नई दिल्ली। अगर आप होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, मिठाई की दुकान या किसी भी तरह का फूड बिजनेस चलाते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाने-पीने की चीजों की पैकेजिंग में स्टेपल पिन, मेटल वायर और अन्य धातु आधारित फास्टनिंग सामग्री के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगा दी है। खाद्य नियामक का कहना है कि इस तरह की पैकिंग उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
एफएसएसएआई की ओर से जारी एडवाइजरी के मुताबिक यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा और सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों (FBOs) को इसका पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें केक, मिठाई, स्नैक्स और पैक्ड फूड में स्टेपल पिन या मेटल के छोटे टुकड़े पाए गए। कई बार पैकिंग के दौरान इस्तेमाल की गई पिन खाने के साथ उपभोक्ता के मुंह तक पहुंच जाती है।
एफएसएसएआई का मानना है कि यह सिर्फ गुणवत्ता का मामला नहीं बल्कि सीधे तौर पर उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। अगर कोई व्यक्ति गलती से स्टेपल पिन या धातु का टुकड़ा निगल ले तो इससे मुंह, गले, भोजन नली और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
यही कारण है कि खाद्य नियामक ने इस प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है।
किन उत्पादों पर लागू होगा नियम?
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश केवल किसी एक प्रकार के खाद्य उत्पाद तक सीमित नहीं है। यह लगभग सभी प्रकार की खाद्य पैकेजिंग पर लागू होगा।
इसमें शामिल हैं:
- केक और बेकरी उत्पाद
- मिठाई के डिब्बे
- स्नैक पैकेट
- टेकअवे फूड पार्सल
- ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऑर्डर
- रेस्तरां पैकिंग
- फास्ट फूड पैकेजिंग
- कैटरिंग और इवेंट फूड पैक
नियामक ने कहा है कि पैकेट को बंद करने, सील करने, जोड़ने या सुरक्षित करने के लिए किसी भी प्रकार की मेटल पिन या तार का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
होटल और रेस्टोरेंट को क्या करना होगा?
एफएसएसएआई के निर्देश के बाद होटल, रेस्तरां, बेकरी और मिठाई कारोबारियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बदलाव करना होगा।
अब उन्हें स्टेपल पिन की जगह सुरक्षित विकल्प अपनाने होंगे, जैसे:
- फूड ग्रेड टेप
- हीट सीलिंग
- एडहेसिव सील
- क्लिप लॉक पैकेजिंग
- टैम्पर-प्रूफ पैकेजिंग सिस्टम
- फूड सेफ्टी प्रमाणित सीलिंग तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पैकेजिंग तकनीक पहले से ही उपलब्ध है और अधिकांश संगठित फूड ब्रांड इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में छोटे कारोबारियों को भी धीरे-धीरे सुरक्षित पैकेजिंग अपनानी होगी।
ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
एफएसएसएआई का यह कदम सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के हित में माना जा रहा है।
इससे:
- खाने में मेटल के टुकड़े मिलने की घटनाएं कम होंगी।
- फूड डिलीवरी की सुरक्षा बढ़ेगी।
- बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम कम होगा।
- फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता मानकों को मजबूती मिलेगी।
- पैकेजिंग से जुड़ी शिकायतों में कमी आ सकती है।
खास तौर पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी के बढ़ते चलन के बीच यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?
एफएसएसएआई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्देशों की अनदेखी करने वाले फूड बिजनेस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यदि निरीक्षण के दौरान किसी प्रतिष्ठान में खाद्य पैकेजिंग के लिए स्टेपल पिन या मेटल वायर का इस्तेमाल पाया जाता है, तो संबंधित इकाई पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
भारत में फूड सेफ्टी पर बढ़ रहा फोकस
पिछले कुछ वर्षों में एफएसएसएआई खाद्य सुरक्षा को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाता रहा है। पैकेजिंग, लेबलिंग, खाद्य गुणवत्ता, मिलावट और स्वच्छता मानकों को लेकर समय-समय पर नए दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो। फूड पैकेजिंग में स्टेपल पिन पर रोक भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
एफएसएसएआई का नया निर्देश होटल, रेस्तरां, बेकरी और फूड डिलीवरी कारोबार से जुड़े लाखों व्यवसायों को प्रभावित करेगा। हालांकि पैकेजिंग प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं, लेकिन इससे ग्राहकों की सुरक्षा बेहतर होगी और खाद्य उद्योग में गुणवत्ता मानकों को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित पैकेजिंग की दिशा में यह कदम लंबे समय में उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।


