PPAC Increase in Delhi: दिल्ली में बिजली बिलों पर बढ़ा हुआ पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) जुलाई से उपभोक्ताओं की जेब पर असर दिखाने लगेगा। हालांकि सरकार का कहना है कि बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन व्यापारी संगठनों और उद्योग जगत का दावा है कि इससे दिल्ली की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। उनका कहना है कि पहले से महंगी बिजली और ऊंची मजदूरी लागत के कारण कई उद्योग हरियाणा और उत्तर प्रदेश का रुख कर सकते हैं।
दिल्ली में क्यों बढ़ी चिंता?
राजधानी दिल्ली में बिजली की दरों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) द्वारा PPAC में बढ़ोतरी की मंजूरी मिलने के बाद व्यापारी संगठनों ने इसे उद्योगों के लिए चिंता का विषय बताया है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CTI) से जुड़े व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि दिल्ली में कारोबार करना पहले से ही पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगा है। ऐसे में बिजली लागत बढ़ने से छोटे और मध्यम उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव आएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली किसी भी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की प्रमुख लागतों में शामिल होती है। जब ऊर्जा लागत बढ़ती है तो उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर उत्पादों की कीमतों और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ता है।
क्या है PPAC और क्यों लगाया जाता है?
PPAC यानी Power Purchase Adjustment Cost बिजली वितरण कंपनियों को बिजली खरीदने और ईंधन पर आने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई करने का एक नियामक तंत्र है।
जब बिजली उत्पादन या खरीद की लागत बढ़ जाती है तो वितरण कंपनियां उस अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं से PPAC के रूप में वसूल सकती हैं। इसके लिए संबंधित राज्य विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी आवश्यक होती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई नया शुल्क नहीं है। देश के कई राज्यों में वर्षों से PPAC या इसी तरह के ईंधन समायोजन शुल्क लागू हैं।
दिल्ली सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में बिजली खरीद लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से PPAC में संशोधन जरूरी हो गया था।
सरकार का पक्ष क्या है?
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया है कि PPAC कोई नया टैक्स या अतिरिक्त चार्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बिजली कानूनों के तहत पहले से लागू एक नियामक व्यवस्था है।
उनके अनुसार पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ईंधन लागत में वृद्धि और बिजली खरीद की बढ़ती कीमतों के कारण वितरण कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है।
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक पिछले एक महीने के दौरान बिजली खरीद लागत में लगभग 31 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई। इसी कारण DERC ने PPAC में सीमित संशोधन की अनुमति दी है।
सरकार का दावा है कि यह फैसला बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
PPAC में कितनी बढ़ोतरी हुई?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार DERC ने औसतन लगभग 2.4 प्रतिशत की PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।
पहले PPAC की अधिकतम सीमा 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत तक किया गया है।
सरकार का कहना है कि वास्तविक प्रभाव उपभोक्ता की बिजली खपत और उसके कनेक्शन की श्रेणी पर निर्भर करेगा। हालांकि व्यापारिक संगठनों का मानना है कि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं पर इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में अधिक दिखाई देगा।
व्यापारियों ने क्यों जताई नाराजगी?
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि दिल्ली में पहले से ही कमर्शियल और इंडस्ट्रियल बिजली दरें हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक हैं। अब PPAC बढ़ने के बाद यह अंतर और बढ़ जाएगा।
व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि दिल्ली में उद्योगों को बिजली सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को विभिन्न योजनाओं के तहत राहत दी जाती है।
ऐसे में फैक्ट्री मालिकों और व्यापारियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार में बिकने वाले सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
क्या वाकई दिल्ली छोड़ सकती हैं फैक्ट्रियां?
यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है।
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रही तो कई यूनिटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य हिस्सों में शिफ्ट होने पर विचार कर सकती हैं।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही तेजी से विकसित हो रहे हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत जैसे शहर उद्योगों के लिए प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
इन क्षेत्रों में कई मामलों में भूमि लागत, बिजली दरें और संचालन खर्च अपेक्षाकृत कम पड़ सकते हैं। यही वजह है कि नई इकाइयां पहले से ही NCR के बाहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही हैं।
हालांकि उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि केवल PPAC बढ़ने से बड़े पैमाने पर उद्योगों का पलायन तुरंत नहीं होगा। लेकिन यदि लागत का दबाव लगातार बढ़ता रहा तो यह दीर्घकालिक निवेश निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
दिल्ली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर आधारित है, लेकिन यहां हजारों छोटे और मध्यम उद्योग भी संचालित होते हैं।
यदि औद्योगिक इकाइयों की लागत बढ़ती है तो इसके कई प्रभाव हो सकते हैं:
- उत्पादन लागत में वृद्धि
- उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी
- नए निवेश में कमी
- रोजगार सृजन की गति धीमी होना
- छोटे उद्योगों की लाभप्रदता पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि का सबसे अधिक असर उन उद्योगों पर पड़ता है जहां बिजली की खपत अधिक होती है, जैसे इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, पैकेजिंग, प्रिंटिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स।
जुलाई के बिलों में दिखेगा असर
नई दरें 10 जून से लागू हो चुकी हैं। इसका प्रभाव जुलाई में आने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगा।
व्यापारी और उद्योग संगठन अब यह आकलन कर रहे हैं कि वास्तविक बिलों में कितनी अतिरिक्त राशि जुड़ती है। यदि बढ़ोतरी अनुमान से अधिक दिखाई देती है तो उद्योग संगठनों द्वारा सरकार और DERC के समक्ष फिर से मामला उठाया जा सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली सरकार को उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए संतुलित नीति अपनानी होगी।
एक तरफ बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता जरूरी है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों पर अत्यधिक लागत बोझ पड़ने से निवेश और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आती है और बिजली खरीद लागत कम होती है, तो भविष्य में PPAC में राहत की संभावना भी बन सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली में PPAC बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत और सरकार के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। सरकार इसे बिजली खरीद लागत में वृद्धि से जुड़ा आवश्यक कदम बता रही है, जबकि व्यापारी संगठन इसे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा के लिए खतरा मान रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बढ़ती बिजली लागत दिल्ली के उद्योगों को NCR के अन्य राज्यों की ओर धकेलेगी या फिर सरकार और नियामक संस्थाएं उद्योगों को राहत देने के लिए कोई नया रास्ता निकालेंगी। इसका जवाब आने वाले महीनों में बिजली बिलों और निवेश के रुझानों से साफ हो सकेगा।
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