

