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कपास से 11% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की तैयारी में सरकार, टेक्सटाइल उद्योग को मिल सकती है बड़ी राहत

Namam Sharma
Last updated: 2026/05/24 at 7:15 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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भारत सरकार कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क (Import Duty) को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है तो इससे देश के टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है। लंबे समय से उद्योग जगत यह मांग कर रहा था कि आयातित कपास पर लगने वाली ड्यूटी खत्म की जाए, ताकि बढ़ती लागत और कच्चे माल की कमी से जूझ रहे कारोबार को सहारा मिल सके।

Contents
आखिर क्यों उठी कपास पर ड्यूटी हटाने की मांग?टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर कैसे पड़ रहा असर?किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय में क्यों है मतभेद?कृषि मंत्रालय की चिंताकपड़ा मंत्रालय की दलीलउपराष्ट्रपति से भी मिले उद्योग प्रतिनिधिक्या सस्ता हो सकता है कपड़ा?भारत के लिए क्यों अहम है टेक्सटाइल सेक्टर?क्या जल्द हो सकता है फैसला?

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस मामले में वित्त मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के बीच चर्चा अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार बड़ा फैसला ले सकती है।

आखिर क्यों उठी कपास पर ड्यूटी हटाने की मांग?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादन और मांग के बीच बढ़ता अंतर है।

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कपड़ा उद्योग को लगभग 337 लाख गांठ कपास की जरूरत पड़ सकती है। जबकि घरेलू उत्पादन करीब 292.15 लाख गांठ रहने का अनुमान है। यानी मांग और सप्लाई के बीच लगभग 45 लाख गांठ का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।

एक गांठ कपास का वजन लगभग 170 किलोग्राम माना जाता है। ऐसे में उद्योग को इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशों से कपास आयात करना पड़ता है। लेकिन आयातित कपास पर 11 प्रतिशत ड्यूटी लगने से उसकी कीमत काफी बढ़ जाती है, जिससे गारमेंट और टेक्सटाइल कंपनियों की लागत बढ़ रही है।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर कैसे पड़ रहा असर?

कपास की कीमत बढ़ने का सीधा असर कपड़ा उद्योग की उत्पादन लागत पर पड़ता है। भारत का टेक्सटाइल सेक्टर बड़े पैमाने पर निर्यात आधारित उद्योग है। अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों में भारतीय गारमेंट्स और फैब्रिक की भारी मांग रहती है।

हालांकि हाल के वर्षों में बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ी है। इन देशों में कच्चे माल की लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण वहां के निर्यातकों को फायदा मिलता है। भारतीय उद्योग का कहना है कि अगर कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी जाए तो भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। गारमेंट एक्सपोर्टर्स का मानना है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा, फैक्ट्रियों का संचालन बेहतर होगा, नए रोजगार पैदा होंगे

किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यदि सरकार कपास पर आयात शुल्क हटाती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को मिलेगा। विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट निर्माता, सूत (Yarn) उद्योग, फैब्रिक कंपनियां, निर्यातक, छोटे और मध्यम टेक्सटाइल कारोबारी को राहत मिलने की संभावना है।

इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से लाखों कामगारों को भी फायदा हो सकता है। सरकार के PIB आंकड़ों के मुताबिक देश का टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। यह कृषि के बाद देश का सबसे बड़ा रोजगार देने वाला सेक्टर माना जाता है। ऐसे में यदि लागत कम होती है और निर्यात बढ़ता है तो रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय में क्यों है मतभेद?

सूत्रों के मुताबिक कपास पर ड्यूटी हटाने को लेकर कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय की राय अलग-अलग है।

कृषि मंत्रालय की चिंता

कृषि मंत्रालय का मानना है कि यदि आयात शुल्क हटा दिया गया तो विदेश से सस्ता कपास भारत आएगा, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है। खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और पंजाब जैसे कपास उत्पादक राज्यों के किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।

कपड़ा मंत्रालय की दलील

वहीं कपड़ा मंत्रालय और उद्योग संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में घरेलू उत्पादन मांग पूरी नहीं कर पा रहा। ऐसे में आयात पर शुल्क बनाए रखना उद्योग को कमजोर कर रहा है। उद्योग का तर्क है कि यदि कच्चा माल महंगा रहेगा तो भारत का निर्यात प्रभावित होगा और विदेशी खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।

उपराष्ट्रपति से भी मिले उद्योग प्रतिनिधि

हाल ही में टेक्सटाइल उद्योग और निर्यातकों के प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से भी मुलाकात की थी। इस दौरान उद्योग जगत ने सरकार से मांग की कि कपास पर लगने वाली 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी को जल्द हटाया जाए।

प्रतिनिधियों का कहना था कि वर्तमान शुल्क व्यवस्था भारतीय उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कमजोर बना रही है। यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाया तो निर्यात और रोजगार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

क्या सस्ता हो सकता है कपड़ा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात शुल्क हटता है और उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिलता है तो भविष्य में कपड़ों की कीमतों पर भी इसका असर दिख सकता है। हालांकि इसका सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा या नहीं, यह बाजार की स्थिति और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल उद्योग की प्राथमिक चिंता लागत कम करने और वैश्विक ऑर्डर बचाने की है।

भारत के लिए क्यों अहम है टेक्सटाइल सेक्टर?

भारत का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सेक्टर GDP में बड़ा योगदान देता है,करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, विदेशी मुद्रा कमाने का प्रमुख स्रोत है. भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल होने के साथ-साथ बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक भी है। ऐसे में सरकार के लिए किसानों और उद्योग दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

क्या जल्द हो सकता है फैसला?

सरकारी सूत्रों के अनुसार मंत्रालयों के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार इस पर बड़ा निर्णय ले सकती है। यदि ड्यूटी हटाई जाती है तो यह टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जबकि किसानों के हितों को लेकर सरकार को अलग रणनीति बनानी पड़ सकती है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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