Highlights
- 30 जून के बाद भी जारी रह सकती है कस्टम ड्यूटी छूट
- पेट्रोकेमिकल, फार्मा और ऑटो सेक्टर को मिल सकती है राहत
- मिडिल ईस्ट संकट के असर को लेकर अगले हफ्ते होगी अहम बैठक
- सितंबर तक बढ़ सकती है 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर ड्यूटी छूट
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन पर मंडरा रहे खतरे के बीच केंद्र सरकार उद्योगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। सरकार कुछ जरूरी कच्चे माल के आयात पर दी गई कस्टम ड्यूटी छूट को 30 जून के बाद भी जारी रख सकती है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने, महंगाई पर दबाव कम करने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, अगले सप्ताह विभिन्न मंत्रालयों की एक उच्चस्तरीय समिति बैठक करेगी। इस बैठक में आयात शुल्क में राहत जारी रखने, कुछ नए औद्योगिक इनपुट्स को छूट के दायरे में लाने और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
अगले हफ्ते होगी अहम बैठक
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के असर की समीक्षा के लिए गठित अंतर-मंत्रालयी समिति अगले सप्ताह बैठक करेगी। इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) समेत कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में उन उद्योगों की मांगों पर भी विचार किया जाएगा जो आयातित कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हैं। विशेष रूप से फार्मास्युटिकल, स्टील और पेट्रोकेमिकल सेक्टर सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अप्रैल में मिली थी बड़ी राहत
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में प्लास्टिक, फार्मा और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को राहत देने के लिए करीब 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क हटा दिया था। यह फैसला उस समय लिया गया था जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने की आशंका थी।
हालांकि यह राहत 30 जून 2026 तक ही लागू है। अब उद्योग जगत की मांग है कि इस छूट को आगे भी जारी रखा जाए ताकि उत्पादन लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।
अधिकारियों के अनुसार सरकार इस छूट को सितंबर 2026 तक बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
यदि सरकार कस्टम ड्यूटी छूट की अवधि बढ़ाती है तो इसका सबसे अधिक लाभ कई महत्वपूर्ण उद्योगों को मिलेगा।
इनमें शामिल हैं:
- पेट्रोकेमिकल उद्योग
- फार्मास्युटिकल सेक्टर
- सिरेमिक उद्योग
- डायमंड पॉलिशिंग उद्योग
- पॉलिएस्टर टेक्सटाइल सेक्टर
- स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनियां
- फ्लेक्सिबल पैकेजिंग उद्योग
- ऑटो कंपोनेंट निर्माता
इन सेक्टरों की उत्पादन प्रक्रिया काफी हद तक आयातित कच्चे माल पर निर्भर करती है। ऐसे में शुल्क छूट जारी रहने से उनकी लागत नियंत्रित रह सकती है।
एजेंडे में होंगे तीन बड़े मुद्दे
सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति की बैठक में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर चर्चा होगी।
पहला, जिन उद्योगों को पहले से राहत दी जा रही है, उनकी अवधि बढ़ाने पर फैसला।
दूसरा, कुछ और औद्योगिक इनपुट्स को शुल्क राहत के दायरे में लाने की संभावना।
तीसरा, ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव जिनका निर्माण अब भारत में पर्याप्त मात्रा में होने लगा है।
सरकार का मानना है कि जहां जरूरी हो वहां राहत दी जाए, लेकिन जिन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन मजबूत हो चुका है वहां आयात पर निर्भरता कम की जाए।
इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर भी रहेगी नजर
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने लगभग 116.2 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक सामान और कंपोनेंट्स का आयात किया था। यह आंकड़ा सोने के आयात से भी अधिक रहा।
यही कारण है कि सरकार कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा।
इस कदम का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देना है।
मिडिल ईस्ट संकट क्यों बना चिंता का कारण?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और कई औद्योगिक कच्चे माल के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संघर्ष का असर सीधे कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और औद्योगिक इनपुट्स की कीमतों पर पड़ता है।
यदि तनाव और बढ़ता है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और आयात लागत में तेज उछाल आ सकता है। ऐसे में सरकार उद्योगों को राहत देकर आर्थिक गतिविधियों को स्थिर बनाए रखना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कस्टम ड्यूटी छूट को बढ़ाने का फैसला उद्योगों को संभावित वैश्विक झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी मिली राहत
सरकार ने हाल ही में परमाणु ऊर्जा उत्पादन से जुड़े आयातित उपकरणों और सामान पर कस्टम ड्यूटी माफ करने का फैसला भी किया है। यह छूट 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 के बीच किए गए आयात पर लागू होगी।
इस फैसले से परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की लागत कम होने की उम्मीद है। साथ ही ऑपरेटरों और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को भी वित्तीय राहत मिलेगी।
आगे क्या?
अगले सप्ताह होने वाली बैठक उद्योग जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सरकार 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर ड्यूटी छूट को सितंबर तक बढ़ा देती है तो कई उद्योगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार उद्योगों की लागत कम रखने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए किस दिशा में आगे बढ़ रही है।


