हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इन समझौतों का सबसे बड़ा फायदा अब भारतीय फर्नीचर उद्योग को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में छूट, आसान बाजार पहुंच और बढ़ती वैश्विक मांग के कारण भारतीय फर्नीचर निर्माता अब दुबई, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।
नई दिल्ली। भारत का फर्नीचर उद्योग तेजी से वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है। सरकार की निर्यात बढ़ाने की रणनीति और विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों ने भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोल दिए हैं। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का फर्नीचर निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
भारत ने मारीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए समूह और ओमान के साथ एफटीए लागू किए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जबकि यूरोपीय संघ के साथ वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इससे भारतीय उत्पादों को कई देशों में कम या शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलेगा।
भारतीय फर्नीचर उद्योग को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार एफटीए के बाद भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना आसान हो जाएगा। अभी कई देशों में भारतीय फर्नीचर पर आयात शुल्क लगने के कारण कीमतें बढ़ जाती थीं, जिससे चीन, वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों को बढ़त मिलती थी। शुल्क कम होने से भारतीय उत्पाद कीमत और गुणवत्ता दोनों के आधार पर बेहतर स्थिति में आ सकते हैं।
गुजरात स्थित निप्पोनप्लाई इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक केतन ठक्कर ने कहा कि भारतीय कंपनियां पहले से ही निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय फर्नीचर वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
दुबई और ओमान क्यों बन सकते हैं बड़े बाजार?
संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में रियल एस्टेट, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फर्नीचर की जरूरत होती है। भारतीय कंपनियां अपनी भौगोलिक निकटता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण इन बाजारों में मजबूत पकड़ बना सकती हैं।
दुबई लंबे समय से पश्चिम एशिया का व्यापारिक केंद्र रहा है। यहां से अन्य खाड़ी देशों तक भी भारतीय उत्पाद आसानी से पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जीसीसी देशों से भारतीय फर्नीचर की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में भी बढ़ेगी पहुंच
ऑस्ट्रेलिया के साथ लागू एफटीए भारतीय उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में लकड़ी आधारित और प्रीमियम फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं यूरोपीय संघ के साथ संभावित समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को जर्मनी, फ्रांस, इटली और नीदरलैंड जैसे बड़े बाजारों में प्रवेश आसान हो सकता है।
यूरोप में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारतीय निर्माता यदि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानकों का पालन करते हैं तो उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है।
रोजगार और निवेश में भी होगी वृद्धि
एफटीए का फायदा केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। इससे नए कारखानों की स्थापना, मशीनरी में निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
फर्नीचर उद्योग श्रम-प्रधान क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्यात में वृद्धि से हजारों नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
चीन के विकल्प के रूप में उभर सकता है भारत
वैश्विक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों से चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रही हैं। सप्लाई चेन विविधीकरण की इस प्रक्रिया का फायदा भारत को मिल सकता है। मजबूत विनिर्माण आधार, कुशल श्रमिक और सरकार की उत्पादन प्रोत्साहन नीतियां भारत को एक वैकल्पिक आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती हैं।
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के उपकुलपति राकेश मोहन जोशी ने कहा कि एफटीए ने भारतीय फर्नीचर उद्योग के लिए विशाल अवसर पैदा किए हैं। अब उद्योग की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्ता, डिजाइन और समय पर डिलीवरी के जरिए इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठाए।
आगे क्या देखना होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एफटीए पर्याप्त नहीं हैं। भारतीय कंपनियों को वैश्विक ब्रांडिंग, आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता प्रमाणन और सप्लाई चेन सुधार पर भी ध्यान देना होगा। यदि उद्योग इन क्षेत्रों में सुधार करता है तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख फर्नीचर निर्यातकों में शामिल हो सकता है।
दुबई से लेकर ओमान, ऑस्ट्रेलिया और संभावित रूप से यूरोप तक, भारतीय फर्नीचर उद्योग के सामने एक बड़ा अवसर खड़ा है। एफटीए के जरिए खुले इन नए रास्तों का लाभ उठाकर भारत वैश्विक फर्नीचर बाजार में अपनी हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।


