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Reading: Cotton Import Duty Removed: विदेशी कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म, टेक्सटाइल उद्योग को राहत; लेकिन भारतीय किसानों पर क्या पड़ेगा असर?
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Cotton Import Duty Removed: विदेशी कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म, टेक्सटाइल उद्योग को राहत; लेकिन भारतीय किसानों पर क्या पड़ेगा असर?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 5:08 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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Cotton Import Duty News: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने देश के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को राहत देते हुए विदेशी कपास (Cotton) के आयात पर लगने वाली 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह छूट 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

Contents
Cotton Import Duty News: केंद्र सरकार का बड़ा फैसलासरकार ने क्या घोषणा की?आखिर कपास आयात शुल्क हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को कैसे मिलेगा फायदा?1. उत्पादन लागत घटेगी2. निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी3. छोटे उद्योगों को राहत4. उपभोक्ताओं को फायदाभारतीय किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?क्या कपास की कीमतों में गिरावट आ सकती है?भारत में कपास का महत्वसरकार का संतुलन बनाने का प्रयासविशेषज्ञ क्या कहते हैं?आम लोगों पर क्या असर होगा?निष्कर्ष

सरकार का कहना है कि इस फैसले से घरेलू वस्त्र उद्योग को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण कपास उपलब्ध हो सकेगा, उत्पादन लागत कम होगी और वैश्विक बाजार में भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। हालांकि, इस कदम ने कपास उत्पादक किसानों के बीच नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं कि कहीं सस्ता आयात उनकी फसल के दामों को प्रभावित न कर दे। भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है और कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यह फैसला उद्योग और कृषि दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार ने क्या घोषणा की?

To augment availability of cotton for the Indian textile sector, the Central Government has temporarily exempted all customs duties on import of cotton from 1st June, 2026 till 30th October, 2026.

The temporary duty exemption is expected to reduce input costs across the… pic.twitter.com/bn0dFMrhSi

— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) May 30, 2026

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम 1975 के अंतर्गत आने वाले कपास आयात पर लगने वाले सभी प्रमुख शुल्कों को पांच महीने के लिए समाप्त कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान कपास आयात पर 11% शुल्क नहीं लगेगा। कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) से भी छूट मिलेगी। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। सरकार के अनुसार यह कदम घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता बढ़ाने और उद्योग की कच्चे माल संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।

आखिर कपास आयात शुल्क हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ महीनों से भारतीय वस्त्र उद्योग लगातार सरकार से आयात शुल्क कम करने की मांग कर रहा था। उद्योग संगठनों का कहना था कि घरेलू बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले कपास की उपलब्धता सीमित है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई देशों का कपास बेहतर गुणवत्ता का माना जाता है। आयात शुल्क के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ रही थी। निर्यात ऑर्डर हासिल करने में भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान हो रहा था। टेक्सटाइल कंपनियों का तर्क था कि यदि उन्हें वैश्विक स्तर की गुणवत्ता वाला कपास सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जाए तो वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं।

टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को कैसे मिलेगा फायदा?

भारत का टेक्सटाइल सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। PIB के अनुसार, लगभग 4.5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। आयात शुल्क हटने से:

1. उत्पादन लागत घटेगी

विदेशी कपास सस्ता होने से कंपनियों का कच्चे माल पर खर्च कम होगा।

2. निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी

भारतीय कपड़ा और परिधान उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।

3. छोटे उद्योगों को राहत

विशेष रूप से MSME और छोटे वस्त्र निर्माताओं को कच्चे माल की लागत में राहत मिलेगी।

4. उपभोक्ताओं को फायदा

यदि लागत में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया गया तो कपड़ों की कीमतों में स्थिरता या कमी देखने को मिल सकती है।

भारतीय किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट अस्थायी है और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। इसके बावजूद किसान संगठनों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। किसानों का तर्क है कि यदि विदेशी कपास बड़ी मात्रा में और कम कीमत पर भारतीय बाजार में आता है तो घरेलू कपास की मांग प्रभावित हो सकती है। इसका असर निम्न रूप में दिखाई दे सकता है मंडियों में कपास के दाम दबाव में आ सकते हैं। किसानों को बेहतर मूल्य मिलने में कठिनाई हो सकती है। नई फसल के विपणन पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि छूट की अवधि ऐसी रखी गई है जिससे किसानों को न्यूनतम नुकसान हो और उद्योग की जरूरतें भी पूरी हो सकें।

क्या कपास की कीमतों में गिरावट आ सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर कई कारकों पर निर्भर करेगा:

  • वैश्विक कपास कीमतें
  • आयात की वास्तविक मात्रा
  • घरेलू उत्पादन
  • मानसून की स्थिति
  • निर्यात मांग

यदि आयात सीमित रहता है तो घरेलू बाजार में कीमतों पर बहुत अधिक दबाव नहीं आएगा। लेकिन बड़े पैमाने पर आयात होने की स्थिति में कीमतों में नरमी देखी जा सकती है।

भारत में कपास का महत्व

भारत विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है। मुख्य उत्पादक राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश. देश के लाखों किसान कपास की खेती पर निर्भर हैं। दूसरी ओर टेक्सटाइल उद्योग करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। इसलिए सरकार को हमेशा किसानों और उद्योग के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

सरकार का संतुलन बनाने का प्रयास

सरकार ने अपने बयान में कहा है कि यह निर्णय उद्योग और किसानों दोनों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार का मानना है कि उद्योग को पर्याप्त कपास मिलेगा। निर्यात क्षमता बढ़ेगी। रोजगार सुरक्षित रहेंगे। किसानों के हितों को भी नुकसान नहीं होगा क्योंकि यह व्यवस्था केवल सीमित अवधि के लिए लागू की गई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकाल में यह फैसला वस्त्र उद्योग के लिए सकारात्मक है। हालांकि दीर्घकाल में सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिले। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी रहें। आयात पर अत्यधिक निर्भरता न बढ़े। यदि उद्योग और कृषि दोनों के हितों में संतुलन बना रहता है तो यह कदम भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

इस फैसले का प्रभाव केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। संभावित प्रभाव: कपड़ा उत्पादन लागत कम हो सकती है। रेडीमेड गारमेंट्स की कीमतों पर दबाव कम होगा। निर्यात बढ़ने से रोजगार अवसर बढ़ सकते हैं। टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे में सुधार हो सकता है।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार द्वारा 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क और AIDC हटाने का फैसला भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे उद्योग को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध होगा, जबकि निर्यात प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। हालांकि इस कदम का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी कपास का आयात कितना बढ़ता है और इसका घरेलू बाजार पर कितना असर पड़ता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार किसानों और उद्योग दोनों के हितों के बीच संतुलन किस तरह बनाए रखती है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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