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Gold Monetisation Scheme 2026: घर में रखे सोने को इस्तेमाल में लाने की नई तैयारी, पहली बार जूलर्स को मिलेगा बड़ा रोल

Namam Sharma
Last updated: 2026/07/03 at 11:28 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। भारतीय परिवारों के पास अनुमानित 30,000 टन से अधिक सोना घरों, लॉकरों और तिजोरियों में रखा हुआ है। यह सोना आर्थिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाता, जबकि देश को हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करना पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार Gold Monetisation Scheme (GMS) के नए संस्करण पर काम कर रही है।

Contents
क्या है Gold Monetisation Scheme?सरकार क्यों ला रही है नया वर्जन?पहली बार जूलर्स को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारीजूलर्स को क्या फायदा होगा?सरकार का असली मकसद क्या है?फेस्टिव सीजन से पहले आ सकती है घोषणामई में क्यों घटा सोने का आयात?पुरानी Gold Monetisation Scheme क्यों नहीं चली?1. भावनात्मक जुड़ाव2. कम ब्याज3. लंबी प्रक्रिया4. सीमित पहुंच5. भरोसे की कमीवर्तमान में क्या विकल्प उपलब्ध हैं?ग्राहकों को क्या फायदा हो सकता है?क्या आपके आभूषण सुरक्षित रहेंगे?क्या नई योजना सफल हो पाएगी?निष्कर्षFAQQ1. Gold Monetisation Scheme क्या है?Q2. नई योजना में क्या बदलाव हो सकता है?Q3. पुरानी योजना सफल क्यों नहीं हुई?Q4. नई योजना कब आ सकती है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार सरकार योजना में जूलर्स (Jewellers) को भी शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह 2015 में शुरू हुई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। सरकार की कोशिश है कि लोगों के घरों में रखा निष्क्रिय सोना आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बने और देश की आयात निर्भरता कम हो।


क्या है Gold Monetisation Scheme?

Gold Monetisation Scheme (GMS) की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के पास रखे सोने को बैंकिंग सिस्टम में लाना था ताकि:

  • सोने का आयात कम किया जा सके।
  • विदेशी मुद्रा की बचत हो।
  • बैंकों और उद्योगों को घरेलू सोना उपलब्ध हो सके।
  • देश के Current Account Deficit (CAD) पर दबाव कम हो।

इस योजना के तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा करते हैं। जांच और शुद्धता की पुष्टि के बाद बैंक उसे स्वीकार करता है और बदले में जमाकर्ता को ब्याज भी मिलता है।


सरकार क्यों ला रही है नया वर्जन?

सरकार का मानना है कि पुरानी योजना अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। पिछले करीब एक दशक में लाखों टन सोने के मुकाबले केवल करीब 39 टन सोना ही इस योजना के जरिए सिस्टम में आ पाया।

ऐसे में अब सरकार इसे अधिक आसान, भरोसेमंद और लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बैंकिंग क्षेत्र और बुलियन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच हाल के दिनों में कई दौर की बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में योजना को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई है।


पहली बार जूलर्स को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

नई योजना का सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि जूलर्स को Collection एवं Aggregation Point बनाया जाए।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जूलर्स:

  • ग्राहकों से सोना प्राप्त करेंगे।
  • उसकी प्रारंभिक जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करेंगे।
  • अधिकृत रिफाइनर्स तक सोना पहुंचाएंगे।
  • बैंकों के साथ समन्वय करेंगे।
  • पूरी प्रक्रिया में ट्रेसेबिलिटी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।

इससे ग्राहकों को सीधे बैंक या टेस्टिंग सेंटर जाने की जरूरत कम पड़ सकती है।


जूलर्स को क्या फायदा होगा?

सरकार केवल ग्राहकों को ही नहीं बल्कि जूलर्स को भी इस योजना का हिस्सा बनाकर उन्हें आर्थिक लाभ देना चाहती है।

संभावित रूप से उन्हें मिलेगी:

  • Collection Fee
  • Handling Charges
  • Processing Fee
  • Customer Facilitation Fee

इससे जूलर्स भी योजना को बढ़ावा देने में रुचि दिखा सकते हैं।


सरकार का असली मकसद क्या है?

भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है।

यदि घरेलू स्तर पर रखा सोना बाजार में उपलब्ध होने लगे तो:

  • नए सोने के आयात की जरूरत घट सकती है।
  • ज्वेलरी उद्योग को घरेलू सोना मिलेगा।
  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

फेस्टिव सीजन से पहले आ सकती है घोषणा

सूत्रों के मुताबिक सरकार अगस्त में इस नई योजना की घोषणा कर सकती है ताकि:

  • त्योहारी सीजन
  • रक्षा बंधन
  • गणेश उत्सव
  • नवरात्रि
  • दिवाली

से पहले इसे लागू किया जा सके।

इन महीनों में सोने की मांग सबसे अधिक रहती है।


मई में क्यों घटा सोने का आयात?

