भारत के दिग्गज निवेशकों में शामिल Vijay Kedia ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman के सामने पूंजी बाजार को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने सूचीबद्ध शेयरों पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को खत्म करने की मांग की है।
विजय केडिया का मानना है कि भारत को आने वाले वर्षों में विश्वस्तरीय कंपनियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पैदा करने वाले बड़े उद्योग खड़े करने के लिए भारी मात्रा में लॉन्ग टर्म कैपिटल की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को ऐसी टैक्स नीति बनानी चाहिए जो लोगों को लंबे समय तक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करे, न कि केवल ट्रेडिंग और सट्टेबाजी को बढ़ावा दे।
क्यों चर्चा में आया LTCG टैक्स?
पिछले कुछ महीनों से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली देखने को मिली है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और सरकार भी निवेशकों के भरोसे को लेकर सतर्क नजर आ रही है। इसी बीच विजय केडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट लिखकर सरकार को तीन अहम सुझाव दिए। इनमें सबसे बड़ी मांग थी — लिस्टेड शेयरों पर LTCG टैक्स हटाने की।
आखिर क्या होता है LTCG टैक्स?
जब कोई निवेशक शेयरों को 1 साल से ज्यादा समय तक होल्ड करने के बाद बेचता है और उसे मुनाफा होता है, तो उस लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाता है। भारत में फिलहाल ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग टर्म गेन पर छूट इसके ऊपर तय दर से टैक्स लागू होता है।
विजय केडिया का तर्क है कि लॉन्ग टर्म निवेशक सट्टेबाज नहीं होता, बल्कि वह कंपनियों की ग्रोथ में भागीदार होता है। ऐसे निवेशक कंपनियों को स्थिर पूंजी उपलब्ध कराते हैं, जिससे नए प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, रोजगार पैदा होते हैं, रिसर्च और इनोवेशन बढ़ता है, अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है
Respected @nsitharaman ji and @FinMinIndia ,
Suggestion 1 of 3 for strengthening India's capital markets:
Long-term capital gains tax on listed equities should be abolished.
A long-term shareholder is not a speculator but a provider of patient risk capital. By investing in and…
— Vijay Kedia (@VijayKedia1) May 27, 2026 “सोने से पैसा निकालकर कंपनियों में लगाइए”
केडिया ने अपने पोस्ट में कहा कि भारत के परिवारों की बड़ी बचत आज भी सोना, रियल एस्टेट, निष्क्रिय संपत्तियों में फंसी हुई है। अगर सरकार बेहतर टैक्स नीति लाए तो यही पैसा शेयर बाजार और उत्पादक व्यवसायों में जा सकता है। इससे देश की कंपनियों को सस्ती और लंबी अवधि की पूंजी मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों की तरह भारत को भी निवेश और सट्टेबाजी में साफ अंतर करना चाहिए।
निवेशक बनाम ट्रेडर: केडिया ने क्यों उठाया मुद्दा?
विजय केडिया का मानना है कि वर्तमान टैक्स ढांचा कई बार लॉन्ग टर्म निवेशकों और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को लगभग एक ही नजर से देखता है। जबकि वास्तविकता यह है कि ट्रेडर बाजार की छोटी चालों से कमाई करता है लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशक कंपनियों की ग्रोथ यात्रा का हिस्सा बनता है
यही वजह है कि उन्होंने सरकार से “patient capital” यानी धैर्य वाले निवेश को प्रोत्साहित करने की मांग की।
क्या LTCG टैक्स हटाना संभव है?
विशेषज्ञों के मुताबिक LTCG टैक्स पूरी तरह हटाना सरकार के लिए आसान फैसला नहीं होगा क्योंकि इससे राजस्व पर असर पड़ सकता है। लेकिन बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि लॉन्ग टर्म टैक्स में राहत होल्डिंग पीरियड बढ़ाने पर छूट, रिटेल निवेशकों के लिए अतिरिक्त बेनिफिट जैसे कदम भविष्य में देखने को मिल सकते हैं।
बाजार और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर भविष्य में LTCG टैक्स में राहत मिलती है तो:
- लंबी अवधि का निवेश बढ़ सकता है
- SIP और इक्विटी निवेश को मजबूती मिल सकती है
- घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है
- बाजार में स्थिरता आ सकती है
हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैक्स पूरी तरह हटाने से अमीर निवेशकों को ज्यादा फायदा मिल सकता है, इसलिए सरकार संतुलित फैसला लेना चाहेगी।
भारत को क्यों चाहिए Long-Term Capital?
भारत इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस, डिजिटल इकोनॉमी जैसे सेक्टरों में भारी निवेश की तैयारी कर रहा है।
इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पूंजी की जरूरत होगी। ऐसे में घरेलू निवेशकों को शेयर बाजार में लंबे समय तक पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित करना सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा बन सकता है।
निष्कर्ष
विजय केडिया की मांग सिर्फ टैक्स हटाने तक सीमित नहीं है। उनका बड़ा संदेश यह है कि भारत को अब ट्रेडिंग-आधारित बाजार से आगे बढ़कर निवेश-आधारित पूंजी संस्कृति तैयार करनी होगी।
अगर सरकार लॉन्ग टर्म निवेशकों को ज्यादा प्रोत्साहन देती है, तो इससे कंपनियों को मजबूत पूंजी मिलेगी, घरेलू निवेश बढ़ेगा, विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हो सकती है, और भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।
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