नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आयात पर बढ़ती निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने 22% से 30% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Higher Ethanol Blended Petrol) पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को समाप्त कर दिया है। इस संबंध में जारी अधिसूचना को भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों और एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को गति देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल पेट्रोलियम आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में मदद करेगा बल्कि गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, सरकार का यह कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है सरकार का यह फैसला?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में किसी भी प्रकार की तेजी का सीधा असर भारत के आयात बिल, चालू खाते के घाटे और रुपये की मजबूती पर पड़ता है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का अनुपात बढ़ाने में सफल रहता है तो आयातित तेल पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
इसी रणनीति के तहत सरकार पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम क्या है?
एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर उपयोग किया जाता है।
भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश कई राज्यों में E20 ईंधन की आपूर्ति शुरू कर चुका है।
अब सरकार की नजर भविष्य में और अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देने पर है। एक्साइज ड्यूटी हटाने का फैसला इसी दिशा में एक प्रोत्साहन माना जा रहा है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
एथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिलता है। भारत में गन्ना और मक्का उत्पादन करने वाले किसानों को एथेनॉल उद्योग से अतिरिक्त मांग मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि एथेनॉल मिश्रण का स्तर बढ़ता है तो:
- गन्ने की मांग बढ़ेगी।
- मक्का उत्पादकों को नया बाजार मिलेगा।
- चीनी मिलों की आय बढ़ेगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- कृषि आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ेगा।
सरकार भी लंबे समय से एथेनॉल को किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साधन के रूप में देखती रही है।
क्या इससे पेट्रोल की कीमतें कम होंगी?
तुरंत पेट्रोल सस्ता होने की संभावना कम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में यह कदम कीमतों को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत पर उसका सीधा असर पड़ता है। लेकिन यदि पेट्रोल में अधिक मात्रा में घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का उपयोग किया जाता है तो आयातित तेल की आवश्यकता कम हो सकती है।
इससे:
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- आयात बिल कम होगा।
- तेल कीमतों के झटकों का असर सीमित किया जा सकेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या सभी वाहन हाई एथेनॉल पेट्रोल इस्तेमाल कर पाएंगे?
यहीं पर सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है। ऑटोमोबाइल उद्योग और कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि मौजूदा वाहन बड़ी मात्रा में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
कई रिपोर्टों के अनुसार E20 तक के ईंधन के लिए अधिकांश नए वाहन तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन E25 या उससे अधिक मिश्रण वाले ईंधन के लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में विशेष बदलाव की आवश्यकता हो सकती है।
इसी वजह से सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की ओर प्रोत्साहित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या होते हैं?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन दोनों पर चल सकते हैं। इन वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है ताकि वे विभिन्न प्रकार के ईंधन मिश्रण को सुरक्षित रूप से इस्तेमाल कर सकें।
ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितना अहम है यह कदम?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सिर्फ एक ईंधन नीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
यदि भारत अगले कुछ वर्षों में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लगातार बढ़ाने में सफल रहता है तो:
- कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- किसानों की आय बढ़ेगी।
- कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
निष्कर्ष
22% से 30% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी हटाने का फैसला सिर्फ कर राहत नहीं बल्कि ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण से जुड़ी एक व्यापक नीति का हिस्सा है। इससे एथेनॉल उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और भारत की आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिलेगी। हालांकि, उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के व्यापक उपयोग से पहले वाहन अनुकूलता और उपभोक्ता स्वीकृति जैसी चुनौतियों का समाधान करना भी जरूरी होगा।


