Smriti Irani: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फिर से बड़ी जिम्मेदारी दी है। ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरानी लंबे समय से BJP के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल रही हैं और अमेठी की राजनीति में उनकी मजबूत पहचान है।
BJP को उम्मीद है कि उनकी आक्रामक भाषण शैली, संगठनात्मक अनुभव और महिला मतदाताओं के बीच पहचान आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान को मजबूती दे सकती है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश से कुल आठ नेताओं को BJP की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इससे संकेत मिलता है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी राज्य को अपनी रणनीति में काफी अहम मान रही है।
BJP की नई टीम में यूपी को खास जगह
BJP अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से स्मृति ईरानी और पूर्व बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं पूर्व धौरहरा सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है।
इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। अमर पाल मौर्य को BJP OBC मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
इस टीम में उत्तर प्रदेश को मिली प्रमुख जिम्मेदारियों से साफ है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
2024 की हार के बाद स्मृति ईरानी की वापसी क्यों अहम?
स्मृति ईरानी के लिए राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमेठी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाने वाली ईरानी के लिए यह हार बड़ा राजनीतिक झटका मानी गई।
2024 के चुनाव के बाद उनके पास पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं थी। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें BJP की राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाना उनकी राजनीतिक सक्रियता की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, BJP अब उन्हें केवल अमेठी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक बड़े प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है।
महिला वोटरों पर BJP का फोकस
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता पिछले कुछ चुनावों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में स्मृति ईरानी का इस्तेमाल BJP के लिए रणनीतिक तौर पर फायदेमंद हो सकता है।
ईरानी लंबे समय से महिला मुद्दों पर मुखर रही हैं और मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। उनकी सार्वजनिक छवि एक प्रभावशाली और आक्रामक महिला नेता की रही है।
राजनीतिक विश्लेषक मनोज भद्रा के मुताबिक, जब सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने पर जोर दे रहे हैं, तब BJP के लिए स्मृति ईरानी की वापसी एक महत्वपूर्ण संदेश हो सकती है। उनकी भाषण शैली और राष्ट्रीय पहचान पार्टी को महिला मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, उनकी उपयोगिता सिर्फ महिला वोटरों तक सीमित नहीं है। BJP उन्हें विपक्ष पर सीधा हमला करने वाले प्रमुख नेताओं में भी शामिल कर सकती है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव के खिलाफ BJP का आक्रामक चेहरा?
उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव BJP और विपक्ष के बीच कड़े मुकाबले का चुनाव हो सकता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं के बीच BJP को ऐसे नेताओं की जरूरत होगी जो विपक्ष के प्रमुख चेहरों को सीधे चुनौती दे सकें।
स्मृति ईरानी इस भूमिका के लिए BJP की स्वाभाविक पसंद हो सकती हैं। कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ उनका आक्रामक राजनीतिक रुख पहले से चर्चित रहा है। 2019 में अमेठी में राहुल गांधी को हराने के बाद उनकी राष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई थी।
इसलिए पार्टी अगर उन्हें उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियान में प्रमुख भूमिका देती है, तो राहुल गांधी और अखिलेश यादव के खिलाफ BJP का राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है।
अमेठी से जुड़ा है स्मृति ईरानी का मजबूत राजनीतिक रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश ईरानी के लिए कोई नया राजनीतिक मैदान नहीं है। उन्होंने 2014 में पहली बार अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि वह चुनाव हार गई थीं, लेकिन उन्होंने अमेठी में अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखी।
2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी मेहनत का परिणाम मिला। ईरानी ने राहुल गांधी को हराकर अमेठी सीट पर बड़ा उलटफेर किया। इस जीत के बाद वह BJP के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल हो गईं और उन्हें ‘जायंट किलर’ के तौर पर पहचान मिली।
2024 में हालांकि कहानी बदल गई और कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें हरा दिया। इसके बावजूद अमेठी में BJP के एक वर्ग का मानना है कि ईरानी की संगठनात्मक पकड़ और क्षेत्र में उनकी पुरानी पहचान पार्टी के लिए अब भी उपयोगी है।
अमेठी और रायबरेली में BJP के सामने क्या चुनौती है?
