मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में लगातार दो सप्ताह की बड़ी उठापटक के बाद एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इस दौरान देश की Foreign Currency Assets (FCA) में तीन अरब डॉलर से अधिक की गिरावट आई, लेकिन सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण रिजर्व बैंक (RBI) के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू बढ़ गई। इसी वजह से कुल विदेशी मुद्रा भंडार में 963 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई।
विदेशी मुद्रा भंडार में फिर आई बढ़त
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 963 मिलियन डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे एक सप्ताह पहले विदेशी मुद्रा भंडार में 9.985 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
हालांकि यह आंकड़ा अब भी 27 फरवरी 2026 को बने 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता का संकेत देती है।
FCA में 3 अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट
RBI के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षा सप्ताह के दौरान देश की Foreign Currency Assets (FCA) में 3.072 अरब डॉलर की कमी आई और यह घटकर 541.217 अरब डॉलर रह गई। इससे पिछले सप्ताह FCA में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी।
FCA विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का असर भी FCA के मूल्य पर पड़ता है।
सोने की कीमतों ने बचाई विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति
इस सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह गोल्ड रिजर्व रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी आने से RBI के पास मौजूद सोने के भंडार की वैल्यू 4.110 अरब डॉलर बढ़कर 107.930 अरब डॉलर हो गई।
इससे पहले वाले सप्ताह में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 10.754 अरब डॉलर घट गई थी।
RBI के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास 880.52 टन सोने का भंडार है। वर्तमान में सोने की हिस्सेदारी देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7% है। इसलिए सोने की कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे विदेशी मुद्रा भंडार के कुल मूल्य को प्रभावित करता है।
SDR में भी मामूली गिरावट
रिजर्व बैंक के अनुसार, समीक्षा सप्ताह में भारत के Special Drawing Rights (SDR) में 52 मिलियन डॉलर की कमी आई और यह घटकर 18.647 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले भी SDR में 66 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।
SDR अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा सदस्य देशों को आवंटित एक अंतरराष्ट्रीय रिजर्व संपत्ति है, जिसका उपयोग वैश्विक भुगतान संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है।
IMF के पास रखे रिजर्व में भी कमी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षा सप्ताह के दौरान IMF के पास रखे भारत के रिजर्व में भी 22 मिलियन डॉलर की कमी आई। इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें 11 मिलियन डॉलर की गिरावट हुई थी।
वर्तमान में IMF के पास भारत का रिजर्व 4.793 अरब डॉलर है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों होता है महत्वपूर्ण?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग कई अहम उद्देश्यों के लिए किया जाता है—
- आयात बिल का भुगतान करने में
- रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में
- वैश्विक आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच के रूप में
- विदेशी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में
- बाहरी कर्ज के भुगतान की क्षमता मजबूत करने में
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में शामिल है और यह देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को मजबूत आधार प्रदान करता है।
निष्कर्ष
हालांकि समीक्षा सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सोने की कीमतों में तेज उछाल ने इस नुकसान की भरपाई कर दी। नतीजतन भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ने में सफल रहा। आने वाले सप्ताहों में डॉलर इंडेक्स, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीद और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


