नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने दुनिया के कई देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए नए कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। इसी बीच चीन ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा LNG (Liquefied Natural Gas) कैरियर पोत तैयार कर रहा है, जिसकी क्षमता मौजूदा LNG जहाजों की तुलना में करीब 57 फीसदी अधिक होगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह नया जहाज QC-Max श्रेणी का होगा और इसे चीन के शिपबिल्डिंग उद्योग की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इस परियोजना के जरिए चीन न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना चाहता है, बल्कि वैश्विक LNG परिवहन बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी मजबूत करना चाहता है।
कितना बड़ा होगा नया LNG कैरियर?
चीन द्वारा बनाए जा रहे इस विशाल LNG वाहक पोत की लंबाई लगभग 344 मीटर (1,129 फीट) होगी। इसकी चौड़ाई 53.6 मीटर और गहराई करीब 12 मीटर बताई जा रही है।
सबसे खास बात इसकी स्टोरेज क्षमता है। यह जहाज एक बार में 2.71 लाख क्यूबिक मीटर LNG ढो सकेगा। तुलना करें तो वर्तमान में दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले LNG कैरियर जहाजों की क्षमता आमतौर पर 1.70 लाख से 1.80 लाख क्यूबिक मीटर के बीच होती है। आधुनिक LNG गैस कैरियर की औसत क्षमता करीब 1.74 लाख क्यूबिक मीटर मानी जाती है।
इस हिसाब से चीन का यह नया जहाज मौजूदा जहाजों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत अधिक LNG लेकर यात्रा कर सकेगा।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा लैस
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस जहाज में NO96 Super+ Membrane Containment System लगाया जाएगा। यह तकनीक LNG को बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखने में मदद करती है।
इस सिस्टम के फायदे:
- गैस के रिसाव की संभावना कम होगी।
- LNG स्टोरेज अधिक सुरक्षित होगा।
- ऊर्जा हानि (Boil-off Gas Loss) में कमी आएगी।
- लंबी दूरी की समुद्री यात्रा के दौरान ईंधन दक्षता बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक LNG परिवहन को पहले से अधिक सुरक्षित और किफायती बनाएगी।
वैश्विक LNG बाजार में बढ़ रही चीन की हिस्सेदारी
LNG जहाज निर्माण के क्षेत्र में लंबे समय तक दक्षिण कोरिया और कुछ पश्चिमी देशों की कंपनियों का दबदबा रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार वैश्विक LNG वाहक जहाज निर्माण बाजार में चीन की हिस्सेदारी अब 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। नए QC-Max जहाज के निर्माण से चीन इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन दक्षिण कोरिया के प्रभुत्व को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकता है।
चीन के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
हाल के वर्षों में दुनिया ने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े कई संकट देखे हैं। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
चीन दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है। ऐसे में एक बार में अधिक मात्रा में LNG आयात करने की क्षमता उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
इस जहाज के जरिए:
- LNG परिवहन की लागत कम होगी।
- कम यात्राओं में ज्यादा गैस लाई जा सकेगी।
- चीन के घरेलू गैस भंडार मजबूत होंगे।
- ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने का जोखिम कम होगा।
- दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
वैश्विक गैस सप्लाई चेन को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े LNG वाहक जहाज के संचालन से वैश्विक गैस आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक प्रभावी बन सकती है। बड़ी मात्रा में LNG एक साथ पहुंचने से परिवहन लागत घटेगी और कई देशों को गैस की आपूर्ति अधिक स्थिर तरीके से मिल सकेगी।
यह परियोजना केवल चीन की ऊर्जा रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक LNG व्यापार के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।
कब तक होगा तैयार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विशाल LNG कैरियर को 2028 से 2030 के बीच डिलीवर किए जाने की संभावना है। इसके संचालन में आने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG वाहक पोत बन जाएगा और समुद्री ऊर्जा परिवहन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।


