नई दिल्ली। अभिनेता से नेता बने और अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीतिक सफर में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद विजय अब अपने चुनावी वादों को जमीन पर उतारने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने राज्य में निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
तमिलनाडु सरकार के शुरुआती फैसलों में शामिल चार बड़े औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट राज्य की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकते हैं। इन परियोजनाओं में कुल ₹1,01,632 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे 93,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। विजय सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है और ये परियोजनाएं उसी दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही हैं।
L&T के साथ ₹18,600 करोड़ की मेगा डील
मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु सरकार ने इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ ₹18,600 करोड़ के निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निवेश से राज्य में 8,200 से अधिक स्थानीय रोजगार पैदा होने की संभावना है।
इस डील के तहत तीन प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं—
- कांचीपुरम में ₹15,000 करोड़ का हाइपरस्केल और एज AI डेटा सेंटर।
- कोयंबटूर में ₹2,500 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मैन्युफैक्चरिंग प्लांट।
- तिरुवल्लुर के कट्टुपल्ली परिसर में ₹1,100 करोड़ की लागत से शिपबिल्डिंग और ऑफशोर विंड एनर्जी विस्तार परियोजना।
सरकार का मानना है कि ये प्रोजेक्ट तमिलनाडु को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई पहचान देंगे।
HD हुंडई बनाएगी विशाल शिपबिल्डिंग हब
दक्षिण कोरिया की कंपनी HD Hyundai (HD KSOE) ने तमिलनाडु में एक बड़े समुद्री उद्योग केंद्र के विकास में रुचि दिखाई है। कंपनी और राज्य सरकार के बीच हुई चर्चाओं के बाद थूथुकुडी में लगभग ₹38,000 करोड़ की लागत से मेगा शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई गई है।
नई तमिलनाडु शिपबिल्डिंग पॉलिसी 2026 के तहत इस परियोजना से करीब 15,000 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। यह प्रोजेक्ट दक्षिण भारत को वैश्विक समुद्री उद्योग के नक्शे पर और मजबूत बनाने में मदद करेगा।
बिजली और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़ा निवेश
औद्योगिक विकास के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विजय सरकार ने बिजली क्षेत्र की 231 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल ₹15,032 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत पांच विशेष नवीकरणीय ऊर्जा जोन स्थापित करने का फैसला किया है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली में विकसित होने वाले इन केंद्रों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस पूरे ग्रीन एनर्जी अभियान से लगभग 15,058 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
दो नए कमर्शियल शिपयार्ड पर ₹30,000 करोड़ निवेश
तमिलनाडु में दो ग्रीनफील्ड कमर्शियल शिपयार्ड स्थापित करने की योजना भी राज्य के औद्योगिक विस्तार का बड़ा हिस्सा है। इन परियोजनाओं में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भागीदारी होगी।
हालांकि इन निवेश समझौतों की प्रक्रिया पिछली सरकार के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन विजय सरकार ने इन्हें आगे बढ़ाने और तेजी से लागू करने के संकेत दिए हैं।
करीब ₹30,000 करोड़ के निवेश वाले इन प्रोजेक्ट्स से 55,000 तक नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे तमिलनाडु का समुद्री और निर्यात क्षेत्र भी मजबूत होगा।
निवेशकों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम
औद्योगिक निवेश को तेज करने के लिए विजय सरकार ने तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य निवेशकों को सरकारी मंजूरियां जल्दी उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत—
- ₹200 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता मिलेगी।
- 5,000 से ज्यादा स्थानीय रोजगार देने वाली कंपनियों को फास्ट-ट्रैक मंजूरी दी जाएगी।
- सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए विभिन्न विभागों की स्वीकृतियां कम समय में उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का दावा है कि इससे लालफीताशाही कम होगी और विदेशी व घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्टर
L&T, HD Hyundai, ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और नए शिपयार्ड जैसे प्रोजेक्ट्स को मिलाकर कुल निवेश ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक पहुंचता है। इन योजनाओं से 93 हजार से ज्यादा रोजगार मिलने का अनुमान है, जो तमिलनाडु के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति दे सकता है।
मुख्यमंत्री थलपति विजय के लिए ये परियोजनाएं केवल निवेश आकर्षित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि चुनाव के दौरान किए गए रोजगार और विकास के वादों को पूरा करने की दिशा में सबसे बड़ी परीक्षा भी हैं।


