ITR Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग शुरू हो चुकी है। इस बार ITR फॉर्म में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर सैलरीड टैक्सपेयर्स, निवेशकों, मकान मालिकों और विदेशी संपत्ति या आय रखने वाले लोगों पर पड़ेगा।
ITR फॉर्म में इस साल क्या-क्या बदला?
इस साल टैक्सपेयर्स को अपनी आय, निवेश, कैपिटल गेन, हाउस प्रॉपर्टी और विदेशी संपत्ति से जुड़ी जानकारी पहले से ज्यादा साफ तरीके से देनी होगी। सरकार का मकसद फाइलिंग को पारदर्शी बनाना और गलत जानकारी की संभावना को कम करना है।
सबसे अहम बदलाव ITR-1 से जुड़ा है। अब योग्य टैक्सपेयर ITR-1 में दो हाउस प्रॉपर्टी तक की जानकारी दे सकेंगे। पहले यह सीमा एक हाउस प्रॉपर्टी तक थी। इससे उन सैलरीड लोगों को राहत मिलेगी जिनके पास एक से ज्यादा मकान हैं, लेकिन उनकी आय और बाकी शर्तें ITR-1 के दायरे में आती हैं।
इस बार फॉर्म में सेकेंडरी एड्रेस की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे वे लोग अपना दूसरा पता भी दर्ज कर सकेंगे जो नौकरी, कारोबार या पढ़ाई की वजह से दूसरे शहर में रहते हैं। यह बदलाव कम्युनिकेशन और वेरिफिकेशन को आसान बना सकता है।
कैपिटल गेन रिपोर्टिंग को भी अधिक व्यवस्थित किया गया है। शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या अन्य एसेट बेचने से हुए मुनाफे या नुकसान की जानकारी अब सही कैटेगरी में भरना जरूरी होगा। निवेशकों को AIS, Form 26AS और ब्रोकर स्टेटमेंट से डेटा मिलाकर ही रिटर्न जमा करना चाहिए।
विदेशी संपत्ति और विदेशी आय की जानकारी को लेकर भी सख्ती बढ़ी है। अगर किसी टैक्सपेयर के पास विदेश में बैंक अकाउंट, निवेश, शेयर, संपत्ति या किसी भी तरह की आय है, तो उसे ITR में सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है। जानकारी छिपाने पर नोटिस या पेनल्टी का जोखिम बढ़ सकता है।
सही ITR फॉर्म चुनना भी पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4 से लेकर ITR-7 तक अलग-अलग फॉर्म अलग-अलग टैक्सपेयर्स के लिए होते हैं। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है।
नॉन-ऑडिट केस वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। समय पर रिटर्न नहीं भरने पर लेट फीस, ब्याज और रिफंड में देरी जैसी परेशानी हो सकती है।
ITR जमा करने से पहले टैक्सपेयर्स को Form 16, AIS, TIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट, होम लोन सर्टिफिकेट, कैपिटल गेन स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े दस्तावेज जरूर मिलाने चाहिए। छोटी गलती भी बाद में नोटिस की वजह बन सकती है।
कुल मिलाकर, ITR फॉर्म में हुए ये बदलाव टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। टैक्सपेयर्स को सलाह है कि रिटर्न जल्दबाजी में न भरें और हर जानकारी को चेक करने के बाद ही सबमिट करें।


