नई दिल्ली: आज के दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक भुगतान का साधन नहीं बल्कि कई लोगों की वित्तीय जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग, रेस्टोरेंट बिल या रोजमर्रा की खरीदारी—हर जगह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। आकर्षक रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक ऑफर्स और ईएमआई जैसी सुविधाएं इसे और भी लोकप्रिय बनाती हैं।
लेकिन इन सुविधाओं के पीछे कुछ ऐसे शुल्क और चार्ज भी छिपे होते हैं, जिन पर अधिकांश कार्डधारकों का ध्यान नहीं जाता। यही वजह है कि कई बार लोग बिना समझे हुए अतिरिक्त भुगतान कर बैठते हैं और धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। यदि आप भी क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं तो इन चार्जेस को समझना बेहद जरूरी है।
सबसे महंगा पड़ता है ब्याज का बोझ
क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा खर्च ब्याज दर होती है। अधिकांश लोग यह सोचकर केवल “मिनिमम ड्यू” जमा कर देते हैं कि उनका भुगतान समय पर हो गया है। लेकिन वास्तव में ऐसा करने पर बाकी बकाया राशि पर भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है।
भारत में कई बैंक और कार्ड कंपनियां सालाना 30% से 48% तक की प्रभावी ब्याज दर वसूलती हैं। यदि आप लगातार केवल न्यूनतम भुगतान करते हैं तो छोटी सी खरीदारी भी कुछ महीनों में बड़ी देनदारी में बदल सकती है।
लेट पेमेंट फीस बढ़ाती है बोझ
यदि आप निर्धारित तारीख तक बिल का भुगतान नहीं करते हैं तो बैंक लेट पेमेंट फीस वसूलता है। यह शुल्क कार्ड और बकाया राशि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसके ऊपर GST भी लगाया जाता है।
एक बार लेट पेमेंट होने पर न केवल अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित हो सकता है। खराब क्रेडिट स्कोर भविष्य में लोन और अन्य वित्तीय सुविधाओं को महंगा बना सकता है।
कैश एडवांस सुविधा क्यों है सबसे महंगी?
कई लोग जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड से एटीएम के जरिए नकदी निकाल लेते हैं। हालांकि यह सुविधा बेहद महंगी साबित हो सकती है।
कैश एडवांस पर:
- अलग से प्रोसेसिंग फीस लगती है।
- निकासी के दिन से ही ब्याज शुरू हो जाता है।
- इसमें सामान्य क्रेडिट पीरियड का लाभ नहीं मिलता।
यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ क्रेडिट कार्ड से नकद निकासी को अंतिम विकल्प मानते हैं।
विदेशी ट्रांजैक्शन पर भी लगता है शुल्क
यदि आप विदेश यात्रा कर रहे हैं या किसी विदेशी वेबसाइट पर भुगतान कर रहे हैं तो आपको विदेशी मुद्रा मार्कअप शुल्क देना पड़ सकता है। यह आमतौर पर 1.5% से 3.5% तक होता है।
छोटी राशि के भुगतान में यह चार्ज ज्यादा महसूस नहीं होता, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन में यह काफी महंगा साबित हो सकता है।
ओवर-लिमिट चार्ज भी बढ़ा सकता है बिल
हर क्रेडिट कार्ड की एक निश्चित लिमिट होती है। यदि आप उस सीमा से अधिक खर्च कर देते हैं तो बैंक ओवर-लिमिट चार्ज लगा सकता है।
हालांकि कुछ बैंक ग्राहकों को अतिरिक्त खर्च की अनुमति नहीं देते, लेकिन जहां यह सुविधा उपलब्ध होती है वहां अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
सालाना फीस भी समझना जरूरी
कई प्रीमियम और रिवॉर्ड आधारित क्रेडिट कार्ड वार्षिक शुल्क लेते हैं। कुछ कार्ड पहले वर्ष मुफ्त होते हैं लेकिन बाद में फीस लागू हो जाती है।
कई ग्राहक कार्ड लेते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते और बाद में सालाना शुल्क देखकर हैरान हो जाते हैं। इसलिए कार्ड लेने से पहले फीस संरचना को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
छोटे-छोटे चार्ज बन जाते हैं बड़ा खर्च
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड के छिपे हुए चार्ज इसलिए खतरनाक होते हैं क्योंकि ये धीरे-धीरे जुड़ते हैं। ब्याज, लेट फीस, टैक्स, विदेशी ट्रांजैक्शन शुल्क और अन्य चार्ज मिलकर कुछ ही महीनों में बड़ी रकम बना सकते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
क्रेडिट कार्ड का सुरक्षित और समझदारी से उपयोग करने के लिए कुछ नियम हमेशा याद रखें:
- हर महीने पूरा बिल चुकाने की कोशिश करें।
- केवल मिनिमम ड्यू भरने की आदत से बचें।
- बिल की ड्यू डेट कभी न चूकें।
- कैश एडवांस सुविधा का उपयोग न करें।
- विदेश में भुगतान से पहले शुल्क की जानकारी लें।
- कार्ड की शर्तें और नियम ध्यान से पढ़ें।
- अपने खर्च को कार्ड लिमिट के अंदर रखें।
क्रेडिट कार्ड सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह एक बेहतरीन वित्तीय साधन साबित हो सकता है। लेकिन यदि इसके छिपे हुए शुल्कों को नजरअंदाज किया जाए तो यही सुविधा धीरे-धीरे महंगे कर्ज में बदल सकती है। इसलिए हर कार्डधारक को अपने कार्ड से जुड़े सभी शुल्कों और नियमों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए।


