नई दिल्ली: तमिलनाडु में सरकारी शिक्षक भर्ती को लेकर देश के प्रमुख टेक उद्यमियों में से एक जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने गंभीर आरोप लगाए हैं। वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि राज्य में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता गिरने की बड़ी वजह शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी पाने के लिए एक साल के वेतन के बराबर रकम पहले से रिश्वत के रूप में देनी पड़ती है।
वेम्बू ने अपनी पोस्ट में तमिलनाडु मुख्यमंत्री कार्यालय (TN CMO) को भी टैग किया। उनके बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब राज्य में नई सरकार औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटी है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और राज्य सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
सरकारी स्कूलों की हालत पर उठाए सवाल
As of this year, about 50% of Tamil Nadu school students study in government schools. This percentage has dropped considerably because the government schools have gotten worse. Often even poor rural parents borrow money to send their children to private schools when they can,…
— Sridhar Vembu (@svembu) June 29, 2026 वेम्बू ने अपनी पोस्ट में कहा कि तमिलनाडु में अब केवल करीब 50% छात्र ही सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि बाकी निजी स्कूलों का रुख कर चुके हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में गिरावट आने के कारण ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी कर्ज लेकर अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है तो सबसे पहले शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।
‘एक साल की सैलरी तक मांगी जाती है रिश्वत’
वेम्बू ने दावा किया कि सरकारी शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार लंबे समय से एक “ओपन सीक्रेट” बना हुआ है। उन्होंने लिखा कि उन्हें बताया गया है कि वर्तमान समय में सरकारी शिक्षक की नौकरी पाने के लिए एक साल के वेतन के बराबर रकम अग्रिम रूप से देनी पड़ती है।
हालांकि उन्होंने किसी विभाग, अधिकारी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया और न ही अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक किया।
नई सरकार के सामने बढ़ सकती है चुनौती
वेम्बू के आरोप ऐसे समय आए हैं जब मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार तमिलनाडु में बड़े निवेश आकर्षित करने और रोजगार बढ़ाने के लिए कई कंपनियों के साथ समझौते करने की दिशा में काम कर रही है।
यदि ऐसे आरोपों पर समय रहते स्पष्टता नहीं आती, तो इससे राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ सकते हैं। खासकर सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच भरोसे पर इसका असर पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर में भी उठ सकते हैं सवाल
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य के प्रमुख उद्योगपति द्वारा सार्वजनिक रूप से भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगाए जाने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।
- निवेशकों के बीच प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की छवि पर असर पड़ सकता है।
- नई भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग और तेज हो सकती है।
- सरकार पर जांच और सुधारात्मक कदम उठाने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और यदि कोई जांच होती है तो उसके निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक होगा।
पहले भी उठा चुके हैं भ्रष्टाचार का मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब श्रीधर वेम्बू ने सार्वजनिक रूप से शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी की हो। इससे पहले भी वे शिक्षा, ग्रामीण विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों पर अपनी राय सोशल मीडिया के माध्यम से रखते रहे हैं।
इस बार उनके आरोप सीधे सरकारी शिक्षक भर्ती से जुड़े होने के कारण यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।


