8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर 1.8 या 1.9 फिटमेंट फैक्टर, 50% डीए मर्जर और पुरानी पेंशन (OPS) को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने इन सभी मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए 3.833 फिटमेंट फैक्टर पूरी तरह तर्कसंगत मांग है, जबकि NPS और UPS कर्मचारियों के हितों की पूरी तरह रक्षा नहीं करते।
8th Pay Commission से कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद क्या?
बीसी शर्मा के अनुसार वेतन आयोग का मूल उद्देश्य कर्मचारियों को ऐसा वेतन देना है जिससे वे बढ़ती महंगाई के बीच सम्मानजनक जीवन जी सकें। उनका कहना है कि रेलवे एक सामान्य सरकारी विभाग नहीं बल्कि 236 से अधिक अलग-अलग श्रेणियों वाला विशाल तकनीकी संगठन है। ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों, तकनीशियन, गेटमैन और इंजीनियरों की जिम्मेदारियां अलग हैं, इसलिए उनके वेतन निर्धारण में भी विशेष दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि रेलवे में भी बैंकिंग सेक्टर की तरह स्थायी वेतन समीक्षा व्यवस्था लागू होनी चाहिए ताकि कर्मचारियों को हर 10 साल तक इंतजार न करना पड़े।
3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों?
NFIR ने आयोग के सामने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। यदि यह स्वीकार होता है तो न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है।
बीसी शर्मा के अनुसार यह मांग किसी अनुमान पर आधारित नहीं है, बल्कि ILO (International Labour Organization) और डॉ. एक्रॉयड फॉर्मूले के आधार पर तैयार की गई है। इसमें एक परिवार की वास्तविक जरूरतों—भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य आवश्यक खर्चों—को ध्यान में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि पहले वेतन निर्धारण में परिवार की तीन यूनिट मानी जाती थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आश्रित माता-पिता को भी शामिल करने से कुल पांच यूनिट के आधार पर न्यूनतम जीवनयापन लागत का आकलन किया जाता है।
क्या 1.8 या 1.9 फिटमेंट फैक्टर मिलने की संभावना है?
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि सरकार केवल 1.8 या 1.9 फिटमेंट फैक्टर ही दे सकती है।
इस पर बीसी शर्मा ने कहा कि ऐसी बातें केवल अनुमान हैं। उनका कहना है कि यह गणना केवल मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को जोड़कर की जा रही है, जबकि वेतन आयोग वास्तविक बाजार मूल्य, महंगाई और कर्मचारियों की जीवन-यापन लागत को भी ध्यान में रखता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सातवें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर मिलने के बावजूद वास्तविक वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही थी। इसलिए इस बार कर्मचारी संगठनों की मांग इससे काफी अधिक है।
क्या शुरुआती सैलरी 1 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है?
यदि न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये होती है तो विभिन्न भत्तों को जोड़ने के बाद कुल मासिक वेतन लगभग 90,000 से 1 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि बीसी शर्मा का कहना है कि केवल वेतन का आंकड़ा बड़ा दिखने से वास्तविक आर्थिक स्थिति नहीं बदलती। बढ़ती महंगाई, आयकर, बिजली बिल, शिक्षा और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कर्मचारियों की क्रय शक्ति को लगातार प्रभावित कर रहा है।
50% DA मर्जर की सच्चाई क्या है?
50 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) बेसिक पे में मर्ज होने की चर्चा लंबे समय से चल रही है।
बीसी शर्मा के अनुसार यह कोई नई घोषणा नहीं बल्कि पहले से तय व्यवस्था है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार जब डीए 50 प्रतिशत तक पहुंचता है तो उसे बेसिक वेतन में समाहित किया जाता है। इसके बाद कई भत्तों, विशेषकर HRA, में भी निर्धारित नियमों के अनुसार वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार डीए मर्ज नहीं करती तो उसे फिटमेंट फैक्टर अधिक रखना पड़ सकता है।
अगर आयोग की रिपोर्ट में देरी हुई तो क्या मिलेगा एरियर?
NFIR का मानना है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें जल्द लागू होनी चाहिए। यदि प्रक्रिया में देरी होती है तो संगठन 20 प्रतिशत अंतरिम राहत (Interim Relief) की मांग करेगा, जिसे बाद में नए वेतन में समायोजित किया जा सकता है।
साथ ही कोविड-19 महामारी के दौरान रोके गए तीन डीए किस्तों को जारी करने की भी मांग दोहराई गई है। संगठन का कहना है कि इससे विशेष रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
लेवल-1 और ग्रुप-डी कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है?
बीसी शर्मा के अनुसार हर नए वेतन आयोग में सबसे अधिक लाभ नए भर्ती कर्मचारियों को मिलता है, लेकिन इस बार संगठन की प्राथमिकता निम्न वेतन स्तर और उच्च अधिकारियों के बीच बढ़ते वेतन अंतर को कम करना है।
उन्होंने कहा कि पहले न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात काफी संतुलित था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह अंतर बहुत अधिक बढ़ चुका है। ऐसे में ग्रुप-डी और नॉन-गजेटेड कर्मचारियों को बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
OPS, NPS और UPS पर NFIR का क्या कहना है?
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर NFIR का रुख पहले की तरह स्पष्ट है।
बीसी शर्मा ने कहा कि:
- NPS कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी।
- UPS (Unified Pension Scheme) भी पूरी तरह समाधान नहीं है क्योंकि इसमें 50% पेंशन के लिए 25 वर्ष की सेवा जैसी शर्तें रखी गई हैं।
- कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
- संगठन का दावा है कि अधिकांश कर्मचारी अब भी OPS की बहाली चाहते हैं।
उनका कहना है कि कर्मचारियों को निश्चित और सुरक्षित पेंशन मिलनी चाहिए, न कि बाजार आधारित अनिश्चित रिटर्न पर निर्भर व्यवस्था।
क्या 69,000 रुपये न्यूनतम वेतन तय होना लगभग तय है?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये न्यूनतम बेसिक पे NFIR सहित कर्मचारी संगठनों की मांग है, सरकार का अंतिम निर्णय नहीं। आठवें वेतन आयोग सभी कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और अन्य पक्षों से सुझाव लेने के बाद अपनी सिफारिशें देगा। अंतिम मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा दी जाएगी।
इसलिए 1.9 फिटमेंट फैक्टर, 3.833 फिटमेंट फैक्टर, 50% डीए मर्जर और OPS जैसे सभी मुद्दों पर अंतिम स्थिति आयोग की रिपोर्ट और सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।


