दिल्ली समेत देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी अब आम आदमी की रसोई पर भी असर डाल सकती है। अभी तक लोग सिर्फ वाहन चलाने और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने की चिंता कर रहे थे, लेकिन अब इसका असर फल और सब्जियों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। खासकर टमाटर, प्याज, आलू और हरी सब्जियों जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजें आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी आजादपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि अगर डीजल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खुदरा बाजार में कीमतें ऊपर जाएंगी। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
लगातार चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी वृद्धि है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले हफ्तों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर सिर्फ वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
क्यों महंगी हो जाती हैं सब्जियां?
भारत में ज्यादातर फल और सब्जियां ट्रकों के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाई जाती हैं। दिल्ली की आजादपुर मंडी में हर दिन हजारों टन सब्जियां और फल देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं। इन ट्रकों का सबसे बड़ा खर्च डीजल होता है।
जब डीजल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट कंपनियां किराया बढ़ा देती हैं। यही अतिरिक्त लागत धीरे-धीरे मंडियों तक पहुंचती है और फिर खुदरा बाजार में ग्राहकों से वसूली जाती है।
आजादपुर मंडी फेडरेशन ऑफ फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि अभी तक थोक कीमतों पर बड़ा असर नहीं दिखा है, लेकिन लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें आने वाले दिनों में बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी बढ़ोतरी का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन अगर कुल मिलाकर ईंधन काफी महंगा हो जाए तो फल और सब्जियों के दाम बढ़ना तय है।
किन सब्जियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार जिन सब्जियों और फलों की सप्लाई लंबी दूरी से होती है, उन पर सबसे पहले असर दिखाई देता है। इनमें शामिल हैं टमाटर, प्याज, आलू, हरी सब्जियां, केला, सेब, अंगूर, संतरा. उदाहरण के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक या हिमाचल प्रदेश से आने वाले उत्पादों की ढुलाई लागत ज्यादा होती है। ऐसे में डीजल महंगा होने पर इनकी कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
टमाटर और प्याज क्यों बनते हैं महंगाई का चेहरा?
भारत में टमाटर और प्याज ऐसी फसलें हैं जिनकी कीमतों में थोड़ी भी तेजी तुरंत राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन जाती है। इसकी वजह यह है कि ये दोनों लगभग हर घर की रसोई का हिस्सा हैं।
टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है। इसकी कोल्ड स्टोरेज क्षमता सीमित होती है, इसलिए इसे तेजी से बाजार तक पहुंचाना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने पर इसका असर तुरंत कीमतों पर दिखाई देता है। वहीं प्याज की सप्लाई बड़ी मात्रा में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से होती है। लंबी दूरी की ढुलाई में डीजल लागत का बड़ा योगदान होता है।
ट्रांसपोर्टर बढ़ाएंगे किराया?
वेजिटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिल मल्होत्रा ने कहा कि ट्रकों का किराया बढ़ना लगभग तय माना जाता है। उन्होंने बताया कि देशभर से फल और सब्जियां दिल्ली लाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता है और डीजल महंगा होने पर ट्रांसपोर्टर अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डालते हैं।
मंडी के कारोबारियों के मुताबिक अभी ट्रांसपोर्ट कंपनियां हालात पर नजर रख रही हैं, लेकिन अगर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो अगले कुछ दिनों में माल ढुलाई शुल्क बढ़ सकता है।
आम आदमी की रसोई पर कितना असर?
अगर डीजल कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो आने वाले हफ्तों में दिल्ली-एनसीआर समेत बड़े शहरों में सब्जियों की कीमतों में 5% से 15% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रांसपोर्ट लागत कितनी बढ़ती है और सप्लाई कितनी प्रभावित होती है।
महंगाई का असर सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं रहेगा। दूध, ब्रेड, किराना, ऑनलाइन डिलीवरी, बस किराया और कैब सेवाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है।
क्या सरकार राहत दे सकती है?
पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें भारी टैक्स वसूलती हैं। ऐसे में अक्सर मांग उठती है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी और वैट कम करे ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।हालांकि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ईंधन पर टैक्स घटाने से सरकार को बड़े राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में फिलहाल तत्काल राहत की संभावना कम दिखाई दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी बड़ा रोल
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
अगर वैश्विक बाजार में कच्चा तेल और महंगा होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर खाद्य महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है।
आने वाले दिनों में क्या हो सकता है?
व्यापारियों का कहना है कि अभी बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। अगर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी रुक जाती है तो सब्जियों की कीमतों पर सीमित असर होगा। लेकिन अगर अगले कुछ हफ्तों तक यही स्थिति बनी रही तो खुदरा बाजार में महंगाई बढ़ सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर ट्रांसपोर्ट लागत और मंडी कीमतों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में टमाटर, प्याज और दूसरी जरूरी सब्जियों की कीमतें आम आदमी की चिंता और बढ़ा सकती हैं।
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