नई दिल्ली। सरकारी बीमा कंपनी General Insurance Corporation of India (GIC) में निवेश का अवसर सामने आया है। केंद्र सरकार ने कंपनी में अपनी 5% तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जाएगी। OFS बुधवार, 17 जून 2026 को रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा, जबकि गैर-रिटेल निवेशकों के लिए यह एक दिन पहले यानी 16 जून को उपलब्ध होगा।
सरकार का यह कदम न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियमों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा समय में सरकार के पास GIC में 82.4% हिस्सेदारी है।
OFS की मुख्य बातें
सरकार द्वारा जारी OFS में कुल 5% तक हिस्सेदारी बिक्री का प्रावधान रखा गया है।
- बेस ऑफर: 2% इक्विटी हिस्सेदारी
- ग्रीन-शू ऑप्शन: अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी
- फ्लोर प्राइस: ₹352 प्रति शेयर
- नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुला: 16 जून 2026
- रिटेल निवेशकों के लिए खुला: 17 जून 2026
फ्लोर प्राइस ₹352 प्रति शेयर तय किया गया है, जो कंपनी के पिछले बंद भाव की तुलना में करीब 9.1% कम है। ऐसे में निवेशकों को डिस्काउंट पर शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है।
सरकार क्यों बेच रही हिस्सेदारी?
Offer for Sale of equity in General Insurance Corporation of India (GIC) opens tomorrow for non-retail investors. Retail investors can bid on 17.06.2026. Government offers to disinvest 2.0% equity in the GIC with an additional 3.0% as green-shoe option. pic.twitter.com/xTMXjAUm3k
— Secretary, DIPAM (@SecyDIPAM) June 15, 2026 भारत सरकार लंबे समय से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर बाजार नियामक के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का पालन करने की प्रक्रिया में जुटी है।
सरकार ने सितंबर 2024 में भी GIC की लगभग 3.4% हिस्सेदारी OFS के माध्यम से बेची थी। अब यह नया OFS उसी रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार चरणबद्ध तरीके से कंपनी में करीब 10% हिस्सेदारी कम करने की योजना पर काम कर रही है।
GIC को मिला था टैक्स नोटिस
इस साल अप्रैल में GIC ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया था कि उसे आयकर विभाग की असेसमेंट यूनिट से असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए ₹350.47 करोड़ की टैक्स डिमांड का नोटिस मिला है।
यह नोटिस आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 156 के तहत जारी किया गया था और इसमें धारा 143(3) के अंतर्गत किए गए आकलन का उल्लेख किया गया था। कंपनी ने कहा था कि वह आदेश का अध्ययन कर उचित कानूनी कदम उठाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
OFS में फ्लोर प्राइस बाजार भाव से कम रखा गया है, जिससे रिटेल निवेशकों को आकर्षक एंट्री का अवसर मिल सकता है। हालांकि निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, बीमा क्षेत्र की स्थिति और बाजार जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।
मुख्य तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कंपनी | GIC Re |
| OFS आकार | 5% तक |
| बेस ऑफर | 2% |
| अतिरिक्त ऑफर | 3% (ग्रीन-शू ऑप्शन) |
| फ्लोर प्राइस | ₹352 प्रति शेयर |
| नॉन-रिटेल बोली | 16 जून 2026 |
| रिटेल बोली | 17 जून 2026 |
| सरकारी हिस्सेदारी (31 मार्च 2026) | 82.4% |
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और कंपनी द्वारा जारी सूचनाओं पर आधारित है। शेयर बाजार और OFS में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। NewsJagran निवेश संबंधी किसी लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।


