Highlights
- 61 दिनों की समुद्री मछली पकड़ने पर लगी रोक समाप्त
- तमिलनाडु के लाखों मछुआरे फिर से समुद्र में उतरने को तैयार
- राज्य से हर साल 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का सी-फूड निर्यात
- कर्ज के बोझ से जूझ रही सरकार को मिल सकती है आर्थिक राहत
- मछली व्यापार, प्रोसेसिंग और निर्यात क्षेत्र में फिर आएगी तेजी
नई दिल्ली: तमिलनाडु के लाखों मछुआरों और राज्य की नई सरकार के लिए बड़ी राहत की खबर है। समुद्री मछलियों के प्रजनन काल के दौरान लगाया गया 61 दिनों का वार्षिक प्रतिबंध अब समाप्त हो गया है। इसके साथ ही राज्य में मत्स्य कारोबार एक बार फिर पूरी रफ्तार से शुरू होने जा रहा है। इस फैसले से न केवल मछुआरों की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलने वाला है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) के नेतृत्व वाली सरकार ऐसे समय में यह राहत देख रही है जब राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। तमिलनाडु के 2026-27 के अंतरिम बजट के अनुसार राज्य का कुल बकाया ऋण 10.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में हजारों करोड़ रुपये के मत्स्य कारोबार का दोबारा शुरू होना सरकार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
समुद्री बंदी समाप्त होने के बाद मछुआरे अपनी नावों और जालों के साथ फिर से समुद्र में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। कई तटीय इलाकों में रविवार को उत्सव जैसा माहौल देखा गया, जहां मछुआरे और उनके परिवार लंबे इंतजार के बाद नए सीजन का स्वागत कर रहे हैं।
क्यों लगाया जाता है 61 दिनों का प्रतिबंध?
केंद्र सरकार और विभिन्न तटीय राज्यों द्वारा हर वर्ष अप्रैल से जून के बीच समुद्र में यांत्रिक नौकाओं के जरिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री जीवों के प्रजनन काल के दौरान उन्हें संरक्षण देना होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रजनन काल के दौरान बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने की अनुमति दी जाए तो समुद्री संसाधनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि देश के समुद्री तटीय क्षेत्रों में यह प्रतिबंध नियमित रूप से लागू किया जाता है।
इस अवधि के दौरान मछुआरे अपनी नावों की मरम्मत, इंजन की सर्विसिंग, जालों की तैयारी और अन्य तकनीकी कार्यों में समय लगाते हैं ताकि प्रतिबंध हटने के बाद अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके।
मत्स्य पालन में तमिलनाडु का दबदबा
तमिलनाडु देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन राज्यों में शामिल है। राज्य के पास लगभग 1,076 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा है, जो भारत की सबसे महत्वपूर्ण तटीय पट्टियों में गिनी जाती है। यह तटरेखा 13 जिलों में फैली हुई है और सैकड़ों मछुआरा गांवों की आजीविका का आधार है।
राज्य में लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य उद्योग से जुड़े हुए हैं। समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों के अलावा आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग यूनिट, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, नीलामी केंद्र और प्रोसेसिंग इकाइयां भी इस उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
तमिलनाडु का अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन भी मजबूत माना जाता है। राज्य में हर साल 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक अंतर्देशीय मछली उत्पादन होता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।
7,000 करोड़ रुपये से अधिक का सी-फूड कारोबार
तमिलनाडु का समुद्री खाद्य उद्योग केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। राज्य से हर साल लगभग 1.2 लाख मीट्रिक टन से अधिक समुद्री उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जिनकी अनुमानित कीमत 7,000 करोड़ रुपये से अधिक होती है।
राज्य के समुद्री उत्पादों की मांग अमेरिका, जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोपीय संघ के देशों में काफी अधिक है। झींगा, टूना, स्क्विड और अन्य समुद्री उत्पाद तमिलनाडु के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हैं।
वैश्विक बाजार में भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रतिबंध समाप्त होने के बाद निर्यात गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे विदेशी मुद्रा आय में भी वृद्धि हो सकती है।
तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह उद्योग?
मत्स्य उद्योग तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है। राज्य के कई तटीय जिलों की स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह समुद्री गतिविधियों पर निर्भर है।
जब समुद्री कारोबार चलता है तो केवल मछुआरों की आय ही नहीं बढ़ती बल्कि ट्रांसपोर्ट, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, निर्यात और खुदरा व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर पैदा होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री कारोबार में तेजी आने से राज्य सरकार को विभिन्न करों और शुल्कों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इससे विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मछुआरों की आय में होगा सुधार
61 दिनों की बंदी के दौरान अधिकांश मछुआरों की आय सीमित हो जाती है। हालांकि सरकार और विभिन्न एजेंसियों की ओर से कुछ सहायता योजनाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन अधिकांश परिवारों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
प्रतिबंध हटने के बाद समुद्र में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने की संभावना रहती है क्योंकि प्रजनन काल के दौरान समुद्री संसाधनों को पुनर्जीवित होने का अवसर मिलता है। इससे शुरुआती दिनों में बेहतर पकड़ मिलने की उम्मीद रहती है।
मछुआरों का मानना है कि नए सीजन की शुरुआत उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे स्थानीय बाजारों में भी मांग बढ़ सकती है।
सरकारी खजाने को मिलेगी संजीवनी
तमिलनाडु सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बढ़ता हुआ ऋण बोझ है। ऐसे में मत्स्य उद्योग का दोबारा सक्रिय होना राज्य के लिए आर्थिक राहत का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि समुद्री खाद्य उत्पादों के उत्पादन और निर्यात में तेजी आने से हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह पैदा होगा। इसका लाभ राज्य की आय, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा।
यदि वैश्विक बाजार में मांग मजबूत बनी रहती है और मौसम अनुकूल रहता है तो आने वाले महीनों में तमिलनाडु का समुद्री निर्यात पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इससे राज्य सरकार को भी अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय मजबूती मिलने की संभावना है।
आगे क्या?
61 दिनों की बंदी समाप्त होने के बाद सोमवार से तमिलनाडु के विभिन्न तटीय जिलों में समुद्री गतिविधियां पूरी तरह शुरू हो जाएंगी। मछुआरे समुद्र में उतरेंगे, मछली मंडियों में कारोबार बढ़ेगा और निर्यात कंपनियां नए ऑर्डर पूरे करने में जुट जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बनी रहती है तो यह सीजन तमिलनाडु के लिए आर्थिक दृष्टि से काफी लाभदायक साबित हो सकता है। इससे लाखों लोगों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।