हाल के महीनों में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है। इसके साथ ही आयात शुल्क और अन्य लागतों ने भी सोने को महंगा बना दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार मई महीने में भारत का गोल्ड इंपोर्ट घटकर लगभग 12 अरब डॉलर रहा।

सरकार चाहती है कि घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का उपयोग बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम की जाए।


पुरानी Gold Monetisation Scheme क्यों नहीं चली?

हालांकि योजना का उद्देश्य अच्छा था, लेकिन कई व्यावहारिक कारणों से इसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

1. भावनात्मक जुड़ाव

भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत माना जाता है। शादी, त्योहार और पीढ़ियों से मिले आभूषण लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखते हैं।

इसी कारण लोग उन्हें बैंक में जमा करने से बचते रहे।

2. कम ब्याज

योजना के तहत मिलने वाला ब्याज अपेक्षाकृत कम था, जिससे अधिकांश लोगों को आकर्षण महसूस नहीं हुआ।

3. लंबी प्रक्रिया

सोने की शुद्धता जांच, प्रमाणन और जमा प्रक्रिया काफी समय लेने वाली थी।

4. सीमित पहुंच

हर शहर में अधिकृत टेस्टिंग सेंटर उपलब्ध नहीं थे।

5. भरोसे की कमी

कई लोगों को यह चिंता रहती थी कि जमा करने के बाद उन्हें वही आभूषण वापस नहीं मिलेंगे क्योंकि सोने को पिघलाकर उपयोग किया जाता है।


वर्तमान में क्या विकल्प उपलब्ध हैं?

पहले इस योजना में:

  • Short-Term Deposit
  • Medium-Term Deposit
  • Long-Term Deposit

तीनों विकल्प मौजूद थे।

लेकिन अब केवल 1 से 3 वर्ष की Short-Term Bank Deposit Scheme ही उपलब्ध है। Medium और Long-Term विकल्प बंद किए जा चुके हैं।


ग्राहकों को क्या फायदा हो सकता है?

यदि नया मॉडल लागू होता है तो ग्राहकों को कई फायदे मिल सकते हैं।

  • नजदीकी जूलर्स के माध्यम से प्रक्रिया आसान होगी।
  • बैंक तक बार-बार जाने की जरूरत कम होगी।
  • दस्तावेजी प्रक्रिया सरल हो सकती है।
  • पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • अधिक लोगों की भागीदारी संभव होगी।

क्या आपके आभूषण सुरक्षित रहेंगे?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

Gold Monetisation Scheme के तहत सामान्यतः जमा किया गया सोना जांच के बाद पिघलाकर शुद्ध सोने में बदल दिया जाता है। इसलिए यदि कोई पारंपरिक या पारिवारिक आभूषण भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, तो उसे जमा करने से पहले सभी नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।


क्या नई योजना सफल हो पाएगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार:

  • जूलर्स का नेटवर्क जोड़े,
  • प्रक्रिया आसान बनाए,
  • ब्याज दर आकर्षक रखे,
  • डिजिटल ट्रैकिंग उपलब्ध कराए,
  • ग्राहकों का भरोसा बढ़ाए,

तो यह योजना पहले की तुलना में कहीं अधिक सफल हो सकती है।

हालांकि सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि लोग अपने सोने को केवल संपत्ति नहीं बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखने के लिए कितने तैयार होते हैं।


निष्कर्ष

Gold Monetisation Scheme का नया संस्करण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। सरकार का उद्देश्य केवल सोने का आयात घटाना नहीं, बल्कि घरों में निष्क्रिय पड़े विशाल गोल्ड स्टॉक को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना भी है। यदि जूलर्स को आधिकारिक रूप से इस योजना का हिस्सा बनाया जाता है, तो ग्राहकों के लिए प्रक्रिया पहले से अधिक सरल और सुविधाजनक हो सकती है। अब सभी की नजर अगस्त में संभावित घोषणा पर टिकी है, जहां इस योजना की अंतिम रूपरेखा सामने आ सकती है।


FAQ

Q1. Gold Monetisation Scheme क्या है?

यह सरकार की योजना है जिसके तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर ब्याज प्राप्त कर सकते हैं और देश में सोने के आयात पर निर्भरता कम करने में योगदान दे सकते हैं।

Q2. नई योजना में क्या बदलाव हो सकता है?

सरकार पहली बार जूलर्स को Collection और Aggregation Point बनाने पर विचार कर रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया आसान हो सकती है।

Q3. पुरानी योजना सफल क्यों नहीं हुई?

कम ब्याज, जटिल प्रक्रिया, सीमित पहुंच और लोगों का अपने आभूषणों से भावनात्मक लगाव इसकी प्रमुख वजहें रहीं।

Q4. नई योजना कब आ सकती है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अगस्त 2026 में Gold Monetisation Scheme के नए संस्करण की घोषणा कर सकती है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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