नई दिल्ली। सोने की कीमतों में हालिया गिरावट का असर अब सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय परिवार बड़ी संख्या में घरों में रखा पुराना सोना बेचकर नकदी जुटा रहे हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में पुराने सोने की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 43 प्रतिशत बढ़ गई है।
इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, इस तिमाही में करीब 50 टन पुराने सोने की बिक्री हुई। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट और आगे भी कीमतें कम होने की आशंका मानी जा रही है।
जून में ही ₹15,000 तक सस्ता हुआ सोना
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स पर जून के दौरान सोना लगभग ₹15,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में करीब ₹45,000 प्रति किलो की गिरावट आई है।
साल की शुरुआत में सोना लगभग ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन अब इसकी कीमत करीब ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रही है। बाजार के कुछ जानकारों का मानना है कि यदि गिरावट जारी रही तो कीमतें ₹1.20 लाख प्रति 10 ग्राम तक भी आ सकती हैं।
क्यों बेच रहे हैं लोग पुराना सोना?
पहले लोग पुराने गहनों को बदलकर नए गहने खरीदते थे, लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है। ऊंचे भाव मिलने के बाद लोग पुराने गहनों को सीधे बेचकर नकद राशि लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के अनुसार, भारतीय ग्राहक सोने की ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर कैश लेना चाहते हैं। उन्हें यह भी डर है कि यदि कीमतें आगे और गिर गईं तो उन्हें कम दाम मिलेंगे। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग अभी अपने पुराने गहने बेच रहे हैं।
सोना अब सिर्फ गहना नहीं, निवेश भी
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ग्राहकों की सोच तेजी से बदल रही है। अब सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि फाइनेंशियल एसेट के रूप में देखा जा रहा है।
जब बाजार में अच्छा भाव मिलता है तो लोग उसे नकदी में बदलने से पीछे नहीं हटते। इससे रिफाइनर्स और जूलर्स को लगातार रीसाइक्लिंग के लिए पर्याप्त सोना मिल रहा है और पूरे गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूती मिल रही है।
गोल्ड खरीदने वाली कंपनियों का कारोबार भी बढ़ा
पुराना सोना खरीदने वाली कंपनियों को भी इस ट्रेंड का बड़ा फायदा मिल रहा है।
मुथूट एक्सिम ने बताया कि उसके देशभर में मौजूद 100 से अधिक गोल्ड पॉइंट्स पर पुराने सोने की खरीद का वॉल्यूम लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गया है।
कंपनी के सीईओ केयूर शाह के मुताबिक, अब ग्राहक पारदर्शी और संगठित प्लेटफॉर्म के जरिए सोना बेचने में पहले की तुलना में ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। इससे उन्हें उचित कीमत भी मिल रही है और सोना दोबारा उपयोग में भी आ रहा है।
कैसे होता है पुराने सोने का दोबारा इस्तेमाल?
कंपनियां ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे रिफाइन करती हैं और 24 कैरेट शुद्ध सोने में बदल देती हैं। इसके बाद यही सोना जूलरी निर्माताओं और सिक्का बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई किया जाता है।
इस प्रक्रिया से नई खदानों पर निर्भरता कम होती है और देश में उपलब्ध सोने का बेहतर उपयोग हो पाता है।
भारत अभी भी आयात पर है निर्भर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है, लेकिन अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने लगभग 72.4 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया। वहीं, अनुमानित 125 से 150 टन सोना रीसाइक्लिंग के जरिए बाजार में वापस आया।
इंडस्ट्री का अनुमान है कि यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहता है तो वर्ष 2026 में गोल्ड रीसाइक्लिंग बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकती है।
भारतीय घरों में कितना सोना है?
अनुमानों के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास लगभग 30,000 टन सोना मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सोने का बड़ा हिस्सा संगठित रीसाइक्लिंग चैनल में आता है तो इससे देश की आयात निर्भरता कम होगी और घरेलू गोल्ड इंडस्ट्री को बड़ा सहारा मिलेगा।
इसी दिशा में Augmont भी तेजी से अपने Gold For All नेटवर्क का विस्तार कर रही है। कंपनी ने कई राज्यों में 114 सेंटर स्थापित किए हैं। कंपनी के डायरेक्टर केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में घरों में सबसे ज्यादा सोना भारत में है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ा रहता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अगर आपके पास पुराने गहने हैं तो केवल कीमत गिरने की आशंका के आधार पर जल्दबाजी में फैसला लेना उचित नहीं होगा। सोना लंबे समय का निवेश माना जाता है। यदि तत्काल नकदी की जरूरत नहीं है तो बाजार की चाल, वैश्विक आर्थिक हालात और विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना बेहतर रहेगा। वहीं, यदि पुराने या टूटे हुए गहने उपयोग में नहीं हैं, तो संगठित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें बेचकर बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।


