नई दिल्ली भारत की औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार अप्रैल 2026 में कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की वृद्धि दर अप्रैल में 4.9 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 5.7 प्रतिशत थी।
Highlights
- अप्रैल 2026 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर घटकर 4.9% रही
- सरकार ने IIP का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया
- ऊर्जा क्षेत्र में सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर दिखा
- नई IIP श्रृंखला में 120 नए उत्पाद जोड़े गए, 64 पुराने उत्पाद हटाए गए
- विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में औद्योगिक गतिविधियों पर नजर रहेगी
यह आंकड़ा कई मायनों में खास है क्योंकि पहली बार IIP को नए आधार वर्ष 2022-23 के साथ जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि नई श्रृंखला देश की बदलती औद्योगिक संरचना को अधिक सटीक रूप से दर्शाएगी और उभरते उद्योगों को बेहतर प्रतिनिधित्व देगी।
आखिर IIP क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production) किसी देश की औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसके जरिए यह पता चलता है कि खनन, विनिर्माण, बिजली और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन कितना बढ़ा या घटा है।
अर्थशास्त्री IIP को आर्थिक विकास का शुरुआती संकेतक मानते हैं क्योंकि उद्योगों की गतिविधि बढ़ने से रोजगार, निवेश और खपत पर सकारात्मक असर पड़ता है। वहीं, उत्पादन में कमजोरी आर्थिक गतिविधियों के धीमा होने का संकेत दे सकती है।
किन क्षेत्रों ने प्रदर्शन को प्रभावित किया?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन मिश्रित रहा।
| क्षेत्र | वृद्धि दर |
|---|---|
| खनन एवं उत्खनन | -5.1% |
| विनिर्माण | 6.2% |
| बिजली | 4.9% |
| जल आपूर्ति एवं अपशिष्ट प्रबंधन | 6.6% |
सबसे बड़ी चिंता खनन क्षेत्र में 5.1 प्रतिशत की गिरावट रही। वहीं विनिर्माण क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर औद्योगिक गतिविधियों पर दिखाई देना शुरू हो गया है।
आधार वर्ष बदलने का क्या मतलब है?
सरकार ने IIP का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। आधार वर्ष वह अवधि होती है जिसके मुकाबले वर्तमान उत्पादन का मूल्यांकन किया जाता है।
पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत में बड़े बदलाव आए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल भुगतान, मेडिकल उपकरण, रक्षा उत्पादन और हाई-टेक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों का महत्व बढ़ा है। ऐसे में पुराने आधार वर्ष से उद्योगों की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ रही थी।
नई श्रृंखला का उद्देश्य आधुनिक औद्योगिक संरचना को बेहतर तरीके से मापना है।
नई IIP श्रृंखला में क्या बदला?
नई श्रृंखला में कुल 1,042 उत्पादों को शामिल किया गया है जिन्हें 463 मद समूहों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें 120 नए मद समूह जोड़े गए हैं।
नए शामिल उत्पादों में शामिल हैं:
- डेबिट और क्रेडिट कार्ड
- CCTV कैमरा
- गैर-बुने वस्त्र उत्पाद
- विमान एवं अंतरिक्ष यान के पुर्जे
- मेडिकल स्टेंट
- वैक्सीन
दूसरी ओर, कई पुराने उत्पादों को सूची से बाहर किया गया है, जिनमें केरोसिन, CFL बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब और कुछ पारंपरिक मशीनरी शामिल हैं।
यह बदलाव भारत की बदलती औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों को दर्शाता है।
उद्योग और निवेशकों के लिए क्या संकेत?
औद्योगिक विकास दर का 4.9 प्रतिशत पर आना पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं माना जा रहा है। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नए आधार वर्ष के कारण आंकड़ों की तुलना में कुछ बदलाव स्वाभाविक हैं।
हालांकि, यदि आने वाले महीनों में ऊर्जा क्षेत्र और खनन गतिविधियों में सुधार नहीं होता है तो इसका असर निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।
शेयर बाजार भी IIP आंकड़ों को ध्यान से देखता है क्योंकि मजबूत औद्योगिक उत्पादन का सीधा संबंध कॉर्पोरेट आय और आर्थिक गतिविधियों से होता है।
पश्चिम एशिया संकट का कितना असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। भारत ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर घरेलू उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो विनिर्माण लागत बढ़ सकती है और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव आ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले महीनों में निवेशक और नीति निर्माता विशेष रूप से विनिर्माण, बिजली उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों पर नजर रखेंगे। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है तो औद्योगिक उत्पादन में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
नई IIP श्रृंखला के साथ जारी यह पहला आंकड़ा भारतीय उद्योग की नई तस्वीर पेश करता है। हालांकि वृद्धि दर में कुछ नरमी जरूर दिखी है, लेकिन विनिर्माण और नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।


