HighLights
- महंगाई के आंकड़े और US फेड का निर्णय रहेंगे सबसे अहम
- अमेरिका-ईरान समझौते से कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगा असर
- विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकाल रहे पैसा
- मानसून की प्रगति और वैश्विक संकेतक भी तय करेंगे बाजार की दिशा
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई बड़े घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों से भरा रहने वाला है। निवेशकों की नजर एक तरफ मई महीने के महंगाई आंकड़ों पर होगी तो दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर भी रहेगी। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और मानसून की प्रगति भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। बीएसई सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 प्रतिशत चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी में 256.20 अंक यानी करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है।
महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर
रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च हेड अजित मिश्रा के अनुसार घरेलू निवेशकों का फोकस मई महीने के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई आंकड़ों पर रहेगा।
महंगाई का स्तर भारतीय रिजर्व बैंक की भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है तो बाजार इसे सकारात्मक संकेत के रूप में ले सकता है। वहीं उम्मीद से ज्यादा महंगाई आने पर ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर इक्विटी बाजार पर देखने को मिल सकता है।
US फेडरल रिजर्व का फैसला क्यों है महत्वपूर्ण?
वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा घटनाक्रम अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 16-17 जून को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक होगी।
दुनिया भर के निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि फेड ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। इसके साथ ही फेड चेयरमैन की टिप्पणियां, महंगाई का आकलन, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और भविष्य में संभावित रेट कट के संकेत भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
यदि फेड नरम रुख अपनाता है तो वैश्विक बाजारों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं सख्त रुख विदेशी निवेशकों को उभरते बाजारों से पैसा निकालने के लिए प्रेरित कर सकता है।
अमेरिका-ईरान समझौता और तेल बाजार पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसके बाद रणनीतिक महत्व वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी पूरी तरह खोले जाने की संभावना जताई गई है।
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि समझौता सफल नहीं हुआ तो तनाव फिर बढ़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौता वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में तनाव कम होने से कच्चे तेल की सप्लाई बेहतर हो सकती है और तेल कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली चिंता का विषय
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक्नोलॉजी कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार बाजार अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़ी हर खबर पर बेहद संवेदनशील बना रहेगा।
इस बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक जून के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से 62,853 करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं।
साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह पूरे वर्ष 2025 की निकासी से भी काफी ज्यादा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली आगे भी जारी रह सकती है।
मानसून की प्रगति भी तय करेगी बाजार का मूड
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का कहना है कि निवेशकों की नजर इस सप्ताह मानसून की प्रगति पर भी रहेगी।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। बेहतर मानसून का असर ग्रामीण मांग, कृषि उत्पादन और उपभोक्ता खर्च पर पड़ता है। इसका फायदा एफएमसीजी, ऑटो और कृषि आधारित कंपनियों को मिल सकता है।
अगर मानसून सामान्य या बेहतर रहता है तो यह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाएगा।
तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए क्यों फायदेमंद?
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में तेल की कीमतों में कमी आने से देश का आयात बिल घट सकता है। इससे चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहने में मदद मिलती है और महंगाई पर भी दबाव कम होता है।
कम तेल कीमतों का फायदा एविएशन, पेंट, केमिकल, ऑटो और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को भी मिल सकता है।
निवेशकों को किन सेक्टर्स पर रखनी चाहिए नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार अगले सप्ताह बैंकिंग, आईटी, ऑटो और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
यदि फेड की ओर से ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं तो आईटी और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों को फायदा हो सकता है। वहीं तेल कीमतों में गिरावट जारी रहने पर ऑटो, एविएशन और पेट्रोकेमिकल सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसके अलावा मानसून से जुड़े सकारात्मक संकेत कृषि और ग्रामीण मांग आधारित कंपनियों के लिए भी अच्छे साबित हो सकते हैं।
आगे क्या रहेगा बाजार का ट्रिगर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह निवेशकों को केवल घरेलू संकेतकों पर ही नहीं बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों पर भी नजर रखनी होगी। अमेरिका-ईरान समझौते का अंतिम परिणाम, फेडरल रिजर्व की नीति, तेल कीमतों का रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की चाल तय करेंगी।
अगर वैश्विक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं और महंगाई नियंत्रण में रहती है तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम की स्थिति में अस्थिरता बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। NewsJagran निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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