नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे समय में अमेरिका भारत के लिए लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
ऊर्जा विश्लेषण फर्म Kpler के ताजा आंकड़ों के अनुसार मई महीने में अमेरिका ने भारत को रिकॉर्ड मात्रा में LNG और LPG की आपूर्ति की। यह बदलाव केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात रणनीति और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल, LNG और LPG का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी LNG जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत और LPG का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए प्राप्त करता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री परिवहन पर संभावित खतरे के कारण ऊर्जा कंपनियों और आयातकों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। इसी का लाभ अमेरिका को मिला है।
LPG सप्लाई में अमेरिका ने बनाया नया रिकॉर्ड
Kpler के अनुसार मई 2026 में अमेरिका ने भारत को लगभग 6.30 लाख टन LPG की आपूर्ति की। यह मात्रा खाड़ी देशों से प्राप्त कुल 3.80 लाख टन LPG से करीब 60 प्रतिशत अधिक रही।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का अनुमान है कि जून के अंत तक भारत को अमेरिका से होने वाली LPG आपूर्ति 10 लाख टन के स्तर को पार कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह भारत-अमेरिका ऊर्जा व्यापार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
LPG घरेलू रसोई गैस से लेकर औद्योगिक उपयोग तक कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है। इसलिए इसकी स्थिर आपूर्ति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
LNG आयात में भी अमेरिका सबसे आगे
LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस के मामले में भी अमेरिका ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। मई महीने में अमेरिका ने भारत को करीब 9 लाख टन LNG का निर्यात किया। यह भारत की कुल LNG जरूरत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा माना जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अप्रैल की तुलना में यह मात्रा लगभग तीन गुना अधिक रही। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत ने खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए तेजी से आयात स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता हमेशा जोखिम पैदा करती है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अब पश्चिम एशिया संकट ने दुनिया को यह सबक दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बेहद जरूरी है।
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों से तेल और गैस आयात बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिका से बढ़ती LNG और LPG खरीद इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
इससे भारत को निम्नलिखित फायदे मिल सकते हैं:
- आपूर्ति बाधित होने का जोखिम कम होगा।
- ऊर्जा स्रोतों में विविधता आएगी।
- दीर्घकालिक गैस अनुबंधों में बेहतर सौदेबाजी की स्थिति बनेगी।
- घरेलू उद्योगों के लिए गैस उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
अमेरिका को कैसे मिला फायदा?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Nomura की रिपोर्ट के अनुसार भारत की गैस खरीद में आए इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ अमेरिका को हुआ है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले की तुलना में भारत को अमेरिकी गैस निर्यात लगभग आठ गुना बढ़ चुका है।
अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े शेल गैस उत्पादकों में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में उसने LNG निर्यात टर्मिनलों और गैस अवसंरचना में भारी निवेश किया है। इसी कारण वह एशियाई बाजारों में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को भी मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा व्यापार भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है कि भारत उसके साथ व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने के लिए अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदे।
ऊर्जा क्षेत्र इस दिशा में सबसे बड़ा अवसर बनकर उभरा है। LNG और LPG आयात बढ़ने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
क्या महंगी पड़ सकती है अमेरिकी गैस?
हालांकि इस बदलाव के कुछ आर्थिक पहलू भी हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों की तुलना में अमेरिका से LNG आयात अपेक्षाकृत महंगा पड़ सकता है। लंबी दूरी और शिपिंग लागत इसका प्रमुख कारण हैं।
इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में भारत के सामने विकल्प सीमित हैं। ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त लागत स्वीकार करना रणनीतिक रूप से अधिक उचित माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो अमेरिका की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। वहीं यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होती है तो खाड़ी देशों की आपूर्ति फिर से बढ़ सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमेरिका का LNG और LPG क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव इसी बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है।


