नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी एक नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के तीन दिवसीय भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को लेकर कई बड़े ऐलान होने की उम्मीद है। सबसे अहम बात यह है कि जापानी कंपनियां भारत में करीब 12.5 अरब डॉलर (करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये) के नए निवेश का ऐलान कर सकती हैं। यह निवेश भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी स्थिति मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-जापान की यह बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे समय में जब चीन वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बना हुआ है, जापानी कंपनियों का भारत की ओर बढ़ता रुझान बीजिंग के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
150 से अधिक जापानी कंपनियां लेंगी हिस्सा
जापान-इंडिया इकोनॉमिक फोरम में 150 से अधिक जापानी कंपनियां भाग ले रही हैं। इस मंच पर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां भारत में नए निवेश की योजनाओं का ऐलान कर सकती हैं।
यह निवेश पिछले वर्ष जापान सरकार द्वारा घोषित उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के निजी जापानी निवेश को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया था।
करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश
जापानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बार घोषित होने वाला निवेश करीब 2 ट्रिलियन येन (12.5 अरब डॉलर) का हो सकता है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये बैठती है।
यह पूंजी विभिन्न क्षेत्रों में लगाई जा सकती है, जिनमें शामिल हैं—
- ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन
- सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन
- रेलवे एवं लॉजिस्टिक्स
- ग्रीन एनर्जी
- औद्योगिक पार्क
- स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग
- डिजिटल टेक्नोलॉजी
इन क्षेत्रों में निवेश से भारत की औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
भारत में मजबूत होगी जापानी कंपनियों की मौजूदगी
कोविड महामारी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने की रणनीति अपना रही हैं। चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए भारत सबसे बड़े विकल्प के रूप में उभर रहा है।
जापानी कंपनियां भी अब भारत में उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय बाजार का लाभ उठाने और निर्यात केंद्र विकसित करने पर जोर दे रही हैं।
भारत की बड़ी आबादी, तेज आर्थिक विकास, कुशल कार्यबल और सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘पीएलआई योजना’ जैसी नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
भारत और जापान दोनों ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए साझा रणनीति पर काम कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच निम्न विषयों पर चर्चा होगी—
- रणनीतिक तेल भंडारण
- एलएनजी सहयोग
- स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं
- ग्रीन हाइड्रोजन
- अमोनिया आधारित ऊर्जा
- नवीकरणीय ऊर्जा निवेश
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर हो सकती है।
रक्षा सहयोग को भी मिलेगा नया आयाम
भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
इस यात्रा के दौरान निम्न क्षेत्रों में प्रगति की संभावना है—
- समुद्री सुरक्षा
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग
- रक्षा तकनीक
- संयुक्त सैन्य अभ्यास
- आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा
- रक्षा उपकरणों का निर्माण
दोनों देश स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने पर लगातार जोर देते रहे हैं।
हरियाणा में खुलेगा मारुति सुजुकी का नया प्लांट
दौरे के दौरान सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक कार्यक्रमों में से एक होगा हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन।
यह प्लांट लगभग 35,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
यह मारुति सुजुकी का भारत में चौथा बड़ा उत्पादन केंद्र होगा और इससे—
- उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
- हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे।
- ऑटो कंपोनेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
भारत अब मारुति सुजुकी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
पीएम मोदी और ताकाइची की अहम बैठक
नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।
बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई—
- निवेश
- व्यापार
- रक्षा सहयोग
- तकनीकी साझेदारी
- सप्लाई चेन
- ऊर्जा सुरक्षा
- क्षेत्रीय स्थिरता
दोनों नेताओं ने भारत-जापान संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सम्मान और भरोसे का संदेश
बैठक के दौरान एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने भारत और जापान के राष्ट्रीय ध्वज के सामने झुककर सम्मान प्रकट किया। इसे दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और मजबूत मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।
चीन क्यों रहेगा चिंतित?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत-जापान की मजबूत होती साझेदारी चीन के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
1. सप्लाई चेन का विकल्प
यदि जापानी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करती हैं तो चीन पर वैश्विक निर्भरता घट सकती है।
2. इंडो-पैसिफिक रणनीति
भारत और जापान दोनों स्वतंत्र और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थक हैं, जिसे चीन अलग नजरिए से देखता है।
3. रक्षा सहयोग
दोनों देशों का बढ़ता रक्षा सहयोग चीन की सामरिक रणनीति पर असर डाल सकता है।
4. निवेश का रुख
यदि विदेशी कंपनियां चीन के बजाय भारत में निवेश बढ़ाती हैं तो यह चीन की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि प्रस्तावित निवेश पूरी तरह जमीन पर उतरता है तो भारत को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं—
- 1.2 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश
- लाखों रोजगार के अवसर
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
- निर्यात में वृद्धि
- स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत
- विदेशी मुद्रा निवेश में बढ़ोतरी
- ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई गति
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विस्तार
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत
भारत-जापान साझेदारी क्यों है खास?
भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश—
- लोकतांत्रिक मूल्य साझा करते हैं।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोगी हैं।
- आधारभूत ढांचा विकास में साझेदार हैं।
- हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं।
- हरित ऊर्जा और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
इसी वजह से दोनों देशों की साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।
आगे क्या?
इस यात्रा के दौरान कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके अलावा निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और औद्योगिक सहयोग से जुड़े कई नए रोडमैप भी सामने आ सकते हैं। यदि घोषित निवेश समय पर लागू होता है तो भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और देश वैश्विक निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
निष्कर्ष
जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भारत दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश, ऊर्जा सुरक्षा पर साझेदारी, रक्षा सहयोग और मारुति सुजुकी के नए प्लांट जैसी पहलें भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकती हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका और जापानी कंपनियों का बढ़ता भरोसा आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत साबित हो सकता है।