स्मृति ईरानी की वापसी का असर अमेठी और रायबरेली जैसे इलाकों में देखने को मिल सकता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी की चार सीटों में से BJP ने तिलोई और जगदीशपुर सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने गौरीगंज और अमेठी सीट पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह BJP में शामिल हो गए।
रायबरेली में भी 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने छह में से चार सीटों—बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार—पर जीत दर्ज की थी। BJP ने रायबरेली और सलोन सीटें जीती थीं। बाद में ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडे BJP में शामिल हो गए और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बने।
इस लिहाज से अमेठी और रायबरेली क्षेत्र में दल-बदल और बदलते राजनीतिक समीकरण भी 2027 के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
BJP की नजर सिर्फ अमेठी पर नहीं
स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर वापसी को केवल अमेठी तक सीमित देखना शायद सही नहीं होगा। BJP उन्हें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़े चुनावी कार्यक्रमों और महिला-केंद्रित अभियानों में उतार सकती है।
उनकी राष्ट्रीय पहचान पार्टी के लिए भीड़ जुटाने और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने में मदद कर सकती है। BJP के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ईरानी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं और उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
इसके अलावा राहुल गांधी से उनका पुराना राजनीतिक मुकाबला भी पार्टी के लिए चुनावी नैरेटिव तैयार करने में मददगार हो सकता है।
जल्द शुरू हो सकता है यूपी का दौरा
BJP सूत्रों के मुताबिक, स्मृति ईरानी जल्द ही उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे शुरू कर सकती हैं। माना जा रहा है कि इन दौरों में अमेठी और रायबरेली पर विशेष फोकस हो सकता है।
हालांकि, उनका अभियान केवल इन दो क्षेत्रों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। महिला मतदाताओं, OBC और अन्य सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने के लिए उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जा सकती है।
ऐसे में राष्ट्रीय महासचिव की नई जिम्मेदारी ईरानी को संगठन और चुनाव प्रचार, दोनों स्तरों पर सक्रिय होने का मौका देगी।
‘तुलसी’ से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचीं स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर काफी अलग रहा है। राजनीति में आने से पहले वह टेलीविजन की लोकप्रिय अभिनेत्री थीं। धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी का किरदार निभाकर वह घर-घर में पहचान बना चुकी थीं।
उन्होंने 2003 में BJP की सदस्यता ली और बाद में BJP महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय सचिव जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद के तौर पर भी काम किया।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में 2014 से 2024 के बीच उन्हें शिक्षा, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली।
यानी संगठन, सरकार और चुनावी राजनीति—तीनों स्तरों पर उनके पास लंबा अनुभव है।
2027 में BJP के लिए कितना काम आएगा यह दांव?
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाना BJP की उत्तर प्रदेश रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उनके सामने एक तरफ संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी, तो दूसरी तरफ उन्हें महिला मतदाताओं और उन सामाजिक समूहों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने में भूमिका निभानी पड़ सकती है जहां मुकाबला कड़ा है।
2019 की अमेठी जीत ने उन्हें BJP का बड़ा राष्ट्रीय चेहरा बनाया था, जबकि 2024 की हार ने उनकी राजनीतिक स्थिति को चुनौती दी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय संगठन में वापसी उन्हें खुद को फिर से साबित करने का मौका भी देती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी से मिली ऐतिहासिक जीत वाली राजनीतिक ऊर्जा को पूरे उत्तर प्रदेश में BJP के लिए चुनावी फायदे में बदल पाएंगी? इसका जवाब 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान ही साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि BJP ने उन्हें ऐसे समय में बड़ी जिम्मेदारी दी है जब उत्तर प्रदेश की चुनावी तैयारियां तेजी से शुरू हो रही हैं।


